प्रतिहार राजवंश

प्रतिहार अग्निकुल के राजपूतों में सर्वाधिक प्रसिद्ध वंश था। ग्वालियर प्रशस्ति में इन्हें राम के छोटे भाई लक्ष्मण का वंशज बताया गया है। इस वंश की स्थापना हरिश्चंद्र नामक राजा ने की, किन्तु इस वंश का प्रथम वास्तविक शासक नागभट्ट प्रथम था। प्रतिहारों को गुर्जर प्रतिहार भी कहा जाता है। प्रतिहार साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक और इस राजवंश का महानतम शासक भोज था। गुर्जर जाति का सर्वप्रथम उल्लेख पुलकेशिन द्वितीय के एहोल अभिलेख में हुआ है उसने प्रतिहार साम्राज्य का पुनर्निर्माण किया तथा लगभग 838 ई. में कन्नौज पर फिर से अधिकार कर लिया। यह नगर लगभग एक सदी तक प्रतिहार साम्राज्य की राजधानी रहा।

भोज (836-885 ई.) विष्णु का भक्त था तथा उसने आदिवराह का विरुद (रूप) धारण किया था। उसके कुछ सिक्कों पर आदिवराह शब्द अंकित है। भोज परमार से उसका अंतर बताने के लिए उसे मिहिर भोज भी कहा जाता है। बगदाद-निवासी अल-मसूदी ने 915-916 ई. में गुजरात की यात्रा की थी। उसने गुर्जर-प्रतिहार राज्य को अल-जुजूर कहा है। अल-मसूदी बताता है कि अल-जुजूर के साम्राज्य में 18,000,00 गाँव, नगर और ग्रामीण क्षेत्र थे। राजा की सेना में चार चमुएँ (डिवीजन) थीं। प्रत्येक चमू में 7 से 9 लाख लोग थे। उसके पास युद्ध के लिए केवल 2,000 प्रशिक्षित हाथी थे। उसकी अश्वारोही सेना देश में सर्वश्रेष्ठ थी। संस्कृत का महान कवि और नाटककार राजशेखर भोज के पौत्र महिपाल के दरबार में रहता था। इसने इसे रघुकुल तिलक और रघुकुल ग्रामिणी कहा था। 915 ई. से 918 ई. के बीच राष्ट्रकूट राजा इंद्र तृतीय ने कन्नौज पर आक्रमण किया तथा इस नगर को नष्ट कर दिया। 963 ई. में एक अन्य राष्ट्रकूट राजा कृष्ण तृतीय ने उत्तर भारत पर आक्रमण कर प्रतिहार शासक को परास्त कर दिया।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top