**प्रमुख देवता:** शैव धर्म शिव को परमेश्वर मानता है, जो विनाश, पुनरुत्थान और योग के देवता हैं। भागवत धर्म (वैष्णव धर्म) विष्णु या उनके अवतारों (विशेषकर कृष्ण और राम) को परमेश्वर मानता है, जो ब्रह्मांड के पालक और संरक्षक हैं।
**दर्शन:** शैव धर्म में अद्वैत (कश्मीरी शैववाद) और द्वैत दोनों धाराएँ हैं, जिनमें शिव को परम वास्तविकता के रूप में देखा जाता है। भागवत धर्म में मुख्य रूप से विशिष्टाद्वैत (रामानुज), द्वैत (माधवाचार्य), शुद्धाद्वैत (वल्लभाचार्य), द्वैताद्वैत (निंबार्काचार्य) और अचिंत्य भेदाभेद (चैतन्य) जैसे भक्ति-उन्मुख दर्शन हैं, जो विष्णु/कृष्ण को परम सत्य मानते हैं।
**अनुष्ठान और साधना:** शैव धर्म में तंत्र (गूढ़ अनुष्ठान और साधनाएँ) और योग (विशेषकर हठयोग) का अधिक प्रचलन है, जो आंतरिक ऊर्जा और शिवत्व के अनुभव पर केंद्रित हैं। भागवत धर्म में भजन-कीर्तन (सामूहिक गायन), अवतारों की लीलाओं का गुणगान, मंदिर सेवा, और नाम-जप (भगवान के नाम का जाप) पर अधिक जोर दिया जाता है।
**पवित्र ग्रंथ:** शैव धर्म के प्रमुख ग्रंथ आगम, पुराण (जैसे शिव पुराण, लिंग पुराण), और तंत्र ग्रंथ हैं। भागवत धर्म के लिए श्रीमद्भागवत पुराण, भगवद गीता, विष्णु पुराण और रामायण जैसे ग्रंथ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
**प्रतीक और चिह्न:** शैव धर्म में लिंग, त्रिशूल (त्रिशूल), भस्म (पवित्र राख), रुद्राक्ष की माला, और नंदी (शिव का वाहन) प्रमुख प्रतीक हैं। भागवत धर्म में शंख (शंख), चक्र (चक्र), गदा (गदा), पद्म (कमल), और तुलसी माला प्रमुख प्रतीक हैं।
**सामाजिक दृष्टिकोण:** लिंगायत संप्रदाय जैसे कुछ शैव संप्रदायों ने जाति व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया, जबकि भागवत धर्म ने भक्ति आंदोलन के माध्यम से सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया, जिससे सभी वर्गों के लोग भक्ति मार्ग से जुड़ सके।