शैव और भागवत धर्म - नोट्स, 39 MCQ | UPSC, SSC, Railway परीक्षा

शैव एवं भागवत धर्म

UPSC, SSC, Railway एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु संपूर्ण गाइड

शैव धर्म (Shaivism)

शैव धर्म भगवान शिव की पूजा करने वालों का धर्म है। यह भारत के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है, जिसकी जड़ें प्रागैतिहासिक काल तक जाती हैं।

प्रमुख तथ्य एवं ऐतिहासिक विकास:

  • उत्पत्ति: सिंधु घाटी सभ्यता में मिली मुहरों पर योगी की आकृति (पशुपति शिव) को इसका प्रारंभिक रूप माना जाता है।
  • वैदिक काल: ऋग्वेद में शिव का उल्लेख 'रुद्र' के रूप में मिलता है, जो एक उग्र देवता थे।
  • पुराणों में: मत्स्य पुराण में लिंग पूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मिलता है। वामन पुराण में शैव संप्रदायों की संख्या चार बताई गई है - पाशुपत, कापालिक, कालामुख, और शैव।
  • प्रमुख संप्रदाय:
    • पाशुपत: यह सबसे प्राचीन शैव संप्रदाय है। इसके संस्थापक 'लकुलीश' थे, जिन्हें भगवान शिव का 18वां अवतार माना जाता है।
    • कापालिक: इनके इष्ट देव 'भैरव' थे। ये नर-खोपड़ी में भोजन और जल ग्रहण करते थे।
    • कालामुख: ये कापालिकों के ही अतिवादी रूप थे।
    • लिंगायत (वीरशैव): 12वीं शताब्दी में दक्षिण भारत में 'बसव' (या बसवन्ना) ने इसकी स्थापना की। यह जाति प्रथा का विरोध करता था।
    • नाथ संप्रदाय: 10वीं शताब्दी में मत्स्येन्द्रनाथ ने इसकी स्थापना की। गोरखनाथ के समय में यह बहुत लोकप्रिय हुआ।
  • दक्षिण भारत में: पल्लव, चोल, राष्ट्रकूट और चालुक्य शासकों ने शैव धर्म को संरक्षण दिया। चोल शासक राजराज प्रथम द्वारा निर्मित 'बृहदीश्वर मंदिर' (राजराजेश्वर मंदिर) शैव धर्म का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • नयनार संत: दक्षिण में शैव धर्म का प्रचार करने वाले संतों को 'नयनार' कहा गया। इनकी संख्या 63 थी।

भागवत धर्म (Bhagavatism/Vaishnavism)

भागवत धर्म का केंद्र बिंदु 'भक्ति' है, जिसका विकास वैष्णव धर्म के रूप में हुआ। इसके प्रमुख देवता विष्णु या नारायण हैं, जिनकी पूजा वासुदेव-कृष्ण के रूप में की जाती है।

प्रमुख तथ्य एवं ऐतिहासिक विकास:

  • प्रारंभिक उल्लेख: इसका उल्लेख उपनिषदों में मिलता है। इसके प्रवर्तक वृष्णि (सात्वत) वंशी कृष्ण थे, जिनका निवास स्थान मथुरा था।
  • विदेशी साक्ष्य: यूनानी राजदूत 'मेगस्थनीज' ने शूरसेन (मथुरा) के लोगों द्वारा 'हेराक्लीज' (वासुदेव कृष्ण) की पूजा का उल्लेख किया है।
  • अभिलेखीय साक्ष्य: सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य 'बेस नगर' (विदिशा) का 'गरुड़ स्तंभ' है, जिसे यवन राजदूत 'हेलियोडोरस' ने भागवत धर्म ग्रहण करके स्थापित करवाया था।
  • प्रमुख सिद्धांत:
    • अवतारवाद: यह इस धर्म का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है। इसमें माना जाता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है, विष्णु अवतार लेते हैं। मत्स्य पुराण में विष्णु के दस अवतारों (दशावतार) का उल्लेख है।
    • व्यूह सिद्धांत: इसमें वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध नामक चार देवताओं की पूजा का विधान था।
  • गुप्त काल: यह काल वैष्णव धर्म का चरमोत्कर्ष काल था। गुप्त शासक 'परम भागवत' की उपाधि धारण करते थे और उनका राजचिह्न 'गरुड़' था।
  • आलवार संत: दक्षिण भारत में वैष्णव धर्म का प्रचार करने वाले संतों को 'आलवार' कहा गया। इनकी संख्या 12 थी। इनमें 'आंडाल' नामक एक महिला संत भी थीं।

महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

1. सबसे प्राचीन शैव संप्रदाय कौन सा है?

  • (A) कापालिक
  • (B) पाशुपत
  • (C) कालामुख
  • (D) लिंगायत

उत्तर: (B) पाशुपत

व्याख्या: पाशुपत शैव धर्म का सबसे प्राचीन संप्रदाय है। इसके संस्थापक लकुलीश थे, जिन्हें शिव का अवतार माना जाता है।

2. भागवत धर्म से संबंधित 'बेस नगर' का गरुड़ स्तंभ किसने स्थापित करवाया था?

  • (A) मेगस्थनीज
  • (B) एंटियालकिड्स
  • (C) हेलियोडोरस
  • (D) मिनेंडर

उत्तर: (C) हेलियोडोरस

व्याख्या: तक्षशिला के यवन शासक एंटियालकिड्स के राजदूत हेलियोडोरस ने शुंग शासक भागभद्र के दरबार में भागवत धर्म अपनाकर विदिशा (बेस नगर) में गरुड़ स्तंभ की स्थापना की थी।

3. दक्षिण भारत में शैव धर्म का प्रचार करने वाले संतों को क्या कहा जाता था?

  • (A) आलवार
  • (B) भगवत्
  • (C) नयनार
  • (D) वीरशैव

उत्तर: (C) नयनार

व्याख्या: दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन के दौरान शैव धर्म के अनुयायी संतों को 'नयनार' कहा गया। इनकी कुल संख्या 63 थी। 'आलवार' संत वैष्णव धर्म के अनुयायी थे।

4. 'वीरशैव' या 'लिंगायत' संप्रदाय के संस्थापक कौन थे?

  • (A) मत्स्येन्द्रनाथ
  • (B) बसवन्ना
  • (C) लकुलीश
  • (D) रामानुज

उत्तर: (B) बसवन्ना

व्याख्या: 12वीं शताब्दी में कर्नाटक में बसव (या बसवन्ना) और उनके भतीजे चन्नबसव ने वीरशैव संप्रदाय की स्थापना की। वे जाति-प्रथा और कर्मकांडों के विरोधी थे।

5. विष्णु के दस अवतारों का उल्लेख किस पुराण में मिलता है?

  • (A) वामन पुराण
  • (B) गरुड़ पुराण
  • (C) वायु पुराण
  • (D) मत्स्य पुराण

उत्तर: (D) मत्स्य पुराण

व्याख्या: अवतारवाद वैष्णव धर्म का एक प्रमुख सिद्धांत है। मत्स्य पुराण में भगवान विष्णु के प्रसिद्ध दस अवतारों (मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि) का व्यवस्थित वर्णन मिलता है।

6. एलोरा का प्रसिद्ध कैलाश मंदिर किस राजवंश ने बनवाया था?

  • (A) चोल
  • (B) पल्लव
  • (C) राष्ट्रकूट
  • (D) चालुक्य

उत्तर: (C) राष्ट्रकूट

व्याख्या: एलोरा (महाराष्ट्र) का कैलाश मंदिर (गुफा संख्या 16) एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया विश्व का सबसे बड़ा मंदिर है। इसका निर्माण राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम ने करवाया था और यह भगवान शिव को समर्पित है।

7. आलवार संतों में एकमात्र महिला संत का क्या नाम था?

  • (A) कराईकल अम्मइयार
  • (B) मीराबाई
  • (C) लल्लेश्वरी
  • (D) आंडाल

उत्तर: (D) आंडाल

व्याख्या: आलवार वैष्णव संत थे, जिनकी संख्या 12 थी। आंडाल एकमात्र महिला आलवार संत थीं। उन्हें 'दक्षिण की मीरा' भी कहा जाता है। कराईकल अम्मइयार एक नयनार (शैव) संत थीं।

8. 'अर्धनारीश्वर' की मूर्ति में आधे शिव तथा आधी पार्वती किसका प्रतीक हैं?

  • (A) देवता और देवी का योग
  • (B) पुरुष और नारी का योग
  • (C) देव और उसकी शक्ति का योग
  • (D) उपरोक्त में से कोई नहीं

उत्तर: (C) देव और उसकी शक्ति का योग

व्याख्या: अर्धनारीश्वर रूप शिव (पुरुष तत्व) और शक्ति (प्रकृति या स्त्री तत्व) के एकाकार होने का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि पुरुष और प्रकृति अविभाज्य हैं और एक दूसरे के पूरक हैं। यह अवधारणा गुप्त काल में बहुत लोकप्रिय हुई।

9. 'परम भागवत' की उपाधि धारण करने वाला प्रथम गुप्त शासक कौन था?

  • (A) चंद्रगुप्त प्रथम
  • (B) समुद्रगुप्त
  • (C) चंद्रगुप्त द्वितीय
  • (D) कुमारगुप्त

उत्तर: (C) चंद्रगुप्त द्वितीय

व्याख्या: यद्यपि गुप्त शासक वैष्णव धर्म के अनुयायी थे, 'परम भागवत' की उपाधि आधिकारिक रूप से धारण करने वाला पहला शासक चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) था। कुछ स्रोतों में समुद्रगुप्त का भी उल्लेख मिलता है, लेकिन चंद्रगुप्त द्वितीय अधिक स्वीकृत उत्तर है।

10. नयनार संतों की कुल संख्या कितनी थी?

  • (A) 12
  • (B) 53
  • (C) 63
  • (D) 108

उत्तर: (C) 63

व्याख्या: नयनार तमिल कवि-संत थे जो 6वीं से 8वीं शताब्दी के बीच सक्रिय थे और भगवान शिव के प्रति समर्पित थे। उनकी कुल संख्या 63 मानी जाती है। आलवार संतों की संख्या 12 थी।

11. किस देवता को ऋग्वेद में 'रुद्र' के रूप में संबोधित किया गया है?

  • (A) इंद्र
  • (B) अग्नि
  • (C) शिव
  • (D) वरुण

उत्तर: (C) शिव

व्याख्या: ऋग्वेद में 'रुद्र' नामक एक शक्तिशाली और उग्र देवता का वर्णन है, जिन्हें बाद के पौराणिक काल में भगवान शिव के साथ एकीकृत कर दिया गया।

12. 'भगवद्गीता' महाभारत के किस पर्व का अंश है?

  • (A) आदि पर्व
  • (B) सभा पर्व
  • (C) वन पर्व
  • (D) भीष्म पर्व

उत्तर: (D) भीष्म पर्व

व्याख्या: भगवद्गीता, जो भागवत धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ है, महाभारत के छठे पर्व 'भीष्म पर्व' का एक हिस्सा है। इसमें कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश है।

13. तंजौर का बृहदीश्वर मंदिर किस चोल शासक ने बनवाया था?

  • (A) राजराज प्रथम
  • (B) राजेंद्र प्रथम
  • (C) कुलोत्तुंग प्रथम
  • (D) विजयालय

उत्तर: (A) राजराज प्रथम

व्याख्या: तंजौर (तन्जावुर) का प्रसिद्ध बृहदीश्वर मंदिर (या राजराजेश्वर मंदिर) चोल सम्राट राजराज प्रथम ने लगभग 1010 ई. में बनवाया था। यह द्रविड़ वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है और भगवान शिव को समर्पित है।

14. यूनानी लेखक मेगस्थनीज ने कृष्ण को किस नाम से संबोधित किया है?

  • (A) डायोनिसस
  • (B) हेराक्लीज
  • (C) अपोलो
  • (D) ज़ीउस

उत्तर: (B) हेराक्लीज

व्याख्या: चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में यूनानी राजदूत मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में मथुरा क्षेत्र के शूरसेन लोगों द्वारा 'हेराक्लीज' नामक देवता की पूजा का उल्लेख किया है, जिसकी पहचान विद्वानों द्वारा वासुदेव-कृष्ण से की जाती है।

15. नाथ संप्रदाय की स्थापना किसने की थी?

  • (A) गोरखनाथ
  • (B) बसवन्ना
  • (C) मत्स्येन्द्रनाथ
  • (D) लकुलीश

उत्तर: (C) मत्स्येन्द्रनाथ

व्याख्या: नाथ संप्रदाय की स्थापना 10वीं शताब्दी में मत्स्येन्द्रनाथ ने की थी। हालांकि, इसे प्रसिद्धि और व्यवस्थित रूप उनके शिष्य गोरखनाथ ने प्रदान किया।

16. 'चतुर्व्यूह' सिद्धांत किस धर्म से संबंधित है?

  • (A) शैव धर्म
  • (B) बौद्ध धर्म
  • (C) जैन धर्म
  • (D) भागवत धर्म

उत्तर: (D) भागवत धर्म

व्याख्या: चतुर्व्यूह (या व्यूह सिद्धांत) भागवत/वैष्णव धर्म से संबंधित है। इसमें चार प्रमुख देवताओं - वासुदेव (कृष्ण), संकर्षण (बलराम), प्रद्युम्न (कृष्ण के पुत्र), और अनिरुद्ध (कृष्ण के पौत्र) की पूजा का विधान है।

17. कापालिक संप्रदाय के इष्ट देव कौन थे?

  • (A) शिव
  • (B) भैरव
  • (C) रुद्र
  • (D) वीरभद्र

उत्तर: (B) भैरव

व्याख्या: कापालिक एक शैव संप्रदाय था जो तांत्रिक क्रियाओं पर जोर देता था। उनके प्रमुख आराध्य देव शिव के उग्र रूप 'भैरव' थे।

18. गुप्त शासकों का राजचिह्न क्या था?

  • (A) वृषभ (बैल)
  • (B) गरुड़
  • (C) सिंह (शेर)
  • (D) हाथी

उत्तर: (B) गरुड़

व्याख्या: गुप्त शासक वैष्णव धर्म के महान संरक्षक थे। भगवान विष्णु का वाहन 'गरुड़' उनका राजचिह्न था, जो उनके सिक्कों और अभिलेखों पर अंकित मिलता है।

19. 'त्रिपिटक' किस धर्म का ग्रंथ है?

  • (A) शैव धर्म
  • (B) वैष्णव धर्म
  • (C) बौद्ध धर्म
  • (D) यह प्रश्न विषय से बाहर है

उत्तर: (D) यह प्रश्न विषय से बाहर है

व्याख्या: यह प्रश्न शैव या भागवत धर्म से संबंधित नहीं है। 'त्रिपिटक' (सुत्त पिटक, विनय पिटक, अभिधम्म पिटक) बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रंथ है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह के भ्रामक विकल्प दिए जा सकते हैं।

20. 'कश्मीरी शैवधर्म' को अन्य किस नाम से जाना जाता है?

  • (A) त्रिक दर्शन
  • (B) स्पंदशास्त्र
  • (C) प्रत्यभिज्ञा दर्शन
  • (D) उपरोक्त सभी

उत्तर: (D) उपरोक्त सभी

व्याख्या: कश्मीरी शैवधर्म एक अद्वैतवादी और दार्शनिक शाखा है। इसे त्रिक दर्शन (शिव, शक्ति और अणु के तीन सिद्धांतों के कारण), स्पंदशास्त्र और प्रत्यभिज्ञा दर्शन के नाम से भी जाना जाता है। वसुगुप्त इसके प्रमुख प्रवर्तकों में से एक थे।

21. आलवार संतों की संख्या कितनी थी?

  • (A) 10
  • (B) 12
  • (C) 63
  • (D) 84

उत्तर: (B) 12

व्याख्या: आलवार तमिल कवि-संत थे जो भगवान विष्णु को समर्पित थे। उनकी कुल संख्या 12 मानी जाती है। नयनार (शैव) संतों की संख्या 63 थी।

22. लिंग पूजा का पहला स्पष्ट वर्णन कहाँ मिलता है?

  • (A) महाभारत में
  • (B) मत्स्य पुराण में
  • (C) ऋग्वेद में
  • (D) अथर्ववेद में

उत्तर: (B) मत्स्य पुराण में

व्याख्या: यद्यपि लिंग पूजा के संकेत सिंधु घाटी सभ्यता और महाभारत में मिलते हैं, लेकिन इसका पहला सुस्पष्ट साहित्यिक वर्णन मत्स्य पुराण में मिलता है।

23. 'दिव्य प्रबन्धम्' किसका संकलन है?

  • (A) नयनारों के भजनों का
  • (B) आलवारों के भजनों का
  • (C) कबीर के दोहों का
  • (D) तुलसीदास की रचनाओं का

उत्तर: (B) आलवारों के भजनों का

व्याख्या: 'नालायिर दिव्य प्रबन्धम्' 12 आलवार संतों द्वारा रचित 4000 तमिल छंदों का एक संग्रह है। इसे 'तमिल वेद' भी कहा जाता है और यह वैष्णव साहित्य की एक अमूल्य निधि है।

24. वामन पुराण में शैव संप्रदायों की संख्या कितनी बताई गई है?

  • (A) दो
  • (B) तीन
  • (C) चार
  • (D) पाँच

उत्तर: (C) चार

व्याख्या: वामन पुराण के अनुसार, शैव धर्म के चार प्रमुख संप्रदाय थे: शैव, पाशुपत, कापालिक और कालामुख।

25. 'दक्षिण की मीरा' किसे कहा जाता है?

  • (A) कराईकल अम्मइयार
  • (B) आंडाल
  • (C) अक्का महादेवी
  • (D) सहजोबाई

उत्तर: (B) आंडाल

व्याख्या: आंडाल, जो 12 आलवार संतों में एकमात्र महिला थीं, भगवान विष्णु के प्रति अपनी गहन भक्ति के लिए जानी जाती हैं। उनकी तुलना अक्सर उत्तर भारत की मीराबाई से की जाती है, इसलिए उन्हें 'दक्षिण की मीरा' कहा जाता है।

26. पाशुपत संप्रदाय के संस्थापक लकुलीश का जन्म कहाँ हुआ था?

  • (A) गुजरात
  • (B) राजस्थान
  • (C) बिहार
  • (D) उत्तर प्रदेश

उत्तर: (A) गुजरात

व्याख्या: माना जाता है कि पाशुपत संप्रदाय के संस्थापक लकुलीश का जन्म गुजरात के कायावरोहण (कारवन) नामक स्थान पर हुआ था।

27. 'पंचरात्र' मत किस धर्म से संबंधित है?

  • (A) शैव धर्म
  • (B) शाक्त धर्म
  • (C) वैष्णव धर्म
  • (D) जैन धर्म

उत्तर: (C) वैष्णव धर्म

व्याख्या: पंचरात्र आगम वैष्णव धर्म के प्रमुख ग्रंथ हैं। यह मत नारायण (विष्णु) को परम तत्व मानता है और व्यूह सिद्धांत पर जोर देता है।

28. सिंधु घाटी की एक मुहर पर चित्रित 'पशुपति शिव' की पहचान किसने की?

  • (A) आर. डी. बनर्जी
  • (B) दयाराम साहनी
  • (C) जॉन मार्शल
  • (D) अलेक्जेंडर कनिंघम

उत्तर: (C) जॉन मार्शल

व्याख्या: पुरातत्ववेत्ता सर जॉन मार्शल ने मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर पर अंकित, पशुओं से घिरे एक योगी की आकृति की पहचान आद्य-शिव या 'पशुपति' के रूप में की थी।

29. वैष्णव धर्म का प्रारंभिक रूप मुख्यतः किसकी पूजा पर केंद्रित था?

  • (A) सूर्य
  • (B) भगवत् वासुदेव
  • (C) इंद्र
  • (D) ब्रह्मा

उत्तर: (B) भगवत् वासुदेव

व्याख्या: वैष्णव धर्म का प्रारंभिक रूप भागवत धर्म के नाम से जाना जाता था, जो मुख्य रूप से वृष्णि नायक वासुदेव (कृष्ण) की भक्ति और पूजा पर केंद्रित था।

30. शैव धर्म के इतिहास में 'कालामुख' संप्रदाय के अनुयायी क्या करते थे?

  • (A) केवल दूध का सेवन करते थे
  • (B) नर-कपाल में भोजन करते थे
  • (C) मौन व्रत रखते थे
  • (D) सफेद वस्त्र पहनते थे

उत्तर: (B) नर-कपाल में भोजन करते थे

व्याख्या: कालामुख संप्रदाय, कापालिकों का ही एक अतिवादी रूप था। शिव पुराण के अनुसार, वे मानव खोपड़ी (नर-कपाल) में भोजन, जल और सुरापान करते थे और शरीर पर चिता की भस्म लगाते थे।

31. अंकोरवाट का प्रसिद्ध विष्णु मंदिर कहाँ स्थित है?

  • (A) जावा
  • (B) सुमात्रा
  • (C) कंबोडिया
  • (D) चंपा

उत्तर: (C) कंबोडिया

व्याख्या: अंकोरवाट का विशाल मंदिर कंबोडिया में स्थित है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में खमेर राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने करवाया था।

32. 'शैव सिद्धांत' दर्शन किस क्षेत्र में प्रमुख था?

  • (A) उत्तर भारत
  • (B) पूर्वी भारत
  • (C) कश्मीर
  • (D) दक्षिण भारत (तमिलनाडु)

उत्तर: (D) दक्षिण भारत (तमिलनाडु)

व्याख्या: शैव सिद्धांत एक प्रमुख शैव दार्शनिक प्रणाली है जो दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में फली-फूली। यह नयनार संतों की भक्ति पर आधारित है।

33. 'श्रीमद्भागवत पुराण' किस देवता पर केंद्रित है?

  • (A) शिव
  • (B) ब्रह्मा
  • (C) कृष्ण
  • (D) गणेश

उत्तर: (C) कृष्ण

व्याख्या: श्रीमद्भागवत पुराण, जिसे भागवतम भी कहा जाता है, वैष्णव धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है। यह मुख्य रूप से भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण की लीलाओं और भक्ति पर केंद्रित है।

34. किस गुप्त शासक के सिक्कों पर वीणा बजाते हुए दिखाया गया है, जो उसकी संगीत रुचि के साथ-साथ वैष्णव प्रभाव को भी दर्शाता है?

  • (A) चंद्रगुप्त प्रथम
  • (B) समुद्रगुप्त
  • (C) कुमारगुप्त
  • (D) स्कंदगुप्त

उत्तर: (B) समुद्रगुप्त

व्याख्या: समुद्रगुप्त के कुछ स्वर्ण सिक्कों पर उन्हें वीणा बजाते हुए चित्रित किया गया है। यद्यपि यह उनकी संगीत में रुचि को दर्शाता है, गुप्त काल का वैष्णव धर्म के प्रति झुकाव भी सर्वविदित है।

35. 'तेवरम' और 'तिरुवाचकम' किनके भजनों के संग्रह हैं?

  • (A) आलवार
  • (B) नयनार
  • (C) सिद्ध
  • (D) नाथपंथी

उत्तर: (B) नयनार

व्याख्या: 'तेवरम' अप्पार, सम्बंदर और सुंदरार जैसे प्रमुख नयनार संतों के भजनों का संकलन है। 'तिरुवाचकम' मणिक्कवाचकर द्वारा रचित शैव भजनों का एक और महत्वपूर्ण संग्रह है।

36. भागवत धर्म में 'भक्ति' का क्या अर्थ है?

  • (A) ज्ञान
  • (B) कर्मकांड
  • (C) निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण
  • (D) तपस्या

उत्तर: (C) निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण

व्याख्या: भागवत धर्म का मूल तत्व 'भक्ति' है, जिसका अर्थ है ईश्वर के प्रति पूर्ण, निःस्वार्थ और प्रेमपूर्ण समर्पण। यह मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग माना गया है।

37. निम्नलिखित में से कौन एक नयनार संत नहीं थे?

  • (A) अप्पार
  • (B) सम्बंदर
  • (C) सुंदरार
  • (D) नम्मालवार

उत्तर: (D) नम्मालवार

व्याख्या: अप्पार, सम्बंदर और सुंदरार सबसे प्रमुख नयनार (शैव) संतों में से थे। नम्मालवार एक बहुत ही महत्वपूर्ण आलवार (वैष्णव) संत थे।

38. 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किसने किया?

  • (A) शंकराचार्य
  • (B) रामानुजाचार्य
  • (C) मध्वाचार्य
  • (D) निम्बार्काचार्य

उत्तर: (B) रामानुजाचार्य

व्याख्या: रामानुजाचार्य (11वीं शताब्दी) एक प्रमुख वैष्णव आचार्य थे जिन्होंने 'विशिष्टाद्वैत' (योग्य अद्वैतवाद) के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। यह सिद्धांत भक्ति मार्ग को दार्शनिक आधार प्रदान करता है। शंकराचार्य ने 'अद्वैत वेदांत' का प्रतिपादन किया था।

39. भगवान शिव की पत्नी पार्वती का उल्लेख किस अन्य नाम से नहीं मिलता है?

  • (A) उमा
  • (B) गौरी
  • (C) पद्मा
  • (D) भवानी

उत्तर: (C) पद्मा

व्याख्या: उमा, गौरी, भवानी, दुर्गा, काली, शैलपुत्री आदि सभी देवी पार्वती के नाम हैं। 'पद्मा' (कमल पर निवास करने वाली) मुख्य रूप से देवी लक्ष्मी का एक नाम है, जो भगवान विष्णु की पत्नी हैं।

© 2024. All Rights Reserved. Content designed for educational purposes.