UPSC, SSC, रेलवे परीक्षाओं के लिए व्यापक नोट्स | 60 विस्तृत व्याख्या सहित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
गुप्त साम्राज्य (लगभग 320-550 ईस्वी) को विज्ञान, गणित, खगोल विज्ञान, धर्म, दर्शन, कला और साहित्य में अपनी उल्लेखनीय उपलब्धियों के कारण "भारत का स्वर्ण युग" के रूप में जाना जाता है। श्री गुप्त द्वारा स्थापित, यह राजवंश चंद्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) जैसे शासकों के अधीन अपने चरम पर पहुँच गया।
320-335 ईस्वी
गुप्त युग की स्थापना
335-380 ईस्वी
भारत का नेपोलियन
380-415 ईस्वी
स्वर्ण युग का शिखर
415-455 ईस्वी
नालंदा विश्वविद्यालय
गुप्त प्रशासन विकेन्द्रीकृत था जिसमें विभिन्न अधिकारियों के बीच शक्ति वितरित थी। साम्राज्य को प्रांतों (भुक्ति) में विभाजित किया गया था, जिन्हें आगे जिलों (विषय) में उप-विभाजित किया गया था। मुख्य विशेषताएँ:
गुप्त काल में विभिन्न क्षेत्रों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई:
गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद, भारत में क्षेत्रीय राज्यों का उदय हुआ। इस अवधि में कन्नौज के मौखरी, थानेसर के पुष्यभूति और बादामी के चालुक्य जैसे शक्तिशाली राजवंशों का उदय हुआ।
गुप्तोत्तर काल के सबसे महत्वपूर्ण शासक हर्षवर्धन थे जिन्होंने उत्तर भारत में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया। मुख्य पहलू:
गुप्तोत्तर काल में शक्तिशाली क्षेत्रीय राजवंशों का उदय हुआ:
गुप्त और गुप्तोत्तर काल के अपने ज्ञान का परीक्षण करने के लिए विस्तृत व्याख्या सहित इन 60 बहुविकल्पीय प्रश्नों का अभ्यास करें।
उत्तर: B) समुद्रगुप्त
व्याख्या: समुद्रगुप्त (335-380 ईस्वी) को उनकी व्यापक सैन्य विजयों के कारण 'भारत का नेपोलियन' कहा जाता है। उनके सैन्य अभियानों का विस्तृत वर्णन उनके दरबारी कवि हरिषेण द्वारा रचित इलाहाबाद स्तंभ शिलालेख (प्रयाग प्रशस्ति) में मिलता है। उन्होंने 'दिग्विजय' (सभी दिशाओं पर विजय) की नीति अपनाई और गुप्त साम्राज्य का महत्वपूर्ण विस्तार किया।
उत्तर: C) ह्वेनसांग
व्याख्या: ह्वेनसांग (जिन्हें जुआनज़ांग के नाम से भी जाना जाता है) ने हर्षवर्धन के शासनकाल (606-647 ईस्वी) के दौरान भारत का दौरा किया था। वह लगभग 15 वर्षों तक भारत में रहे और अपनी पुस्तक "सी-यू-की" (पश्चिमी दुनिया के रिकॉर्ड) में भारतीय समाज, धर्म और संस्कृति का विस्तृत विवरण दिया। फाह्यान ने चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान दौरा किया, इत्सिंग 7वीं शताब्दी में बाद में आए, और मेगस्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में यूनानी राजदूत थे।
उत्तर: C) चंद्रगुप्त द्वितीय
व्याख्या: दिल्ली का लौह स्तंभ, जो अपनी जंग-प्रतिरोधी संरचना के लिए जाना जाता है, का निर्माण गुप्त वंश के चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) द्वारा किया गया था। स्तंभ पर उत्कीर्ण शिलालेख में चंद्रगुप्त की वंग देशों (बंगाल क्षेत्र) पर विजय का उल्लेख है। यह गुप्त काल के दौरान उन्नत धातु विज्ञान कौशल का प्रमाण है।
उत्तर: C) मुद्राराक्षस
व्याख्या: मुद्राराक्षस विशाखदत्त द्वारा लिखी गई थी, न कि कालिदास द्वारा। कालिदास की प्रसिद्ध कृतियों में अभिज्ञानशाकुंतलम् (शकुंतला), मेघदूत (द क्लाउड मैसेंजर), ऋतुसंहार (द गार्लैंड ऑफ सीजन्स), कुमारसंभव, मालविकाग्निमित्रम् और रघुवंश शामिल हैं।
उत्तर: C) एरण शिलालेख
व्याख्या: मध्य प्रदेश से प्राप्त एरण शिलालेख (510 ईस्वी), जो भानुगुप्त के शासनकाल के दौरान का है, सती प्रथा का पहला अभिलेखीय साक्ष्य प्रदान करता है। इसमें दर्ज है कि भानुगुप्त के गोपराज युद्ध में मारे गए और उनकी पत्नी ने सती कर ली। इलाहाबाद स्तंभ शिलालेख समुद्रगुप्त के बारे में है, ऐहोल शिलालेख पुलकेशिन द्वितीय के बारे में है, और मथुरा शिलालेख विभिन्न शासकों को संदर्भित करता है।
उत्तर: D) कुमारगुप्त प्रथम
व्याख्या: नालंदा विश्वविद्यालय, भारत के सबसे प्रसिद्ध प्राचीन विश्वविद्यालयों में से एक, की स्थापना गुप्त वंश के कुमारगुप्त प्रथम (लगभग 415-455 ईस्वी) द्वारा की गई थी। यह बौद्ध शिक्षा के केंद्र के रूप में फला-फूला और पूरे एशिया से विद्वानों को आकर्षित किया।
उत्तर: C) प्रांत
व्याख्या: गुप्त प्रशासन में, साम्राज्य को प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित किया गया था। 'भुक्ति' एक प्रांत को संदर्भित करता था, जिसे आगे 'विषय' (जिलों) में उप-विभाजित किया गया था। 'ग्राम' एक गाँव था और 'नगर' एक शहर था।
उत्तर: B) हरिषेण
व्याख्या: हरिषेण समुद्रगुप्त के दरबारी कवि और मंत्री थे। उन्होंने प्रसिद्ध इलाहाबाद स्तंभ शिलालेख (प्रयाग प्रशस्ति) की रचना की, जो समुद्रगुप्त की सैन्य उपलब्धियों और उनके व्यक्तित्व का विस्तृत विवरण प्रदान करता है।
उत्तर: B) गुप्त काल
व्याख्या: देवगढ़ (उत्तर प्रदेश) में दशावतार मंदिर शिखर (मीनार) वाला सबसे शुरुआती जीवित पत्थर के मंदिरों में से एक है और यह गुप्त काल की मंदिर वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अपनी जटिल मूर्तियों और परिष्कृत शैली के लिए जाना जाता है।
उत्तर: B) बाणभट्ट
व्याख्या: बाणभट्ट (जिन्हें बाण के नाम से भी जाना जाता है) हर्षवर्धन के दरबारी कवि थे। उन्होंने सम्राट हर्ष के जीवन और उपलब्धियों का विस्तृत वर्णन करते हुए 'हर्षचरित' नामक जीवनीपरक कृति लिखी। उन्होंने 'कादम्बरी' भी लिखी।
उत्तर: A) दीनार
व्याख्या: गुप्त काल के सोने के सिक्कों को 'दीनार' कहा जाता था, जो रोमन दीनारियस से लिया गया था। चांदी के सिक्कों को 'रूपक' के नाम से जाना जाता था। गुप्त काल अपने व्यापक और कलात्मक सिक्कों के लिए प्रसिद्ध है।
उत्तर: B) पुलकेशिन द्वितीय
व्याख्या: बादामी के चालुक्य वंश के सबसे शक्तिशाली शासक पुलकेशिन द्वितीय ने लगभग 618-619 ईस्वी में नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को हराया था। इस विजय का उल्लेख ऐहोल शिलालेख में मिलता है।
उत्तर: B) सुश्रुत
व्याख्या: सुश्रुत एक प्राचीन भारतीय शल्य चिकित्सक और चिकित्सक थे, जिन्हें अक्सर "भारतीय शल्य चिकित्सा का जनक" कहा जाता है। उनकी कृति 'सुश्रुत संहिता' आयुर्वेद का एक मूलभूत ग्रंथ है और इसमें विभिन्न शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं, उपकरणों और चिकित्सा ज्ञान का वर्णन किया गया है। यद्यपि उनकी सटीक अवधि पर बहस होती है, उनका कार्य गुप्त युग के दौरान प्रभावशाली था।
उत्तर: B) जिला
व्याख्या: गुप्त साम्राज्य को 'भुक्ति' (प्रांतों) में विभाजित किया गया था, जिन्हें आगे 'विषय' (जिलों) में उप-विभाजित किया गया था। विषय के प्रमुख को 'विषयपति' के नाम से जाना जाता था।
उत्तर: B) प्रियदर्शिका
व्याख्या: हर्षवर्धन को तीन संस्कृत नाटकों - 'प्रियदर्शिका', 'रत्नावली' और 'नागानंद' के लेखन का श्रेय दिया जाता है। 'कादम्बरी' बाणभट्ट द्वारा लिखी गई थी, 'मृच्छकटिकम्' शूद्रक द्वारा, और 'देवीचंद्रगुप्तम्' विशाखदत्त द्वारा।
उत्तर: C) बौद्ध जातक कथाएँ
व्याख्या: अजंता की गुफाएँ, एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, अपनी चट्टानों को काटकर बनाई गई बौद्ध गुफा स्मारकों के लिए प्रसिद्ध हैं। भित्तिचित्र और फ्रेस्को मुख्य रूप से जातक कथाओं को दर्शाते हैं, जो बुद्ध के पिछले जन्मों की कहानियाँ हैं।
उत्तर: B) श्री गुप्त
व्याख्या: श्री गुप्त को गुप्त वंश का संस्थापक माना जाता है। उनके पोते, चंद्रगुप्त प्रथम, को अक्सर राजवंश का पहला महान शासक माना जाता है, जिन्होंने गुप्त युग की शुरुआत की।
उत्तर: C) मंत्री और उच्च अधिकारी
व्याख्या: 'कुमारामात्य' गुप्त प्रशासन में उच्च पदस्थ अधिकारियों और मंत्रियों का एक वर्ग था, जो विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों को संभालते थे। यह शब्द गुप्त नौकरशाही की पदानुक्रमित और संगठित प्रकृति को दर्शाता है।
उत्तर: C) आर्यभट्ट
व्याख्या: आर्यभट्ट (लगभग 476-550 ईस्वी) गुप्त काल के एक brillante गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे। उन्होंने 'आर्यभटीय' की रचना की, जिसमें शून्य की अवधारणा, स्थानीय मान प्रणाली, $\pi$ का मान, और सौर मंडल के सूर्यकेंद्रीय मॉडल (हालांकि उस समय व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया गया था) पर चर्चा की गई है।
उत्तर: C) कन्नौज
व्याख्या: हर्षवर्धन ने शुरू में थानेसर से शासन किया था। अपने बहनोई, ग्रहवर्मन (कन्नौज के मौखरी शासक) की मृत्यु के बाद, और उसके बाद की राजनीतिक अस्थिरता के कारण, हर्ष ने अपनी राजधानी कन्नौज स्थानांतरित कर दी, जिससे यह एक प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बन गया।
उत्तर: B) भू-राजस्व
व्याख्या: 'भाग' गुप्त काल के दौरान राज्य द्वारा एकत्र किया जाने वाला मुख्य भू-राजस्व था, जो आमतौर पर उपज का एक-छठा हिस्सा होता था। अन्य करों में 'भोग' (फलों, फूलों आदि की आवधिक आपूर्ति) और 'कर' (विविध कर) शामिल थे।
उत्तर: B) शूद्रक
व्याख्या: 'मृच्छकटिकम्' शूद्रक द्वारा रचित एक संस्कृत नाटक है। यह एक अनूठा नाटक है जो हास्य, रोमांस और सामाजिक टिप्पणी के तत्वों को जोड़ता है, जो प्राचीन भारत में शहरी जीवन में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
उत्तर: C) चंद्रगुप्त द्वितीय
व्याख्या: चंद्रगुप्त द्वितीय, जिन्हें विक्रमादित्य के नाम से भी जाना जाता है, ने विभिन्न प्रकार के सोने के सिक्के जारी किए, जिन्हें मुद्राशास्त्रीय कला की उत्कृष्ट कृतियाँ माना जाता है। उनके शासनकाल में गुप्त साम्राज्य की समृद्धि और सांस्कृतिक उपलब्धियों का शिखर था।
उत्तर: C) गुजरात
व्याख्या: वल्लभी प्राचीन भारत में शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र और एक प्रमुख बौद्ध मठ था, जो वर्तमान गुजरात में स्थित था। यह मैत्रक वंश के दौरान फला-फूला, जो बाद के गुप्त और गुप्तोत्तर काल के समकालीन था।
उत्तर: B) सेनापति
व्याख्या: 'महाबलाधिकृत' गुप्त प्रशासन में एक उच्च सैन्य अधिकारी था, जो सेना के सेनापति के बराबर था।
उत्तर: C) विष्णुगुप्त
व्याख्या: विष्णुगुप्त को आमतौर पर गुप्त वंश की मुख्य शाखा का अंतिम मान्यता प्राप्त शासक माना जाता है। उनके शासनकाल के बाद, साम्राज्य विभिन्न क्षेत्रीय राज्यों में खंडित हो गया।
उत्तर: A) गुप्त और गुप्तोत्तर
व्याख्या: जबकि एलोरा की गुफाएँ 6वीं से 10वीं शताब्दी ईस्वी तक की अवधि में फैली हुई हैं, सबसे शुरुआती गुफाएँ, विशेष रूप से बौद्ध गुफाएँ, गुप्त काल के अंत के प्रभावों को दर्शाती हैं, और यह स्थल गुप्तोत्तर काल में विभिन्न राजवंशों, जिनमें चालुक्य और राष्ट्रकूट शामिल हैं, द्वारा विकसित किया जाता रहा।
उत्तर: C) गुप्त काल
व्याख्या: पुराण, जो प्राचीन भारतीय ग्रंथ हैं जिनमें ब्रह्मांड के इतिहास से लेकर निर्माण से लेकर विनाश तक, राजाओं, नायकों, ऋषियों और देवताओं की वंशावली, और हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान, दर्शन और भूगोल का वर्णन शामिल है, बड़े पैमाने पर गुप्त काल के दौरान संकलित किए गए और उन्हें उनका वर्तमान स्वरूप दिया गया।
उत्तर: C) अतिरिक्त कर
व्याख्या: 'उपरिकरा' गुप्त काल के दौरान लगाया गया एक अतिरिक्त या अतिरिक्त कर था, जो अक्सर सभी विषयों से एकत्र किया जाता था, और नियमित भू-राजस्व (भाग) से अलग था।
उत्तर: C) नरवर्धन
व्याख्या: नरवर्धन को आमतौर पर पुष्यभूति (वर्धन) वंश का संस्थापक माना जाता है। हालांकि, प्रभाकरवर्धन ने अपनी शक्ति में काफी वृद्धि की, और उनके पुत्र हर्षवर्धन सबसे प्रमुख शासक बने।
उत्तर: B) कालिदास
व्याख्या: 'अभिज्ञानशाकुंतलम्' (शकुंतला की पहचान) सबसे प्रसिद्ध संस्कृत नाटकों में से एक है, जिसे गुप्त काल के महान कवि और नाटककार कालिदास ने लिखा था। यह राजा दुष्यंत और शकुंतला की कहानी बताता है।
उत्तर: C) समुद्रगुप्त
व्याख्या: इलाहाबाद स्तंभ शिलालेख, जिसे प्रयाग प्रशस्ति के नाम से भी जाना जाता है, समुद्रगुप्त का एक स्तंभ शिलालेख है। इसकी रचना उनके दरबारी कवि हरिषेण ने की थी और इसमें समुद्रगुप्त के सैन्य अभियानों और प्रशासनिक नीतियों का विस्तृत विवरण है।
उत्तर: D) उपरोक्त सभी
व्याख्या: ताम्रलिप्ति (पूर्वी तट पर), भड़ौच (पश्चिमी तट पर भरूच), और कावेरीपट्टिनम (दक्षिणी तट पर) सभी महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर थे जिन्होंने गुप्त काल के दौरान व्यापार को सुविधाजनक बनाया, भारत को दक्षिण पूर्व एशिया, रोमन साम्राज्य और अन्य क्षेत्रों से जोड़ा।
उत्तर: C) कला, विज्ञान और साहित्य
व्याख्या: गुप्त काल को कला, वास्तुकला, साहित्य, विज्ञान (विशेषकर गणित और खगोल विज्ञान), और दर्शन के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगति और उत्कर्ष के कारण 'स्वर्ण युग' कहा जाता है। इस युग में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हुईं जिन्होंने भारतीय संस्कृति पर एक स्थायी विरासत छोड़ी।
उत्तर: B) चंद्रगुप्त द्वितीय
व्याख्या: फाह्यान ने चंद्रगुप्त द्वितीय (लगभग 399-414 ईस्वी) के शासनकाल के दौरान भारत का दौरा किया था। उन्होंने मुख्य रूप से बौद्ध धर्मग्रंथों को इकट्ठा करने के लिए भारत भर में व्यापक यात्रा की, और उनका यात्रा वृत्तांत गुप्त साम्राज्य की सामाजिक और धार्मिक स्थितियों में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
उत्तर: C) आर्यभट्ट
व्याख्या: जबकि 'सूर्य सिद्धांत' एक प्राचीन भारतीय खगोलीय ग्रंथ है, आर्यभट्ट का कार्य, विशेष रूप से 'आर्यभटीय', पहले के सिद्धांतों, जिसमें सूर्य सिद्धांत भी शामिल है, में निर्धारित सिद्धांतों से काफी प्रभावित है और उन्हें परिष्कृत करता है। आर्यभट्ट का खगोल विज्ञान में योगदान, जैसे कि नाक्षत्र वर्ष की लंबाई की सटीक गणना और ग्रहणों की उनकी समझ, गुप्त युग के दौरान महत्वपूर्ण हैं।
उत्तर: B) स्थानीय स्वायत्तता के साथ विकेन्द्रीकृत प्रशासन
व्याख्या: गुप्त प्रशासन, हालांकि एक मजबूत केंद्रीय प्राधिकरण था, बड़े पैमाने पर विकेन्द्रीकृत था। स्थानीय प्रशासन, विशेष रूप से ग्राम स्तर पर, काफी स्वायत्तता का आनंद लेता था। इसने एक विशाल साम्राज्य पर कुशल शासन की अनुमति दी।
उत्तर: C) विशाखदत्त
व्याख्या: 'देवीचंद्रगुप्तम्' एक संस्कृत नाटक है जिसका श्रेय विशाखदत्त को दिया जाता है, जिन्होंने 'मुद्राराक्षस' भी लिखा था। यह नाटक चंद्रगुप्त द्वितीय और उनके भाई रामगुप्त की कहानी से संबंधित है।
उत्तर: D) इलाहाबाद स्तंभ शिलालेख
व्याख्या: इलाहाबाद स्तंभ शिलालेख (प्रयाग प्रशस्ति), हरिषेण द्वारा रचित, समुद्रगुप्त के सैन्य अभियानों, उनके चरित्र और उनके साम्राज्य के विस्तार के लिए सबसे व्यापक और विश्वसनीय स्रोत है।
उत्तर: B) पुलिस प्रमुख
व्याख्या: 'दण्डपाशिक' गुप्त प्रशासन में पुलिस विभाग का प्रमुख था, जो कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार था।
उत्तर: B) चंद्रगुप्त द्वितीय
व्याख्या: 'नवरत्न' (नौ रत्न) - प्रख्यात विद्वानों, कलाकारों और साहित्यिक हस्तियों का एक समूह - की किंवदंती पारंपरिक रूप से चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के दरबार से जुड़ी हुई है। यद्यपि सटीक सूची भिन्न होती है, कालिदास, वराहमिहिर और अमरसिंह को अक्सर इसमें शामिल किया जाता है।
उत्तर: A) अग्रहार
व्याख्या: 'अग्रहार' भूमि अनुदानों को संदर्भित करता है, आमतौर पर कर-मुक्त, जो ब्राह्मणों या धार्मिक संस्थानों को दिए जाते थे। यह प्रथा गुप्तोत्तर काल में अधिक प्रचलित हो गई, जिससे शक्तिशाली जमींदारों के एक वर्ग का उदय हुआ और एक अधिक विकेन्द्रीकृत राजनीतिक संरचना बनी।
उत्तर: B) चंद्रगुप्त द्वितीय
व्याख्या: वराहमिहिर, एक प्रमुख खगोलशास्त्री, ज्योतिषी और बहुज्ञ, चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार में 'नवरत्नों' में से एक थे। उनकी विश्वकोशीय कृति 'बृहत् संहिता' में खगोल विज्ञान, ज्योतिष, वास्तुकला और कीमती पत्थरों सहित विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है।
उत्तर: B) हूणों का आक्रमण
व्याख्या: मध्य एशिया से हूणों (हेफ्थालाइट्स) के बार-बार आक्रमण, विशेष रूप से स्कंदगुप्त और उनके उत्तराधिकारियों के शासनकाल के दौरान, ने गुप्त साम्राज्य को काफी कमजोर कर दिया, उसके संसाधनों को समाप्त कर दिया और अंततः उसके पतन और विखंडन का कारण बना।
उत्तर: C) एक गाँव
व्याख्या: 'ग्राम' प्राचीन भारत में सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई थी, जो एक गाँव को संदर्भित करती थी। गाँव के मुखिया को 'ग्रामिका' या 'ग्रामध्यक्ष' के नाम से जाना जाता था।
उत्तर: B) उत्तर गुप्त/गुप्तोत्तर काल
व्याख्या: दिग्नगा (लगभग 480-540 ईस्वी) एक प्रमुख बौद्ध तर्कशास्त्री और दार्शनिक थे जो उत्तर गुप्त और प्रारंभिक गुप्तोत्तर काल के दौरान रहते थे। उन्होंने बौद्ध तर्कशास्त्र के स्कूल (प्रमाण-समुच्चय) की स्थापना की।
उत्तर: C) दक्षिण भारत
व्याख्या: पल्लव एक शक्तिशाली दक्षिण भारतीय राजवंश थे जिन्होंने 3वीं से 9वीं शताब्दी ईस्वी तक कांचीपुरम (कांची) से शासन किया था। वे चालुक्यों के समकालीन थे और उनका महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और स्थापत्य योगदान था।
उत्तर: C) गुप्त काल
व्याख्या: शून्य की अवधारणा और दशमलव स्थानीय मान प्रणाली का विकास, आधुनिक गणित के लिए महत्वपूर्ण, गुप्त काल के दौरान आर्यभट्ट जैसे विद्वानों को श्रेय दिया जाता है। यह गणित में एक क्रांतिकारी उन्नति थी।
उत्तर: C) चंद्रगुप्त द्वितीय
व्याख्या: चंद्रगुप्त द्वितीय को उनके 'विक्रमादित्य' की उपाधि से प्रसिद्ध रूप से जाना जाता है, जिसे उन्होंने पश्चिमी क्षत्रपों पर अपनी विजय के बाद धारण किया था, जिससे गुप्त साम्राज्य का प्रभाव पश्चिमी भारत तक फैल गया था।
उत्तर: B) पुलकेशिन द्वितीय
व्याख्या: ऐहोल शिलालेख (634 ईस्वी), जो कर्नाटक में स्थित है, चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय के दरबारी कवि रविकीर्ति द्वारा रचित था। इसमें पुलकेशिन द्वितीय की सैन्य विजयों का विस्तृत विवरण है, जिसमें हर्षवर्धन की उनकी प्रसिद्ध हार भी शामिल है।
उत्तर: B) गुप्त और गुप्तोत्तर काल
व्याख्या: जबकि चट्टानों को काटकर बनाई गई वास्तुकला पहले भी मौजूद थी, गुप्त और गुप्तोत्तर काल (जिसमें वाकाटक, चालुक्य और राष्ट्रकूट शामिल हैं) में कुछ सबसे विस्तृत और कलात्मक रूप से महत्वपूर्ण चट्टानों को काटकर बनाए गए मंदिरों और मठों का निर्माण देखा गया, जिसका उदाहरण अजंता, एलोरा और एलिफेंटा हैं।
उत्तर: C) ह्वेनसांग
व्याख्या: 'सी-यू-की' 7वीं शताब्दी ईस्वी में हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान चीनी बौद्ध भिक्षु ह्वेनसांग (हियून त्सांग) की भारत यात्रा का विस्तृत विवरण है। यह उस युग के इतिहास और संस्कृति को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
उत्तर: C) मूर्ति और चित्रकला में यथार्थवाद और मानवतावाद पर इसका जोर
व्याख्या: गुप्त कला, विशेष रूप से मूर्तिकला, अपनी परिष्कृत सौंदर्यशास्त्र, शांत अभिव्यक्तियों और मानवतावादी रूपों पर ध्यान केंद्रित करने की विशेषता है। इसने प्रकृतिवाद और आध्यात्मिक आदर्शवाद के बीच संतुलन हासिल किया, जिससे यह भारतीय कला इतिहास में एक "शास्त्रीय" काल बन गया।
उत्तर: A) पुलकेशिन प्रथम
व्याख्या: पुलकेशिन प्रथम को बादामी (वातापी) के चालुक्य वंश का संस्थापक माना जाता है। उनके पोते, पुलकेशिन द्वितीय, राजवंश के सबसे शानदार शासक थे।
उत्तर: C) हिंदू धर्म
व्याख्या: गुप्त काल को अक्सर हिंदू पुनरुत्थान या पुनरुत्थान की अवधि के रूप में देखा जाता है। जबकि बौद्ध धर्म और जैन धर्म जैसे अन्य धर्म भी फले-फूले, हिंदू धर्म, विशेष रूप से वैष्णव धर्म, शैव धर्म और शाक्त धर्म के पौराणिक रूपों को महत्वपूर्ण शाही संरक्षण मिला और दर्शन, साहित्य और मंदिर निर्माण के संदर्भ में काफी विकास देखा गया।
उत्तर: B) मौर्य-पूर्व काल
व्याख्या: पाणिनि, प्रसिद्ध व्याकरणविद्, गुप्त काल से बहुत पहले रहते थे, आमतौर पर 5वीं या 4थी शताब्दी ईसा पूर्व (मौर्य-पूर्व काल) के माने जाते हैं। उनकी कृति 'अष्टाध्यायी' संस्कृत व्याकरण पर एक व्यापक और अत्यधिक प्रभावशाली ग्रंथ है।
उत्तर: B) अशोक
व्याख्या: इलाहाबाद स्तंभ, जिस पर समुद्रगुप्त की 'प्रयाग प्रशस्ति' उत्कीर्ण है, मूल रूप से एक अशोक स्तंभ था। अशोक के शिलालेख भी उसी स्तंभ पर मौजूद हैं, जिससे यह दो प्रमुख भारतीय सम्राटों के शिलालेखों वाला एक अनूठा ऐतिहासिक कलाकृति बन जाता है।
उत्तर: A) 319-320 ईस्वी
व्याख्या: गुप्त युग, जिसे गुप्त कैलेंडर के नाम से भी जाना जाता है, की स्थापना चंद्रगुप्त प्रथम ने की थी और यह 319-320 ईस्वी में शुरू हुआ था। इस युग का उपयोग गुप्त काल के दौरान शिलालेखों और ऐतिहासिक घटनाओं को दिनांकित करने के लिए किया जाता था।
उत्तर: C) सातवीं शताब्दी ईस्वी
व्याख्या: इत्सिंग (यिजिंग) एक चीनी बौद्ध भिक्षु थे जिन्होंने 671 और 695 ईस्वी के बीच भारत और श्रीविजया (वर्तमान इंडोनेशिया) की यात्रा की थी। उनके वृत्तांत गुप्तोत्तर काल के दौरान भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में बौद्ध धर्म के बारे में मूल्यवान जानकारी प्रदान करते हैं।
उत्तर: C) शहर
व्याख्या: 'नगर' गुप्त काल के दौरान एक शहर या कस्बे का प्रतिनिधित्व करने वाली एक प्रशासनिक इकाई थी। शहरों का प्रशासन अक्सर एक 'नागरक' या शहर प्रशासक द्वारा किया जाता था, कभी-कभी एक परिषद की मदद से।