प्राचीन भारत का एक गौरवशाली अध्याय
मौर्य साम्राज्य (लगभग 322-185 ईसा पूर्व) प्राचीन भारत का एक विशाल और शक्तिशाली साम्राज्य था, जिसने भारतीय उपमहाद्वीप के एक बड़े हिस्से पर शासन किया। इसकी स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु और राजनीतिक सलाहकार चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से की थी। यह साम्राज्य अपनी अद्वितीय केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था, आर्थिक समृद्धि, विशाल सैन्य शक्ति और कला एवं वास्तुकला के अभूतपूर्व विकास के लिए जाना जाता है। मौर्य काल को भारत में पहली बार एक बड़े साम्राज्य के उदय और राजनीतिक एकीकरण के रूप में देखा जाता है।
मौर्य प्रशासन अत्यंत केंद्रीकृत, विशाल और सुव्यवस्थित था, जिसकी विस्तृत जानकारी कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' और मेगस्थनीज की 'इंडिका' से प्राप्त होती है। यह एक जटिल नौकरशाही प्रणाली पर आधारित था।
मौर्यकालीन कला और वास्तुकला भारतीय कला के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है, जिसमें राजकीय संरक्षण में भव्य स्मारकों का निर्माण हुआ।
विशाल मौर्य साम्राज्य का पतन लगभग 185 ईसा पूर्व में अंतिम मौर्य शासक वृहद्रथ की उनके ही सेनापति पुष्यमित्र शुंग द्वारा हत्या के साथ हुआ, जिसने शुंग वंश की नींव रखी। पतन के लिए कई जटिल और अंतर्संबंधित कारण माने जाते हैं:
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