मानव द्वारा प्रचीनतम उपकरण हमें इस काल में प्राप्त होते हैं, जब मानव ने सर्वप्रथम पम्थर का स्वयं फलकीकरण कर अपनी आवश्यकतानुसार औजार बनाए। प्राचीनतम औजार वे है जिनमें पैबुल (Pebble) के एकतरफ फलक उतार कर चापर औजार बनाए गए। ये प्राचीन उपकरण हमें सर्वप्रथम मोरोक्को तथा मध्य अफ्रीका में ओल्डुवई गर्ज के सबसे प्रथम तह से प्राप्त होते हैं। प्रथम स्थान पर इनके साथ विल्लफ्रेन्चिय (Villefranchian) प्रकार के पशुओं की हड्डियाँ भी मिलती है, जो अभिनूतनकाल (Pleistocene) से पहले काल के जानवर थे जो अभी भी बचे रह गये थे। इनमें बड़े-बड़े दातों वाले हाथी (Tusks), बड़े-बड़े नुकीले दांतों वाले चीते, लकड़बग्घा इत्यादि शामिल थे। इस काल में मानव भोजन के लिए शिकार करता था। मानव ने मध्य और अभिनूतन काल में वापर और चापिंग औजारों का निर्माण किया, इसमें चॉपर में एक तरफ से फलकीकरण करके औजार बनाए गए। इन्हीं औजारों के बाद में प्रागे हस्त कुठारों का निर्माण किया गया और कालान्तर में इन्हीं से सुन्दर हस्त कुल्हाडियां निर्मित हुई।
अभिनूतनकाल (Pleistocene) काल में पृथ्वी पर कुछ ऐसे परिवर्तन हुए जिनके कारण मानव का जन्त हुआ मानव के प्राचीनतम अवशेष हमें अफ्रीका में ओल्डुवई गर्त (Olduvaj Garge) तन्जानिया, कीनिया की झील रूडोल्फ (Lake Rudolf) इत्यादि में प्राप्त हुए इसके अतिरिक्त बीजिंग (चीन) में झाऊ काऊ तेन (Zhou-kaou Ten) तथा जावा में भी प्राचीनतम मानव के अवशेष प्राप्त हुए। भारत में हाल ही तक पाषाण कालीन मानव के अवशेष प्राप्त नहीं हुए थे परन्तु 1982 में मध्य प्रदेश की नर्मदा घाटी में हथनोरा (Hathnora) से तथा इसी क्षेत्र में 1997 में निम्न पुरा पाषाण कालीन मानव (Homo-eractus) के प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
भारतीय उपमहाद्वीप में सिन्ध तथा केरल को छोड़ सभी स्थानों से निम्न पुरापाषण कालीन अवशेष प्राप्त होते हैं जो कि नदी के किनारों (Terraces) कन्दराओं (Caves), rock shelters तथा खुले स्थलों से भी प्राप्त हुए है। पत्थर के इन उपकरणों के साथ पशु तथा
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