भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधन
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संविधान संशोधनों का गहन परिचय
भारतीय संविधान, जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ, एक जीवंत दस्तावेज़ है। यह देश की बदलती सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुकूल होने के लिए डिज़ाइन किया गया है। संविधान में संशोधन की प्रक्रिया इसे समय के साथ प्रासंगिक बनाए रखती है।
संविधान में संशोधन की शक्ति भारतीय संसद को दी गई है, लेकिन यह शक्ति असीमित नहीं है। ‘केशवानंद भारती’ मामले (1973) में, सर्वोच्च न्यायालय ने ‘मूल ढांचे’ का सिद्धांत प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार संसद संविधान के मूल ढांचे (जैसे लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद, शक्तियों का पृथक्करण आदि) में परिवर्तन नहीं कर सकती।
संशोधन तीन तरीकों से किए जा सकते हैं:
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1. साधारण बहुमत द्वारा:
यह सबसे सरल प्रक्रिया है, जिसमें संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से 50% से अधिक का समर्थन आवश्यक होता है। यह प्रक्रिया अनुच्छेद 368 के दायरे से बाहर है।
उदाहरण: नए राज्यों का निर्माण (अनुच्छेद 2, 3), नागरिकता से संबंधित प्रावधान (अनुच्छेद 11), राज्यों में विधान परिषदों का निर्माण या उन्मूलन (अनुच्छेद 169)。
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2. विशेष बहुमत द्वारा:
संविधान के अधिकांश प्रावधानों में संशोधन के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके लिए दो शर्तों का पूरा होना अनिवार्य है:
क) प्रत्येक सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत (अर्थात 50% से अधिक)。
ख) प्रत्येक सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई (2/3) बहुमत。
उदाहरण: मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व。
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3. विशेष बहुमत और राज्यों का अनुसमर्थन:
जो प्रावधान संघीय ढांचे से संबंधित हैं, उनमें संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ कम से कम आधे राज्यों (वर्तमान में 14 राज्य) की विधानसभाओं द्वारा साधारण बहुमत से अनुसमर्थन (approval) की भी आवश्यकता होती है。
उदाहरण: राष्ट्रपति का चुनाव (अनुच्छेद 54, 55), संघ और राज्यों की कार्यकारी शक्ति का विस्तार, सातवीं अनुसूची की कोई भी सूची, स्वयं अनुच्छेद 368。
महत्वपूर्ण संविधान संशोधन
- सामाजिक न्याय और भूमि सुधारों को संरक्षण।
- 9वीं अनुसूची जोड़ी गई।
- ‘लघु-संविधान’ कहा जाता है।
- प्रस्तावना में ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’, ‘अखंडता’ शब्द जोड़े।
- मौलिक कर्तव्य जोड़े।
- संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार से हटा।
- आपातकाल के प्रावधानों को कठोर बनाया।
- दल-बदल विरोधी कानून।
- 10वीं अनुसूची जोड़ी गई।
- मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई।
- पंचायती राज और नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा।
- लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण।
- 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकार बना (अनुच्छेद 21-A)。
- वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया।
- ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’।
- लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण।
संविधान संशोधन प्रश्नोत्तरी
अपने ज्ञान का परीक्षण करें! इस प्रश्नोत्तरी में 50 प्रश्न हैं।
संशोधनों की ऐतिहासिक समयरेखा
पहला संशोधन
भूमि सुधार, 9वीं अनुसूची。
7वाँ संशोधन
राज्यों का भाषाई पुनर्गठन。
42वाँ संशोधन
“लघु-संविधान”, मौलिक कर्तव्य जोड़े。
44वाँ संशोधन
संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों से हटाया。
52वाँ संशोधन
दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची)。
61वाँ संशोधन
मतदान की आयु 21 से 18 वर्ष की गई。
73वाँ/74वाँ संशोधन
पंचायती राज और नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा。
86वाँ संशोधन
शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21-A)。
101वाँ संशोधन
वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू。
103वाँ संशोधन
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10% आरक्षण。
106वाँ संशोधन
महिला आरक्षण विधेयक (‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’)。
संविधान प्रश्नोत्तरी
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