पूर्व मध्यकाल भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण चरण है जो UPSC, SSC, रेलवे और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है। इस काल में त्रिपक्षीय संघर्ष, चोल साम्राज्य का उत्कर्ष, राजपूत राज्यों का उदय और सामंतवादी व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
भारतीय इतिहास में पूर्व मध्यकाल लगभग 750 ईस्वी से 1200 ईस्वी तक माना जाता है। इस काल को "राजपूत काल" के नाम से भी जाना जाता है। इस अवधि में भारत में कई शक्तिशाली राजवंशों का उदय हुआ जिन्होंने देश के विभिन्न भागों पर शासन किया।
8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच उत्तर भारत में कन्नौज पर अधिकार को लेकर प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट वंशों के बीच लंबा संघर्ष हुआ जिसे इतिहास में "त्रिपक्षीय संघर्ष" के नाम से जाना जाता है।
चोल साम्राज्य पूर्व मध्यकाल का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य था। राजराज चोल प्रथम (985-1014 ई.) और उनके पुत्र राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ई.) के शासनकाल में चोल साम्राज्य अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचा।
इस काल में हिंदू धर्म के पुनरुत्थान के साथ-साथ इस्लाम धर्म का भारत में प्रवेश हुआ। शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रतिपादन किया। भक्ति आंदोलन ने जोर पकड़ा जिसमें अलवार और नयनार संतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पूर्व मध्यकाल में संस्कृत और प्रादेशिक भाषाओं में साहित्य का विकास हुआ। कालिदास के बाद संस्कृत के महान कवि राजशेखर (कर्पूरमंजरी) और भवभूति (मालतीमाधव) हुए। अपभ्रंश भाषा में साहित्य रचना हुई। दक्षिण में तमिल संगम साहित्य का विकास हुआ।
उत्तर: (c) प्रतिहार, पाल, राष्ट्रकूट
स्पष्टीकरण: त्रिपक्षीय संघर्ष 8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच उत्तर भारत में कन्नौज पर अधिकार को लेकर प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट वंशों के बीच हुआ था। यह संघर्ष लगभग 200 वर्षों तक चला और अंततः प्रतिहारों के पक्ष में समाप्त हुआ।
उत्तर: (a) राजराज प्रथम
स्पष्टीकरण: राजराज चोल प्रथम (985-1014 ई.) चोल साम्राज्य का सबसे प्रसिद्ध शासक था। उसने चोल साम्राज्य का विस्तार किया, तंजावुर में राजराजेश्वर मंदिर (बृहदेश्वर मंदिर) का निर्माण करवाया और एक शक्तिशाली नौसेना का गठन किया।
उत्तर: (b) चंदेल
स्पष्टीकरण: खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिरों का निर्माण चंदेल वंश के शासकों ने 10वीं-11वीं शताब्दी के बीच करवाया था। ये मंदिर हिंदू और जैन धर्म से संबंधित हैं और अपनी नागर शैली की वास्तुकला और कामुक मूर्तियों के लिए विश्वप्रसिद्ध हैं।
उत्तर: (c) दंतिदुर्ग
स्पष्टीकरण: राष्ट्रकूट वंश की स्थापना 8वीं शताब्दी के मध्य में दंतिदुर्ग ने की थी। उसने चालुक्य शासक कीर्तिवर्मन द्वितीय को पराजित कर दक्कन में अपनी सत्ता स्थापित की।
उत्तर: (d) धर्मपाल
स्पष्टीकरण: प्रसिद्ध बौद्ध शिक्षण केंद्र, विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के शासक धर्मपाल ने 8वीं शताब्दी के अंत में की थी। यह बिहार के भागलपुर जिले में स्थित था।
उत्तर: (b) सिंचाई के लिए
स्पष्टीकरण: 'घटियांत्र' या 'अरघट्ट' एक प्रकार का जल-चक्र (water wheel) था जिसका उपयोग कुओं से पानी निकालकर खेतों की सिंचाई के लिए किया जाता था। यह पूर्व मध्यकाल में कृषि प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
उत्तर: (b) अमोघवर्ष प्रथम
स्पष्टीकरण: अमोघवर्ष प्रथम (814-878 ई.) एक महान विद्वान और कला का संरक्षक था। उसने स्वयं 'कविराजमार्ग' की रचना की, जो कन्नड़ भाषा में काव्यशास्त्र पर उपलब्ध सबसे प्राचीन कृति है।
उत्तर: (b) ग्राम समिति के सदस्यों का चुनाव
स्पष्टीकरण: 'कुडवोलाई' चोलों की प्रसिद्ध स्थानीय स्व-शासन प्रणाली का एक हिस्सा थी। यह एक लॉटरी प्रणाली थी जिसके द्वारा ग्राम सभा (उर या सभा) के सदस्यों का चुनाव किया जाता था।
उत्तर: (b) सेन वंश
स्पष्टीकरण: जयदेव, जिन्होंने संस्कृत में प्रसिद्ध काव्य 'गीत गोविंद' की रचना की, बंगाल के सेन वंश के शासक लक्ष्मण सेन (लगभग 1178-1206 ई.) के दरबारी कवि थे।
उत्तर: (c) श्रीहर्ष
स्पष्टीकरण: 'नैषधीयचरित' संस्कृत के पाँच महाकाव्यों में से एक है। इसकी रचना 12वीं शताब्दी में श्रीहर्ष ने की थी, जो गहड़वाल शासक जयचंद्र के दरबारी कवि थे। इसमें नल और दमयंती की कथा का वर्णन है।
उत्तर: (c) राष्ट्रकूट
स्पष्टीकरण: 10वीं शताब्दी में भारत की यात्रा करने वाले अरब यात्री अल-मसूदी ने अपने वृत्तांतों में राष्ट्रकूट राजाओं को 'बल्हारा' (संभवतः वल्लभराज का रूपांतर) कहकर संबोधित किया है, और उनकी शक्ति और समृद्धि की प्रशंसा की है।
उत्तर: (c) वलनाडु या कोट्टम
स्पष्टीकरण: चोल प्रशासनिक संरचना में, साम्राज्य (राज्यम) को प्रांतों (मंडलम) में विभाजित किया गया था। प्रत्येक मंडलम को आगे कमिश्नरी (वलनाडु या कोट्टम) में विभाजित किया गया था।
उत्तर: (b) मध्य प्रदेश
स्पष्टीकरण: त्रिपुरी के कलचुरी, जिन्हें चेदि वंश भी कहा जाता है, मध्य भारत में एक शक्तिशाली राजवंश थे। उनकी राजधानी त्रिपुरी आधुनिक जबलपुर, मध्य प्रदेश के पास स्थित थी।
उत्तर: (b) गर्भगृह के ऊपर की बहुमंजिला संरचना
स्पष्टीकरण: द्रविड़ वास्तुकला में, 'विमान' मंदिर के केंद्रीय गर्भगृह के ऊपर बनी पिरामिडनुमा मीनार या संरचना को संदर्भित करता है। यह उत्तर भारतीय नागर शैली के 'शिखर' के समान है।
उत्तर: (d) धार
स्पष्टीकरण: परमार वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक राजा भोज ने अपनी राजधानी उज्जैन से धार (वर्तमान मध्य प्रदेश में) स्थानांतरित कर दी थी। धार उनकी साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया।
उत्तर: (c) राष्ट्रकूट और पश्चिमी चालुक्य
स्पष्टीकरण: पम्पा, पोन्ना और रन्ना को कन्नड़ साहित्य का त्रिरत्न माना जाता है। पम्पा ने राष्ट्रकूट राजा कृष्ण तृतीय के अधीन लिखा, जबकि पोन्ना और रन्ना को मुख्य रूप से पश्चिमी चालुक्य शासकों का संरक्षण प्राप्त था।
उत्तर: (c) चंद्रदेव
स्पष्टीकरण: चंद्रदेव ने 11वीं शताब्दी के अंत में प्रतिहारों को हराकर कन्नौज में गहड़वाल वंश की स्थापना की। जयचंद्र इस वंश का अंतिम महान शासक था।
उत्तर: (b) तांडव नृत्य मुद्रा
स्पष्टीकरण: चोल काल की नटराज की प्रतिमाएं विश्व प्रसिद्ध हैं। इनमें भगवान शिव को ब्रह्मांडीय नर्तक के रूप में 'तांडव' करते हुए दर्शाया गया है, जो सृजन, संरक्षण और विनाश के चक्र का प्रतीक है।
उत्तर: (c) एक बड़ा गाँव जो एक अलग इकाई के रूप में प्रशासित होता था
स्पष्टीकरण: 'तनियुर' बड़े और महत्वपूर्ण गाँव या मंदिर बस्तियाँ थीं जिन्हें उनकी विशेष स्थिति के कारण नाडु (जिला) से अलग करके सीधे एक अलग इकाई के रूप में प्रशासित किया जाता था।
उत्तर: (c) 1025 ई.
स्पष्टीकरण: महमूद गजनी का सबसे प्रसिद्ध आक्रमण 1025 ई. में गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर हुआ था। उसने मंदिर को नष्ट कर दिया और अपार संपत्ति लूट ली। उस समय गुजरात पर सोलंकी (चालुक्य) वंश का शासन था।
उत्तर: (b) विज्ञानेश्वर
स्पष्टीकरण: 'मिताक्षरा' याज्ञवल्क्य स्मृति पर एक भाष्य है जिसकी रचना 11वीं-12वीं शताब्दी में विज्ञानेश्वर ने की थी। वह पश्चिमी चालुक्य राजा विक्रमादित्य षष्ठम के दरबार में थे।
उत्तर: (b) पूर्वी गंग वंश
स्पष्टीकरण: ओडिशा में स्थित कोणार्क के भव्य सूर्य मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने करवाया था।
उत्तर: (c) भुक्ति
स्पष्टीकरण: गुप्त काल की तरह ही, गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य में भी प्रशासनिक प्रांतों को 'भुक्ति' कहा जाता था। भुक्ति का प्रमुख 'उपरिक' कहलाता था।
उत्तर: (c) चोल
स्पष्टीकरण: चोलों, विशेषकर राजराज प्रथम और राजेंद्र प्रथम के अधीन, ने एक अत्यंत शक्तिशाली नौसेना विकसित की। उन्होंने श्रीलंका, मालदीव और दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय साम्राज्य तक सफल नौसैनिक अभियान चलाए, जिससे बंगाल की खाड़ी पर उनका प्रभुत्व स्थापित हो गया।
उत्तर: (b) कल्हण
स्पष्टीकरण: 'राजतरंगिणी' (राजाओं की नदी) की रचना 12वीं शताब्दी में कल्हण ने की थी। इसे भारत में व्यवस्थित इतिहास-लेखन का पहला वास्तविक प्रयास माना जाता है।
उत्तर: (d) शाकम्भरी
स्पष्टीकरण: चाहमानों की प्रारंभिक राजधानी शाकम्भरी (आधुनिक सांभर, राजस्थान) थी। बाद में, अजयराज द्वितीय ने अजमेर शहर की स्थापना की और उसे अपनी राजधानी बनाया।
उत्तर: (d) राजा के आदेशों को लिखने वाला मुख्य सचिव
स्पष्टीकरण: 'ओलैनायगम' चोल प्रशासन में एक उच्च पदस्थ अधिकारी होता था जो राजा के मौखिक आदेशों का मसौदा तैयार करने और उन्हें ताड़ के पत्तों (ओलै) पर लिखने के लिए जिम्मेदार था।
उत्तर: (c) नागर शैली (कलिंग उप-शैली)
स्पष्टीकरण: 11वीं शताब्दी में निर्मित लिंगराज मंदिर, नागर शैली की एक क्षेत्रीय उप-शैली, जिसे कलिंग शैली के रूप में जाना जाता है, का एक प्रमुख उदाहरण है। इसका निर्माण सोमवंशी राजाओं द्वारा शुरू किया गया और गंग वंश के शासकों द्वारा पूरा किया गया।
उत्तर: (c) सामंतसेन
स्पष्टीकरण: सेन वंश की स्थापना 11वीं शताब्दी में सामंतसेन ने की थी। हालाँकि, विजयसेन को राजवंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है जिसने इसे एक प्रमुख शक्ति बनाया।
उत्तर: (b) सामंतों का एक समूह या पदानुक्रम
स्पष्टीकरण: 'सामंतचक्र' एक अधिपति राजा के अधीन विभिन्न रैंकों के सामंती प्रमुखों के समूह, मंडल या पदानुक्रम को संदर्भित करता है। यह इस अवधि की जटिल सामंती राजनीतिक संरचना को दर्शाता है।
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