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  • वैदिक सभ्यता : Vedic Civilization Notes and MCQs

    वैदिक सभ्यता – यूपीएससी, एसएससी, रेलवे परीक्षाओं के लिए | Vedic Civilization Notes and MCQs

    वैदिक सभ्यता

    प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संपूर्ण अध्ययन सामग्री: नोट्स, महत्वपूर्ण तथ्य और 50 एमसीक्यू

    UPSC
    SSC
    Railway
    State PSCs

    वैदिक सभ्यता: एक संक्षिप्त परिचय

    वैदिक सभ्यता भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन सभ्यता है जिसका नाम वेदों के नाम पर रखा गया है। यह सभ्यता मुख्यतः दो कालों में विभाजित है: ऋग्वैदिक काल (1500 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व) और उत्तर वैदिक काल (1000 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व)।

    महत्वपूर्ण तथ्य: वैदिक सभ्यता का प्रमुख स्रोत वैदिक साहित्य है जिसमें चार वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद), ब्राह्मण ग्रंथ, आरण्यक, उपनिषद और वेदांग शामिल हैं।

    ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ईसा पूर्व)

    • भौगोलिक क्षेत्र: सप्तसिंधु प्रदेश (सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों का क्षेत्र)
    • राजनीतिक व्यवस्था: जन शब्द का प्रयोग कबीले के लिए होता था। राजा को ‘गोप’ या ‘गोपति’ कहा जाता था। सभा और समिति दो प्रमुख संस्थाएँ थीं
    • सामाजिक व्यवस्था: समाज कबीलाई और पितृसत्तात्मक था। स्त्रियों को सम्मानजनक स्थान प्राप्त था। वर्ण व्यवस्था का आधार व्यवसाय था (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र)
    • आर्थिक जीवन: मुख्य व्यवसाय पशुपालन और कृषि था। गाय को मुख्य संपत्ति माना जाता था
    • धार्मिक जीवन: प्रकृति की शक्तियों की पूजा की जाती थी। इंद्र, अग्नि, वरुण, सोम आदि देवता प्रमुख थे। यज्ञों का महत्व था

    उत्तर वैदिक काल (1000-600 ईसा पूर्व)

    • भौगोलिक क्षेत्र: गंगा-यमुना के दोआब क्षेत्र में विस्तार
    • राजनीतिक व्यवस्था: राजतंत्र प्रबल हुआ। राजा की शक्ति में वृद्धि हुई। सभा और समिति का महत्व कम हो गया
    • सामाजिक व्यवस्था: वर्ण व्यवस्था कठोर हो गई। जाति व्यवस्था का उदय। स्त्रियों की स्थिति में गिरावट आई
    • आर्थिक जीवन: कृषि प्रमुख व्यवसाय बना। लोहे के प्रयोग से कृषि में वृद्धि हुई। व्यापार और वाणिज्य का विकास
    • धार्मिक जीवन: प्रजापति और विष्णु जैसे देवताओं का उदय। यज्ञों का बढ़ता महत्व और जटिलता। दर्शन और चिंतन का विकास (उपनिषद)

    वैदिक साहित्य

    • वेद: चार वेद – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद
    • ब्राह्मण ग्रंथ: वैदिक मंत्रों की व्याख्या करने वाले ग्रंथ
    • आरण्यक: वन में रहने वाले ऋषियों के लिए लिखे गए ग्रंथ
    • उपनिषद: दार्शनिक विचारों का संग्रह (लगभग 108 उपनिषद)
    • वेदांग: वेदों के अंग (शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छंद, ज्योतिष)

    वैदिक सभ्यता पर 50 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

    यूपीएससी, एसएससी, रेलवे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह

    1. ‘वेद’ शब्द का अर्थ क्या है?
    a) बुद्धिमत्ता
    b) शक्ति
    c) ज्ञान
    d) पवित्रता
    उत्तर: c) ज्ञान
    व्याख्या: ‘वेद’ शब्द संस्कृत की ‘विद्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ ‘जानना’ या ‘ज्ञान’ होता है। इसलिए वेदों को ज्ञान का भंडार माना जाता है।
    2. ऋग्वैदिक काल की सबसे महत्वपूर्ण नदी कौन सी थी?
    a) गंगा
    b) यमुना
    c) सरस्वती
    d) सिंधु
    उत्तर: d) सिंधु
    व्याख्या: ऋग्वेद में सिंधु नदी का उल्लेख सबसे अधिक बार हुआ है, जो उस काल में आर्थिक और भौगोलिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण नदी थी। सरस्वती को सबसे पवित्र नदी माना गया है।
    3. ऋग्वेद में कुल कितने मंडल हैं?
    a) 8
    b) 10
    c) 12
    d) 14
    उत्तर: b) 10
    व्याख्या: ऋग्वेद में कुल 10 मंडल हैं, जिनमें 1028 सूक्त और लगभग 10,600 मंत्र हैं। मंडल 2 से 7 सबसे पुराने माने जाते हैं।
    4. निम्नलिखित में से कौन सा वेद ‘संगीत का वेद’ कहलाता है?
    a) ऋग्वेद
    b) यजुर्वेद
    c) सामवेद
    d) अथर्ववेद
    उत्तर: c) सामवेद
    व्याख्या: सामवेद को भारतीय संगीत का जनक माना जाता है। इसमें यज्ञों के अवसर पर गाए जाने वाले मंत्रों का संग्रह है, जिन्हें संगीतमय रूप में प्रस्तुत किया गया है।
    5. प्रसिद्ध ‘गायत्री मंत्र’ किस वेद से लिया गया है?
    a) ऋग्वेद
    b) सामवेद
    c) यजुर्वेद
    d) अथर्ववेद
    उत्तर: a) ऋग्वेद
    व्याख्या: गायत्री मंत्र ऋग्वेद के तीसरे मंडल में उल्लिखित है। यह मंत्र सूर्य देवता (सवितृ) को समर्पित है और इसकी रचना विश्वामित्र ने की थी।
    6. ‘सत्यमेव जयते’ शब्द किस उपनिषद से लिया गया है?
    a) कठोपनिषद
    b) छांदोग्य उपनिषद
    c) मुण्डक उपनिषद
    d) केनोपनिषद
    उत्तर: c) मुण्डक उपनिषद
    व्याख्या: ‘सत्यमेव जयते’ (सत्य की ही विजय होती है) भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है, जिसे मुण्डक उपनिषद से लिया गया है।
    7. ऋग्वैदिक काल में ‘पुरंदर’ शब्द किस देवता के लिए प्रयोग किया जाता था?
    a) अग्नि
    b) इंद्र
    c) वरुण
    d) सोम
    उत्तर: b) इंद्र
    व्याख्या: इंद्र ऋग्वैदिक काल के सबसे प्रमुख देवता थे। उन्हें ‘पुरंदर’ भी कहा जाता था, जिसका अर्थ है ‘किलों को तोड़ने वाला’।
    8. वैदिक काल में ‘सभा’ और ‘समिति’ क्या थीं?
    a) दो देवियाँ
    b) दो जनजातियाँ
    c) दो राजनीतिक सभाएँ
    d) दो यज्ञ
    उत्तर: c) दो राजनीतिक सभाएँ
    व्याख्या: सभा और समिति ऋग्वैदिक काल की दो महत्वपूर्ण राजनीतिक संस्थाएँ थीं जो राजा की शक्तियों पर नियंत्रण रखती थीं। सभा श्रेष्ठ लोगों की संस्था थी, जबकि समिति आम लोगों का प्रतिनिधित्व करती थी।
    9. वर्ण व्यवस्था का प्रथम उल्लेख कहाँ मिलता है?
    a) ऋग्वेद के पुरुष सूक्त में
    b) यजुर्वेद में
    c) सामवेद में
    d) मनुस्मृति में
    उत्तर: a) ऋग्वेद के पुरुष सूक्त में
    व्याख्या: वर्ण व्यवस्था का सबसे पहला उल्लेख ऋग्वेद के दसवें मंडल के पुरुष सूक्त में मिलता है, जहाँ विराट पुरुष के विभिन्न अंगों से चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) की उत्पत्ति का वर्णन है।
    10. उत्तर वैदिक काल में किस धातु का व्यापक रूप से उपयोग होने लगा था?
    a) तांबा
    b) कांसा
    c) सोना
    d) लोहा
    उत्तर: d) लोहा
    व्याख्या: उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ईसा पूर्व) में लोहे का ज्ञान और उपयोग व्यापक हो गया। इसे ‘कृष्ण अयस’ या ‘श्याम अयस’ कहा जाता था, जिसके कारण कृषि और युद्ध उपकरणों में क्रांति आई।
    11. ‘दशराज्ञ युद्ध’ (दस राजाओं का युद्ध) किस नदी के तट पर लड़ा गया था?
    a) सिंधु
    b) सरस्वती
    c) परुष्णी (रावी)
    d) वितस्ता (झेलम)
    उत्तर: c) परुष्णी (रावी)
    व्याख्या: दशराज्ञ युद्ध का वर्णन ऋग्वेद के सातवें मंडल में है। यह युद्ध भरत वंश के राजा सुदास और दस अन्य राजाओं के संघ के बीच परुष्णी (आधुनिक रावी) नदी के तट पर हुआ था, जिसमें सुदास की विजय हुई।
    12. वैदिक गणित का सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ कौन सा है?
    a) शतपथ ब्राह्मण
    b) अथर्ववेद
    c) शुल्व सूत्र
    d) छांदोग्य उपनिषद
    उत्तर: c) शुल्व सूत्र
    व्याख्या: शुल्व सूत्र में यज्ञ की वेदियों के निर्माण से संबंधित ज्यामितीय ज्ञान का विस्तृत वर्णन है, जो वैदिक गणित और ज्यामिति का आधार माना जाता है।
    13. ‘अष्टाध्यायी’ के लेखक कौन हैं?
    a) वेदव्यास
    b) पाणिनि
    c) पतंजलि
    d) यास्क
    उत्तर: b) पाणिनि
    व्याख्या: पाणिनि ने ‘अष्टाध्यायी’ नामक संस्कृत व्याकरण का प्रसिद्ध ग्रंथ लिखा। यह वेदांग (व्याकरण) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे वैदिक काल के बाद की रचना माना जाता है, लेकिन यह वैदिक संस्कृत को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
    14. ऋग्वैदिक आर्यों का मुख्य व्यवसाय क्या था?
    a) कृषि
    b) पशुपालन
    c) व्यापार
    d) शिकार
    उत्तर: b) पशुपालन
    व्याख्या: ऋग्वैदिक काल में आर्यों का जीवन मुख्यतः पशुचारण पर आधारित था। गाय को संपत्ति का मुख्य स्रोत माना जाता था। कृषि का महत्व गौण था।
    15. उपनिषदों को और किस नाम से जाना जाता है?
    a) वेदांग
    b) श्रुति
    c) स्मृति
    d) वेदांत
    उत्तर: d) वेदांत
    व्याख्या: उपनिषद वैदिक साहित्य के अंतिम भाग हैं, इसलिए उन्हें ‘वेदांत’ (वेद का अंत) भी कहा जाता है। ये मुख्यतः दार्शनिक और आध्यात्मिक विषयों पर केंद्रित हैं।
    16. ‘गोत्र’ व्यवस्था का प्रचलन कब हुआ?
    a) ऋग्वैदिक काल में
    b) उत्तर वैदिक काल में
    c) मौर्य काल में
    d) गुप्त काल में
    उत्तर: b) उत्तर वैदिक काल में
    व्याख्या: ‘गोत्र’ शब्द का अर्थ है ‘वह स्थान जहाँ पूरे कुल के गोधन को एक साथ रखा जाता था’। यह व्यवस्था उत्तर वैदिक काल में एक ही पूर्वज से वंश परंपरा को दर्शाने के लिए स्थापित हुई।
    17. यम और नचिकेता के बीच प्रसिद्ध संवाद किस उपनिषद में है?
    a) बृहदारण्यक उपनिषद
    b) छांदोग्य उपनिषद
    c) कठोपनिषद
    d) मुण्डक उपनिषद
    उत्तर: c) कठोपनिषद
    व्याख्या: कठोपनिषद में मृत्यु के देवता यम और बालक नचिकेता के बीच आत्मा, मृत्यु और मोक्ष के रहस्य पर एक गहन दार्शनिक संवाद का वर्णन है।
    18. ऋग्वेद में ‘अघन्य’ (न मारने योग्य) शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
    a) ब्राह्मण
    b) गाय
    c) स्त्री
    d) राजा
    उत्तर: b) गाय
    व्याख्या: ऋग्वैदिक काल में गाय को अत्यंत पवित्र और आर्थिक रूप से मूल्यवान माना जाता था। इसलिए उसे ‘अघन्य’ कहा गया है, जिसका अर्थ है कि उसे मारा नहीं जाना चाहिए।
    19. कौन सा वेद गद्य और पद्य दोनों में लिखा गया है?
    a) ऋग्वेद
    b) सामवेद
    c) यजुर्वेद
    d) अथर्ववेद
    उत्तर: c) यजुर्वेद
    व्याख्या: यजुर्वेद में यज्ञ संबंधी अनुष्ठानों और विधियों का वर्णन है। इसकी रचना गद्य (यजुष) और पद्य (मंत्र) दोनों शैलियों में की गई है।
    20. उत्तर वैदिक काल के सबसे प्रमुख देवता कौन थे?
    a) इंद्र और अग्नि
    b) प्रजापति
    c) विष्णु
    d) रुद्र
    उत्तर: b) प्रजापति
    व्याख्या: उत्तर वैदिक काल में ऋग्वैदिक देवताओं जैसे इंद्र और अग्नि का महत्व कम हो गया और सृजन के देवता प्रजापति (ब्रह्मा) को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हुआ।
    21. वैदिक काल में ‘निष्क’ शब्द का प्रयोग किसके लिए होता था?
    a) कृषि उपकरण
    b) एक प्रकार का कर
    c) स्वर्ण आभूषण या सिक्का
    d) एक लिपि
    उत्तर: c) स्वर्ण आभूषण या सिक्का
    व्याख्या: प्रारंभ में ‘निष्क’ गले में पहने जाने वाले एक स्वर्ण आभूषण था, लेकिन बाद में इसका प्रयोग विनिमय के माध्यम के रूप में सिक्के के लिए भी होने लगा।
    22. ‘आयुर्वेद’, अर्थात जीवन का विज्ञान, का उल्लेख सबसे पहले किस वेद में मिलता है?
    a) ऋग्वेद
    b) सामवेद
    c) यजुर्वेद
    d) अथर्ववेद
    उत्तर: d) अथर्ववेद
    व्याख्या: अथर्ववेद में जादू-टोना, मंत्रों के साथ-साथ विभिन्न रोगों के निवारण और औषधियों का भी विस्तृत वर्णन है, जिसे आयुर्वेद का प्रारंभिक स्रोत माना जाता है।
    23. वैदिक समाज में कितने प्रकार के विवाह प्रचलित थे?
    a) 4
    b) 6
    c) 8
    d) 10
    उत्तर: c) 8
    व्याख्या: धर्मसूत्रों में आठ प्रकार के विवाहों का उल्लेख है: ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्रजापत्य (प्रशंसित विवाह) और असुर, गांधर्व, राक्षस, पैशाच (निंदित विवाह)।
    24. ‘योग’ दर्शन के प्रतिपादक कौन थे?
    a) गौतम
    b) कपिल
    c) जैमिनी
    d) पतंजलि
    उत्तर: d) पतंजलि
    व्याख्या: पतंजलि ने योग सूत्रों की रचना की और योग दर्शन को व्यवस्थित रूप दिया, जो षड्दर्शन (छह भारतीय दर्शन) में से एक है।
    25. ऋग्वेद की मूल लिपि क्या थी?
    a) देवनागरी
    b) पालि
    c) ब्राह्मी
    d) खरोष्ठी
    उत्तर: c) ब्राह्मी
    व्याख्या: वेदों को लंबे समय तक मौखिक परंपरा (श्रुति) द्वारा संरक्षित किया गया। जब उन्हें लिपिबद्ध किया गया, तो सबसे प्राचीन उपलब्ध पांडुलिपियों में ब्राह्मी लिपि का प्रयोग हुआ।
    26. ‘बृहदारण्यक उपनिषद’ में ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का क्या अर्थ है?
    a) मैं ब्रह्म का पुत्र हूँ
    b) मैं ही ब्रह्म (परमात्मा) हूँ
    c) ब्रह्म सर्वव्यापी है
    d) ज्ञान ही ब्रह्म है
    उत्तर: b) मैं ही ब्रह्म (परमात्मा) हूँ
    व्याख्या: ‘अहं ब्रह्मास्मि’ अद्वैत वेदांत का एक महावाक्य है, जो आत्मा (व्यक्तिगत चेतना) और ब्रह्म (सार्वभौमिक चेतना) की एकता को प्रतिपादित करता है।
    27. वैदिक काल में ‘बलि’ क्या था?
    a) पशुओं की बलि
    b) एक देवता
    c) प्रजा द्वारा राजा को स्वेच्छा से दिया गया उपहार/कर
    d) एक प्रकार का शस्त्र
    उत्तर: c) प्रजा द्वारा राजा को स्वेच्छा से दिया गया उपहार/कर
    व्याख्या: ऋग्वैदिक काल में ‘बलि’ एक स्वैच्छिक भेंट थी जो प्रजा अपने राजा को देती थी। उत्तर वैदिक काल में यह एक नियमित और अनिवार्य कर बन गया।
    28. ‘अश्वमेध यज्ञ’ का संबंध किससे था?
    a) पुत्र प्राप्ति
    b) वर्षा के लिए
    c) राजनीतिक शक्ति और साम्राज्य विस्तार
    d) मोक्ष प्राप्ति
    उत्तर: c) राजनीतिक शक्ति और साम्राज्य विस्तार
    व्याख्या: अश्वमेध यज्ञ एक शक्तिशाली राजा द्वारा अपनी संप्रभुता स्थापित करने के लिए किया जाता था। इसमें एक घोड़े को स्वतंत्र विचरण के लिए छोड़ा जाता था।
    29. किस वेद में सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है?
    a) ऋग्वेद
    b) सामवेद
    c) यजुर्वेद
    d) अथर्ववेद
    उत्तर: d) अथर्ववेद
    व्याख्या: अथर्ववेद में सभा और समिति के महत्व को दर्शाते हुए उन्हें प्रजापति की दो पुत्रियों के रूप में वर्णित किया गया है, जो राजा पर नियंत्रण के लिए आवश्यक थीं।
    30. ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ (अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो) यह कथन मूलतः कहाँ से लिया गया है?
    a) ऋग्वेद
    b) मुण्डक उपनिषद
    c) बृहदारण्यक उपनिषद
    d) महाभारत
    उत्तर: c) बृहदारण्यक उपनिषद
    व्याख्या: यह प्रसिद्ध प्रार्थना ‘असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय’ बृहदारण्यक उपनिषद का हिस्सा है।
    31. ऋग्वैदिक काल में ‘पणि’ किन्हें कहा जाता था?
    a) पुरोहितों को
    b) पशुओं की चोरी करने वाले या व्यापारियों को
    c) योद्धाओं को
    d) किसानों को
    उत्तर: b) पशुओं की चोरी करने वाले या व्यापारियों को
    व्याख्या: ‘पणि’ उन लोगों का समूह था जो व्यापार और वाणिज्य में संलग्न थे। कभी-कभी उन्हें आर्यों के पशुओं को चुराने वाले के रूप में भी वर्णित किया गया है।
    32. ‘वेदांग’ की संख्या कितनी है?
    a) 4
    b) 6
    c) 8
    d) 10
    उत्तर: b) 6
    व्याख्या: वेदों को ठीक से समझने के लिए 6 वेदांगों की रचना की गई: शिक्षा (ध्वनि विज्ञान), कल्प (अनुष्ठान), व्याकरण, निरुक्त (व्युत्पत्ति), छंद और ज्योतिष।
    33. वैदिक काल की विदुषी महिला ‘गार्गी’ ने किस राजा की सभा में याज्ञवल्क्य को चुनौती दी थी?
    a) राजा जनक
    b) राजा दशरथ
    c) राजा अश्वपति
    d) राजा अजातशत्रु
    उत्तर: a) राजा जनक
    व्याख्या: बृहदारण्यक उपनिषद के अनुसार, विदेह के राजा जनक की सभा में हुए एक दार्शनिक शास्त्रार्थ में गार्गी ने ऋषि याज्ञवल्क्य से ब्रह्म के स्वरूप पर तीखे प्रश्न पूछे थे।
    34. ‘पुरुषमेध’ यज्ञ का उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?
    a) ऋग्वेद
    b) शतपथ ब्राह्मण
    c) सामवेद
    d) मनुस्मृति
    उत्तर: b) शतपथ ब्राह्मण
    व्याख्या: शतपथ ब्राह्मण, जो यजुर्वेद का एक ब्राह्मण ग्रंथ है, में ‘पुरुषमेध’ (मनुष्य की प्रतीकात्मक बलि) सहित विभिन्न यज्ञों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
    35. ‘सांख्य’ दर्शन के प्रतिपादक कौन थे?
    a) गौतम
    b) जैमिनी
    c) कपिल
    d) कणाद
    उत्तर: c) कपिल
    व्याख्या: कपिल मुनि को भारत के प्राचीनतम दर्शनों में से एक, सांख्य दर्शन का प्रणेता माना जाता है, जो सृष्टि की उत्पत्ति पुरुष और प्रकृति के द्वैतवाद से मानता है।
    36. वैदिक नदी ‘अस्किनी’ की पहचान वर्तमान में किस नदी से की जाती है?
    a) व्यास
    b) रावी
    c) चिनाब
    d) झेलम
    उत्तर: c) चिनाब
    व्याख्या: वैदिक साहित्य में वर्णित ‘अस्किनी’ नदी को आधुनिक चिनाब नदी के रूप में पहचाना गया है।
    37. ‘चार आश्रम’ (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास) की व्यवस्था का स्पष्ट उल्लेख सबसे पहले किस उपनिषद में मिलता है?
    a) छांदोग्य उपनिषद
    b) मुण्डक उपनिषद
    c) कठोपनिषद
    d) जाबालोपनिषद
    उत्तर: d) जाबालोपनिषद
    व्याख्या: यद्यपि तीन आश्रमों का उल्लेख छांदोग्य उपनिषद में है, लेकिन चारों आश्रमों का एक साथ स्पष्ट वर्णन पहली बार जाबालोपनिषद में मिलता है।
    38. ऋग्वेद में ‘जन’ शब्द का प्रयोग कितनी बार हुआ है?
    a) 175 बार
    b) 275 बार
    c) 375 बार
    d) 475 बार
    उत्तर: b) 275 बार
    व्याख्या: ऋग्वेद में ‘जन’ शब्द का उल्लेख लगभग 275 बार हुआ है, जो कबीले या समुदाय को संदर्भित करता है, जबकि ‘जनपद’ (क्षेत्रीय राज्य) का उल्लेख एक बार भी नहीं है।
    39. ‘पुराणों’ की संख्या कितनी है?
    a) 12
    b) 16
    c) 18
    d) 20
    उत्तर: c) 18
    व्याख्या: पुराण वैदिक साहित्य का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन वे प्राचीन भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं के महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इनकी कुल संख्या 18 मानी जाती है।
    40. ‘वैशेषिक’ दर्शन के प्रणेता कौन थे?
    a) कपिल
    b) गौतम
    c) कणाद
    d) पतंजलि
    उत्तर: c) कणाद
    व्याख्या: ऋषि कणाद ने वैशेषिक दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसमें उन्होंने परमाणु सिद्धांत (पदार्थ के अविभाज्य कणों का सिद्धांत) की अवधारणा प्रस्तुत की।
    41. वैदिक काल में कर वसूलने वाले अधिकारी को क्या कहा जाता था?
    a) भागदुध
    b) संग्रहितृ
    c) स्थपति
    d) पुरोहित
    उत्तर: a) भागदुध
    व्याख्या: उत्तर वैदिक काल में ‘भागदुध’ वह अधिकारी होता था जो ‘भाग’ नामक कर (आमतौर पर उपज का 1/6 हिस्सा) वसूलता था। ‘संग्रहितृ’ कोषाध्यक्ष होता था।
    42. ऋग्वेद का कौन सा मंडल पूर्णतः ‘सोम’ देवता को समर्पित है?
    a) सातवाँ मंडल
    b) आठवाँ मंडल
    c) नौवाँ मंडल
    d) दसवाँ मंडल
    उत्तर: c) नौवाँ मंडल
    व्याख्या: ऋग्वेद का नौवाँ मंडल पूरी तरह से सोम देवता को समर्पित है, जो एक पौधे से प्राप्त होने वाला पेय था और धार्मिक अनुष्ठानों में महत्वपूर्ण था।
    43. किस ब्राह्मण ग्रंथ में स्त्री को पुरुष की ‘अर्धांगिनी’ कहा गया है?
    a) ऐतरेय ब्राह्मण
    b) तैत्तिरीय ब्राह्मण
    c) शतपथ ब्राह्मण
    d) गोपथ ब्राह्मण
    उत्तर: c) शतपथ ब्राह्मण
    व्याख्या: शतपथ ब्राह्मण में पत्नी के महत्व को दर्शाते हुए उसे पति का आधा अंग (‘अर्धांगिनी’) बताया गया है, जिसके बिना यज्ञ पूर्ण नहीं होता।
    44. ‘महाभारत’ का पुराना नाम क्या था?
    a) कथासरित्सागर
    b) जयसंहिता
    c) बृहत्कथा
    d) राजतरंगिणी
    उत्तर: b) जयसंहिता
    व्याख्या: महाभारत का प्रारंभिक नाम ‘जयसंहिता’ था, जिसमें लगभग 8,800 श्लोक थे। बाद में श्लोकों की संख्या बढ़ने पर यह ‘भारत’ और फिर ‘महाभारत’ कहलाया।
    45. वैदिक काल में ‘यव’ शब्द किस अनाज के लिए प्रयोग होता था?
    a) गेहूँ
    b) चावल
    c) जौ
    d) मक्का
    उत्तर: c) जौ
    व्याख्या: वैदिक साहित्य में ‘यव’ शब्द का प्रयोग जौ के लिए किया गया है, जो आर्यों के प्रमुख अनाजों में से एक था। चावल के लिए ‘व्रीहि’ शब्द का प्रयोग होता था।
    46. ऋग्वैदिक समाज की सबसे छोटी इकाई क्या थी?
    a) जन
    b) विश्
    c) ग्राम
    d) कुल या परिवार
    उत्तर: d) कुल या परिवार
    व्याख्या: ऋग्वैदिक समाज का संगठन इस प्रकार था: कुल (परिवार) -> ग्राम -> विश् -> जन। ‘कुल’ या परिवार सबसे छोटी इकाई थी, जिसका मुखिया ‘कुलप’ कहलाता था।
    47. ‘मीमांसा’ या ‘पूर्व मीमांसा’ दर्शन का संबंध किससे है?
    a) ज्ञान
    b) भक्ति
    c) कर्मकांड
    d) तर्क
    उत्तर: c) कर्मकांड
    व्याख्या: जैमिनी द्वारा प्रतिपादित पूर्व मीमांसा दर्शन वेदों के कर्मकांडीय भाग (यज्ञ, अनुष्ठान) की व्याख्या करता है और उनकी प्रामाणिकता को स्थापित करता है।
    48. वैदिक काल में राजा अपनी प्रजा से जो कर वसूलते थे, उसे क्या कहते थे?
    a) बलि
    b) वर्मन
    c) कर
    d) शुल्क
    उत्तर: a) बलि
    व्याख्या: वैदिक काल में राजा द्वारा प्रजा से लिया जाने वाला कर ‘बलि’ कहलाता था। यह प्रारंभ में स्वैच्छिक था, पर बाद में अनिवार्य हो गया।
    49. आर्यों की भाषा क्या थी?
    a) पालि
    b) प्राकृत
    c) संस्कृत
    d) अपभ्रंश
    उत्तर: c) संस्कृत
    व्याख्या: आर्यों की भाषा संस्कृत थी। सभी वैदिक ग्रंथ, जैसे वेद, ब्राह्मण, उपनिषद आदि, संस्कृत भाषा में ही रचे गए हैं।
    50. ‘सर्वाधिक ऋग्वैदिक सूक्त’ किस देवता को समर्पित हैं?
    a) अग्नि
    b) इंद्र
    c) वरुण
    d) विष्णु
    उत्तर: b) इंद्र
    व्याख्या: ऋग्वेद में सबसे अधिक सूक्त (लगभग 250) इंद्र को समर्पित हैं। उनके बाद अग्नि का स्थान है, जिन्हें लगभग 200 सूक्त समर्पित हैं।

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    शैव धर्म (Shaivism)

    शैव धर्म भगवान शिव की पूजा करने वालों का धर्म है। यह भारत के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है, जिसकी जड़ें प्रागैतिहासिक काल तक जाती हैं।

    प्रमुख तथ्य एवं ऐतिहासिक विकास:

    • उत्पत्ति: सिंधु घाटी सभ्यता में मिली मुहरों पर योगी की आकृति (पशुपति शिव) को इसका प्रारंभिक रूप माना जाता है।
    • वैदिक काल: ऋग्वेद में शिव का उल्लेख ‘रुद्र’ के रूप में मिलता है, जो एक उग्र देवता थे।
    • पुराणों में: मत्स्य पुराण में लिंग पूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मिलता है। वामन पुराण में शैव संप्रदायों की संख्या चार बताई गई है – पाशुपत, कापालिक, कालामुख, और शैव।
    • प्रमुख संप्रदाय:
      • पाशुपत: यह सबसे प्राचीन शैव संप्रदाय है। इसके संस्थापक ‘लकुलीश’ थे, जिन्हें भगवान शिव का 18वां अवतार माना जाता है।
      • कापालिक: इनके इष्ट देव ‘भैरव’ थे। ये नर-खोपड़ी में भोजन और जल ग्रहण करते थे।
      • कालामुख: ये कापालिकों के ही अतिवादी रूप थे।
      • लिंगायत (वीरशैव): 12वीं शताब्दी में दक्षिण भारत में ‘बसव’ (या बसवन्ना) ने इसकी स्थापना की। यह जाति प्रथा का विरोध करता था।
      • नाथ संप्रदाय: 10वीं शताब्दी में मत्स्येन्द्रनाथ ने इसकी स्थापना की। गोरखनाथ के समय में यह बहुत लोकप्रिय हुआ।
    • दक्षिण भारत में: पल्लव, चोल, राष्ट्रकूट और चालुक्य शासकों ने शैव धर्म को संरक्षण दिया। चोल शासक राजराज प्रथम द्वारा निर्मित ‘बृहदीश्वर मंदिर’ (राजराजेश्वर मंदिर) शैव धर्म का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
    • नयनार संत: दक्षिण में शैव धर्म का प्रचार करने वाले संतों को ‘नयनार’ कहा गया। इनकी संख्या 63 थी।

    भागवत धर्म (Bhagavatism/Vaishnavism)

    भागवत धर्म का केंद्र बिंदु ‘भक्ति’ है, जिसका विकास वैष्णव धर्म के रूप में हुआ। इसके प्रमुख देवता विष्णु या नारायण हैं, जिनकी पूजा वासुदेव-कृष्ण के रूप में की जाती है।

    प्रमुख तथ्य एवं ऐतिहासिक विकास:

    • प्रारंभिक उल्लेख: इसका उल्लेख उपनिषदों में मिलता है। इसके प्रवर्तक वृष्णि (सात्वत) वंशी कृष्ण थे, जिनका निवास स्थान मथुरा था।
    • विदेशी साक्ष्य: यूनानी राजदूत ‘मेगस्थनीज’ ने शूरसेन (मथुरा) के लोगों द्वारा ‘हेराक्लीज’ (वासुदेव कृष्ण) की पूजा का उल्लेख किया है।
    • अभिलेखीय साक्ष्य: सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य ‘बेस नगर’ (विदिशा) का ‘गरुड़ स्तंभ’ है, जिसे यवन राजदूत ‘हेलियोडोरस’ ने भागवत धर्म ग्रहण करके स्थापित करवाया था।
    • प्रमुख सिद्धांत:
      • अवतारवाद: यह इस धर्म का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है। इसमें माना जाता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है, विष्णु अवतार लेते हैं। मत्स्य पुराण में विष्णु के दस अवतारों (दशावतार) का उल्लेख है।
      • व्यूह सिद्धांत: इसमें वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध नामक चार देवताओं की पूजा का विधान था।
    • गुप्त काल: यह काल वैष्णव धर्म का चरमोत्कर्ष काल था। गुप्त शासक ‘परम भागवत’ की उपाधि धारण करते थे और उनका राजचिह्न ‘गरुड़’ था।
    • आलवार संत: दक्षिण भारत में वैष्णव धर्म का प्रचार करने वाले संतों को ‘आलवार’ कहा गया। इनकी संख्या 12 थी। इनमें ‘आंडाल’ नामक एक महिला संत भी थीं।

    महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

    1. सबसे प्राचीन शैव संप्रदाय कौन सा है?

    • (A) कापालिक
    • (B) पाशुपत
    • (C) कालामुख
    • (D) लिंगायत

    उत्तर: (B) पाशुपत

    व्याख्या: पाशुपत शैव धर्म का सबसे प्राचीन संप्रदाय है। इसके संस्थापक लकुलीश थे, जिन्हें शिव का अवतार माना जाता है।

    2. भागवत धर्म से संबंधित ‘बेस नगर’ का गरुड़ स्तंभ किसने स्थापित करवाया था?

    • (A) मेगस्थनीज
    • (B) एंटियालकिड्स
    • (C) हेलियोडोरस
    • (D) मिनेंडर

    उत्तर: (C) हेलियोडोरस

    व्याख्या: तक्षशिला के यवन शासक एंटियालकिड्स के राजदूत हेलियोडोरस ने शुंग शासक भागभद्र के दरबार में भागवत धर्म अपनाकर विदिशा (बेस नगर) में गरुड़ स्तंभ की स्थापना की थी।

    3. दक्षिण भारत में शैव धर्म का प्रचार करने वाले संतों को क्या कहा जाता था?

    • (A) आलवार
    • (B) भगवत्
    • (C) नयनार
    • (D) वीरशैव

    उत्तर: (C) नयनार

    व्याख्या: दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन के दौरान शैव धर्म के अनुयायी संतों को ‘नयनार’ कहा गया। इनकी कुल संख्या 63 थी। ‘आलवार’ संत वैष्णव धर्म के अनुयायी थे।

    4. ‘वीरशैव’ या ‘लिंगायत’ संप्रदाय के संस्थापक कौन थे?

    • (A) मत्स्येन्द्रनाथ
    • (B) बसवन्ना
    • (C) लकुलीश
    • (D) रामानुज

    उत्तर: (B) बसवन्ना

    व्याख्या: 12वीं शताब्दी में कर्नाटक में बसव (या बसवन्ना) और उनके भतीजे चन्नबसव ने वीरशैव संप्रदाय की स्थापना की। वे जाति-प्रथा और कर्मकांडों के विरोधी थे।

    5. विष्णु के दस अवतारों का उल्लेख किस पुराण में मिलता है?

    • (A) वामन पुराण
    • (B) गरुड़ पुराण
    • (C) वायु पुराण
    • (D) मत्स्य पुराण

    उत्तर: (D) मत्स्य पुराण

    व्याख्या: अवतारवाद वैष्णव धर्म का एक प्रमुख सिद्धांत है। मत्स्य पुराण में भगवान विष्णु के प्रसिद्ध दस अवतारों (मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि) का व्यवस्थित वर्णन मिलता है।

    6. एलोरा का प्रसिद्ध कैलाश मंदिर किस राजवंश ने बनवाया था?

    • (A) चोल
    • (B) पल्लव
    • (C) राष्ट्रकूट
    • (D) चालुक्य

    उत्तर: (C) राष्ट्रकूट

    व्याख्या: एलोरा (महाराष्ट्र) का कैलाश मंदिर (गुफा संख्या 16) एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया विश्व का सबसे बड़ा मंदिर है। इसका निर्माण राष्ट्रकूट शासक कृष्ण प्रथम ने करवाया था और यह भगवान शिव को समर्पित है।

    7. आलवार संतों में एकमात्र महिला संत का क्या नाम था?

    • (A) कराईकल अम्मइयार
    • (B) मीराबाई
    • (C) लल्लेश्वरी
    • (D) आंडाल

    उत्तर: (D) आंडाल

    व्याख्या: आलवार वैष्णव संत थे, जिनकी संख्या 12 थी। आंडाल एकमात्र महिला आलवार संत थीं। उन्हें ‘दक्षिण की मीरा’ भी कहा जाता है। कराईकल अम्मइयार एक नयनार (शैव) संत थीं।

    8. ‘अर्धनारीश्वर’ की मूर्ति में आधे शिव तथा आधी पार्वती किसका प्रतीक हैं?

    • (A) देवता और देवी का योग
    • (B) पुरुष और नारी का योग
    • (C) देव और उसकी शक्ति का योग
    • (D) उपरोक्त में से कोई नहीं

    उत्तर: (C) देव और उसकी शक्ति का योग

    व्याख्या: अर्धनारीश्वर रूप शिव (पुरुष तत्व) और शक्ति (प्रकृति या स्त्री तत्व) के एकाकार होने का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि पुरुष और प्रकृति अविभाज्य हैं और एक दूसरे के पूरक हैं। यह अवधारणा गुप्त काल में बहुत लोकप्रिय हुई।

    9. ‘परम भागवत’ की उपाधि धारण करने वाला प्रथम गुप्त शासक कौन था?

    • (A) चंद्रगुप्त प्रथम
    • (B) समुद्रगुप्त
    • (C) चंद्रगुप्त द्वितीय
    • (D) कुमारगुप्त

    उत्तर: (C) चंद्रगुप्त द्वितीय

    व्याख्या: यद्यपि गुप्त शासक वैष्णव धर्म के अनुयायी थे, ‘परम भागवत’ की उपाधि आधिकारिक रूप से धारण करने वाला पहला शासक चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) था। कुछ स्रोतों में समुद्रगुप्त का भी उल्लेख मिलता है, लेकिन चंद्रगुप्त द्वितीय अधिक स्वीकृत उत्तर है।

    10. नयनार संतों की कुल संख्या कितनी थी?

    • (A) 12
    • (B) 53
    • (C) 63
    • (D) 108

    उत्तर: (C) 63

    व्याख्या: नयनार तमिल कवि-संत थे जो 6वीं से 8वीं शताब्दी के बीच सक्रिय थे और भगवान शिव के प्रति समर्पित थे। उनकी कुल संख्या 63 मानी जाती है। आलवार संतों की संख्या 12 थी।

    11. किस देवता को ऋग्वेद में ‘रुद्र’ के रूप में संबोधित किया गया है?

    • (A) इंद्र
    • (B) अग्नि
    • (C) शिव
    • (D) वरुण

    उत्तर: (C) शिव

    व्याख्या: ऋग्वेद में ‘रुद्र’ नामक एक शक्तिशाली और उग्र देवता का वर्णन है, जिन्हें बाद के पौराणिक काल में भगवान शिव के साथ एकीकृत कर दिया गया।

    12. ‘भगवद्गीता’ महाभारत के किस पर्व का अंश है?

    • (A) आदि पर्व
    • (B) सभा पर्व
    • (C) वन पर्व
    • (D) भीष्म पर्व

    उत्तर: (D) भीष्म पर्व

    व्याख्या: भगवद्गीता, जो भागवत धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ है, महाभारत के छठे पर्व ‘भीष्म पर्व’ का एक हिस्सा है। इसमें कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया उपदेश है।

    13. तंजौर का बृहदीश्वर मंदिर किस चोल शासक ने बनवाया था?

    • (A) राजराज प्रथम
    • (B) राजेंद्र प्रथम
    • (C) कुलोत्तुंग प्रथम
    • (D) विजयालय

    उत्तर: (A) राजराज प्रथम

    व्याख्या: तंजौर (तन्जावुर) का प्रसिद्ध बृहदीश्वर मंदिर (या राजराजेश्वर मंदिर) चोल सम्राट राजराज प्रथम ने लगभग 1010 ई. में बनवाया था। यह द्रविड़ वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है और भगवान शिव को समर्पित है।

    14. यूनानी लेखक मेगस्थनीज ने कृष्ण को किस नाम से संबोधित किया है?

    • (A) डायोनिसस
    • (B) हेराक्लीज
    • (C) अपोलो
    • (D) ज़ीउस

    उत्तर: (B) हेराक्लीज

    व्याख्या: चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में यूनानी राजदूत मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में मथुरा क्षेत्र के शूरसेन लोगों द्वारा ‘हेराक्लीज’ नामक देवता की पूजा का उल्लेख किया है, जिसकी पहचान विद्वानों द्वारा वासुदेव-कृष्ण से की जाती है।

    15. नाथ संप्रदाय की स्थापना किसने की थी?

    • (A) गोरखनाथ
    • (B) बसवन्ना
    • (C) मत्स्येन्द्रनाथ
    • (D) लकुलीश

    उत्तर: (C) मत्स्येन्द्रनाथ

    व्याख्या: नाथ संप्रदाय की स्थापना 10वीं शताब्दी में मत्स्येन्द्रनाथ ने की थी। हालांकि, इसे प्रसिद्धि और व्यवस्थित रूप उनके शिष्य गोरखनाथ ने प्रदान किया।

    16. ‘चतुर्व्यूह’ सिद्धांत किस धर्म से संबंधित है?

    • (A) शैव धर्म
    • (B) बौद्ध धर्म
    • (C) जैन धर्म
    • (D) भागवत धर्म

    उत्तर: (D) भागवत धर्म

    व्याख्या: चतुर्व्यूह (या व्यूह सिद्धांत) भागवत/वैष्णव धर्म से संबंधित है। इसमें चार प्रमुख देवताओं – वासुदेव (कृष्ण), संकर्षण (बलराम), प्रद्युम्न (कृष्ण के पुत्र), और अनिरुद्ध (कृष्ण के पौत्र) की पूजा का विधान है।

    17. कापालिक संप्रदाय के इष्ट देव कौन थे?

    • (A) शिव
    • (B) भैरव
    • (C) रुद्र
    • (D) वीरभद्र

    उत्तर: (B) भैरव

    व्याख्या: कापालिक एक शैव संप्रदाय था जो तांत्रिक क्रियाओं पर जोर देता था। उनके प्रमुख आराध्य देव शिव के उग्र रूप ‘भैरव’ थे।

    18. गुप्त शासकों का राजचिह्न क्या था?

    • (A) वृषभ (बैल)
    • (B) गरुड़
    • (C) सिंह (शेर)
    • (D) हाथी

    उत्तर: (B) गरुड़

    व्याख्या: गुप्त शासक वैष्णव धर्म के महान संरक्षक थे। भगवान विष्णु का वाहन ‘गरुड़’ उनका राजचिह्न था, जो उनके सिक्कों और अभिलेखों पर अंकित मिलता है।

    19. ‘त्रिपिटक’ किस धर्म का ग्रंथ है?

    • (A) शैव धर्म
    • (B) वैष्णव धर्म
    • (C) बौद्ध धर्म
    • (D) यह प्रश्न विषय से बाहर है

    उत्तर: (D) यह प्रश्न विषय से बाहर है

    व्याख्या: यह प्रश्न शैव या भागवत धर्म से संबंधित नहीं है। ‘त्रिपिटक’ (सुत्त पिटक, विनय पिटक, अभिधम्म पिटक) बौद्ध धर्म का प्रमुख ग्रंथ है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह के भ्रामक विकल्प दिए जा सकते हैं।

    20. ‘कश्मीरी शैवधर्म’ को अन्य किस नाम से जाना जाता है?

    • (A) त्रिक दर्शन
    • (B) स्पंदशास्त्र
    • (C) प्रत्यभिज्ञा दर्शन
    • (D) उपरोक्त सभी

    उत्तर: (D) उपरोक्त सभी

    व्याख्या: कश्मीरी शैवधर्म एक अद्वैतवादी और दार्शनिक शाखा है। इसे त्रिक दर्शन (शिव, शक्ति और अणु के तीन सिद्धांतों के कारण), स्पंदशास्त्र और प्रत्यभिज्ञा दर्शन के नाम से भी जाना जाता है। वसुगुप्त इसके प्रमुख प्रवर्तकों में से एक थे।

    21. आलवार संतों की संख्या कितनी थी?

    • (A) 10
    • (B) 12
    • (C) 63
    • (D) 84

    उत्तर: (B) 12

    व्याख्या: आलवार तमिल कवि-संत थे जो भगवान विष्णु को समर्पित थे। उनकी कुल संख्या 12 मानी जाती है। नयनार (शैव) संतों की संख्या 63 थी।

    22. लिंग पूजा का पहला स्पष्ट वर्णन कहाँ मिलता है?

    • (A) महाभारत में
    • (B) मत्स्य पुराण में
    • (C) ऋग्वेद में
    • (D) अथर्ववेद में

    उत्तर: (B) मत्स्य पुराण में

    व्याख्या: यद्यपि लिंग पूजा के संकेत सिंधु घाटी सभ्यता और महाभारत में मिलते हैं, लेकिन इसका पहला सुस्पष्ट साहित्यिक वर्णन मत्स्य पुराण में मिलता है।

    23. ‘दिव्य प्रबन्धम्’ किसका संकलन है?

    • (A) नयनारों के भजनों का
    • (B) आलवारों के भजनों का
    • (C) कबीर के दोहों का
    • (D) तुलसीदास की रचनाओं का

    उत्तर: (B) आलवारों के भजनों का

    व्याख्या: ‘नालायिर दिव्य प्रबन्धम्’ 12 आलवार संतों द्वारा रचित 4000 तमिल छंदों का एक संग्रह है। इसे ‘तमिल वेद’ भी कहा जाता है और यह वैष्णव साहित्य की एक अमूल्य निधि है।

    24. वामन पुराण में शैव संप्रदायों की संख्या कितनी बताई गई है?

    • (A) दो
    • (B) तीन
    • (C) चार
    • (D) पाँच

    उत्तर: (C) चार

    व्याख्या: वामन पुराण के अनुसार, शैव धर्म के चार प्रमुख संप्रदाय थे: शैव, पाशुपत, कापालिक और कालामुख।

    25. ‘दक्षिण की मीरा’ किसे कहा जाता है?

    • (A) कराईकल अम्मइयार
    • (B) आंडाल
    • (C) अक्का महादेवी
    • (D) सहजोबाई

    उत्तर: (B) आंडाल

    व्याख्या: आंडाल, जो 12 आलवार संतों में एकमात्र महिला थीं, भगवान विष्णु के प्रति अपनी गहन भक्ति के लिए जानी जाती हैं। उनकी तुलना अक्सर उत्तर भारत की मीराबाई से की जाती है, इसलिए उन्हें ‘दक्षिण की मीरा’ कहा जाता है।

    26. पाशुपत संप्रदाय के संस्थापक लकुलीश का जन्म कहाँ हुआ था?

    • (A) गुजरात
    • (B) राजस्थान
    • (C) बिहार
    • (D) उत्तर प्रदेश

    उत्तर: (A) गुजरात

    व्याख्या: माना जाता है कि पाशुपत संप्रदाय के संस्थापक लकुलीश का जन्म गुजरात के कायावरोहण (कारवन) नामक स्थान पर हुआ था।

    27. ‘पंचरात्र’ मत किस धर्म से संबंधित है?

    • (A) शैव धर्म
    • (B) शाक्त धर्म
    • (C) वैष्णव धर्म
    • (D) जैन धर्म

    उत्तर: (C) वैष्णव धर्म

    व्याख्या: पंचरात्र आगम वैष्णव धर्म के प्रमुख ग्रंथ हैं। यह मत नारायण (विष्णु) को परम तत्व मानता है और व्यूह सिद्धांत पर जोर देता है।

    28. सिंधु घाटी की एक मुहर पर चित्रित ‘पशुपति शिव’ की पहचान किसने की?

    • (A) आर. डी. बनर्जी
    • (B) दयाराम साहनी
    • (C) जॉन मार्शल
    • (D) अलेक्जेंडर कनिंघम

    उत्तर: (C) जॉन मार्शल

    व्याख्या: पुरातत्ववेत्ता सर जॉन मार्शल ने मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर पर अंकित, पशुओं से घिरे एक योगी की आकृति की पहचान आद्य-शिव या ‘पशुपति’ के रूप में की थी।

    29. वैष्णव धर्म का प्रारंभिक रूप मुख्यतः किसकी पूजा पर केंद्रित था?

    • (A) सूर्य
    • (B) भगवत् वासुदेव
    • (C) इंद्र
    • (D) ब्रह्मा

    उत्तर: (B) भगवत् वासुदेव

    व्याख्या: वैष्णव धर्म का प्रारंभिक रूप भागवत धर्म के नाम से जाना जाता था, जो मुख्य रूप से वृष्णि नायक वासुदेव (कृष्ण) की भक्ति और पूजा पर केंद्रित था।

    30. शैव धर्म के इतिहास में ‘कालामुख’ संप्रदाय के अनुयायी क्या करते थे?

    • (A) केवल दूध का सेवन करते थे
    • (B) नर-कपाल में भोजन करते थे
    • (C) मौन व्रत रखते थे
    • (D) सफेद वस्त्र पहनते थे

    उत्तर: (B) नर-कपाल में भोजन करते थे

    व्याख्या: कालामुख संप्रदाय, कापालिकों का ही एक अतिवादी रूप था। शिव पुराण के अनुसार, वे मानव खोपड़ी (नर-कपाल) में भोजन, जल और सुरापान करते थे और शरीर पर चिता की भस्म लगाते थे।

    31. अंकोरवाट का प्रसिद्ध विष्णु मंदिर कहाँ स्थित है?

    • (A) जावा
    • (B) सुमात्रा
    • (C) कंबोडिया
    • (D) चंपा

    उत्तर: (C) कंबोडिया

    व्याख्या: अंकोरवाट का विशाल मंदिर कंबोडिया में स्थित है और यह भगवान विष्णु को समर्पित है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में खमेर राजा सूर्यवर्मन द्वितीय ने करवाया था।

    32. ‘शैव सिद्धांत’ दर्शन किस क्षेत्र में प्रमुख था?

    • (A) उत्तर भारत
    • (B) पूर्वी भारत
    • (C) कश्मीर
    • (D) दक्षिण भारत (तमिलनाडु)

    उत्तर: (D) दक्षिण भारत (तमिलनाडु)

    व्याख्या: शैव सिद्धांत एक प्रमुख शैव दार्शनिक प्रणाली है जो दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में फली-फूली। यह नयनार संतों की भक्ति पर आधारित है।

    33. ‘श्रीमद्भागवत पुराण’ किस देवता पर केंद्रित है?

    • (A) शिव
    • (B) ब्रह्मा
    • (C) कृष्ण
    • (D) गणेश

    उत्तर: (C) कृष्ण

    व्याख्या: श्रीमद्भागवत पुराण, जिसे भागवतम भी कहा जाता है, वैष्णव धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है। यह मुख्य रूप से भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण की लीलाओं और भक्ति पर केंद्रित है।

    34. किस गुप्त शासक के सिक्कों पर वीणा बजाते हुए दिखाया गया है, जो उसकी संगीत रुचि के साथ-साथ वैष्णव प्रभाव को भी दर्शाता है?

    • (A) चंद्रगुप्त प्रथम
    • (B) समुद्रगुप्त
    • (C) कुमारगुप्त
    • (D) स्कंदगुप्त

    उत्तर: (B) समुद्रगुप्त

    व्याख्या: समुद्रगुप्त के कुछ स्वर्ण सिक्कों पर उन्हें वीणा बजाते हुए चित्रित किया गया है। यद्यपि यह उनकी संगीत में रुचि को दर्शाता है, गुप्त काल का वैष्णव धर्म के प्रति झुकाव भी सर्वविदित है।

    35. ‘तेवरम’ और ‘तिरुवाचकम’ किनके भजनों के संग्रह हैं?

    • (A) आलवार
    • (B) नयनार
    • (C) सिद्ध
    • (D) नाथपंथी

    उत्तर: (B) नयनार

    व्याख्या: ‘तेवरम’ अप्पार, सम्बंदर और सुंदरार जैसे प्रमुख नयनार संतों के भजनों का संकलन है। ‘तिरुवाचकम’ मणिक्कवाचकर द्वारा रचित शैव भजनों का एक और महत्वपूर्ण संग्रह है।

    36. भागवत धर्म में ‘भक्ति’ का क्या अर्थ है?

    • (A) ज्ञान
    • (B) कर्मकांड
    • (C) निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण
    • (D) तपस्या

    उत्तर: (C) निःस्वार्थ प्रेम और समर्पण

    व्याख्या: भागवत धर्म का मूल तत्व ‘भक्ति’ है, जिसका अर्थ है ईश्वर के प्रति पूर्ण, निःस्वार्थ और प्रेमपूर्ण समर्पण। यह मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग माना गया है।

    37. निम्नलिखित में से कौन एक नयनार संत नहीं थे?

    • (A) अप्पार
    • (B) सम्बंदर
    • (C) सुंदरार
    • (D) नम्मालवार

    उत्तर: (D) नम्मालवार

    व्याख्या: अप्पार, सम्बंदर और सुंदरार सबसे प्रमुख नयनार (शैव) संतों में से थे। नम्मालवार एक बहुत ही महत्वपूर्ण आलवार (वैष्णव) संत थे।

    38. ‘विशिष्टाद्वैत’ दर्शन का प्रतिपादन किसने किया?

    • (A) शंकराचार्य
    • (B) रामानुजाचार्य
    • (C) मध्वाचार्य
    • (D) निम्बार्काचार्य

    उत्तर: (B) रामानुजाचार्य

    व्याख्या: रामानुजाचार्य (11वीं शताब्दी) एक प्रमुख वैष्णव आचार्य थे जिन्होंने ‘विशिष्टाद्वैत’ (योग्य अद्वैतवाद) के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। यह सिद्धांत भक्ति मार्ग को दार्शनिक आधार प्रदान करता है। शंकराचार्य ने ‘अद्वैत वेदांत’ का प्रतिपादन किया था।

    39. भगवान शिव की पत्नी पार्वती का उल्लेख किस अन्य नाम से नहीं मिलता है?

    • (A) उमा
    • (B) गौरी
    • (C) पद्मा
    • (D) भवानी

    उत्तर: (C) पद्मा

    व्याख्या: उमा, गौरी, भवानी, दुर्गा, काली, शैलपुत्री आदि सभी देवी पार्वती के नाम हैं। ‘पद्मा’ (कमल पर निवास करने वाली) मुख्य रूप से देवी लक्ष्मी का एक नाम है, जो भगवान विष्णु की पत्नी हैं।

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  • जैन धर्म (Jainism) – नोट्स, MCQ | UPSC, SSC, Railway

    जैन धर्म (Jainism) – नोट्स, MCQ | UPSC, SSC, Railway परीक्षा

    जैन धर्म (Jainism)

    यह सामग्री UPSC, SSC, Railway और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है।


    परिचय (Introduction)

    जैन धर्म भारत के प्राचीनतम धर्मों में से एक है। ‘जैन’ शब्द संस्कृत के ‘जिन’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है ‘विजेता’ – वह जिसने अपनी इंद्रियों और भावनाओं पर विजय प्राप्त कर ली हो। जैन धर्म में 24 महान शिक्षकों की परंपरा है, जिन्हें तीर्थंकर कहा जाता है। तीर्थंकर वे मार्गदर्शक होते हैं जो संसार रूपी सागर से पार जाने का मार्ग बताते हैं।


    प्रमुख तीर्थंकर (Prominent Tirthankaras)

    • प्रथम तीर्थंकर – ऋषभदेव (या आदिनाथ): इन्हें जैन धर्म का संस्थापक माना जाता है। इनका प्रतीक ‘बैल’ (वृषभ) है।
    • 23वें तीर्थंकर – पार्श्वनाथ: ये काशी के इक्ष्वाकु वंशीय राजा अश्वसेन के पुत्र थे। इन्होंने चार महाव्रत दिए- सत्य, अहिंसा, अस्तेय, और अपरिग्रह। इनका प्रतीक ‘सर्प’ है।
    • 24वें और अंतिम तीर्थंकर – महावीर स्वामी: इन्हें जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक या सुधारक माना जाता है। इन्होंने पार्श्वनाथ के चार महाव्रतों में पाँचवाँ महाव्रत ‘ब्रह्मचर्य’ जोड़ा।

    महावीर स्वामी (Mahavira Swami) – (540 ई.पू. – 468 ई.पू.)

    • जन्म: 540 ई.पू. में वैशाली के निकट कुण्डग्राम में हुआ।
    • बचपन का नाम: वर्धमान।
    • पिता का नाम: सिद्धार्थ (ज्ञातृक कुल के सरदार)।
    • माता का नाम: त्रिशला (लिच्छवि राजा चेटक की बहन)।
    • पत्नी का नाम: यशोदा।
    • पुत्री का नाम: अनोज्जा (प्रियदर्शना)।
    • गृह त्याग: 30 वर्ष की आयु में।
    • ज्ञान प्राप्ति (कैवल्य): 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद जृम्भिक ग्राम के समीप ऋजुपालिका नदी के तट पर एक साल वृक्ष के नीचे इन्हें ‘कैवल्य’ (सर्वोच्च ज्ञान) प्राप्त हुआ।
    • निर्वाण (मृत्यु): 72 वर्ष की आयु में 468 ई.पू. में बिहार के पावापुरी (राजगीर) में निर्वाण प्राप्त हुआ।

    जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत (Core Principles of Jainism)

    त्रिरत्न (The Three Jewels)

    मोक्ष प्राप्ति के लिए जैन धर्म में त्रिरत्न का पालन अनिवार्य बताया गया है:

    1. सम्यक् दर्शन: सत्य में विश्वास, तीर्थंकरों में श्रद्धा।
    2. सम्यक् ज्ञान: वास्तविक ज्ञान, शंकाविहीन ज्ञान।
    3. सम्यक् चरित्र (आचरण): नैतिक और सदाचारी जीवन जीना।

    पंच महाव्रत (The Five Great Vows)

    भिक्षुओं के लिए इन पाँच महाव्रतों का पालन करना अनिवार्य है:

    1. अहिंसा (Non-violence): किसी भी जीव को मन, वचन या कर्म से हानि न पहुँचाना।
    2. सत्य (Truthfulness): सदा सत्य बोलना।
    3. अस्तेय (Non-stealing): बिना अनुमति किसी की वस्तु न लेना।
    4. अपरिग्रह (Non-possession): आवश्यकता से अधिक धन या संपत्ति का संग्रह न करना।
    5. ब्रह्मचर्य (Celibacy): इंद्रियों पर संयम रखना (यह महावीर स्वामी द्वारा जोड़ा गया)।

    गृहस्थों के लिए इन व्रतों को ‘अणुव्रत’ कहा जाता है, जिनकी कठोरता कम होती है।

    अनेकान्तवाद और स्याद्वाद

    • अनेकान्तवाद: इसका अर्थ है कि सत्य के अनेक पहलू होते हैं। किसी भी वस्तु या विचार को केवल एक दृष्टिकोण से नहीं समझा जा सकता।
    • स्याद्वाद: यह ज्ञान की सापेक्षता का सिद्धांत है। इसके अनुसार, हमारा हर निर्णय ‘शायद’ (स्यात्) के साथ होना चाहिए, क्योंकि हमारा ज्ञान सीमित और सापेक्ष होता है।

    जैन धर्म के सम्प्रदाय (Sects of Jainism)

    चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के अंत में मगध में भीषण अकाल पड़ा। भद्रबाहु अपने अनुयायियों के साथ दक्षिण भारत (कर्नाटक) चले गए, जबकि स्थूलभद्र मगध में ही रहे। जब अकाल समाप्त हुआ और भद्रबाहु के अनुयायी वापस लौटे, तो दोनों समूहों में मतभेद उत्पन्न हो गए, जिससे जैन धर्म दो संप्रदायों में बँट गया:

    • श्वेताम्बर (Shvetambara): स्थूलभद्र के अनुयायी, जो श्वेत वस्त्र धारण करते हैं।
    • दिगम्बर (Digambara): भद्रबाहु के अनुयायी, जो पूर्णतः नग्न रहते हैं और कठोर तपस्या में विश्वास करते हैं।

    जैन संगीतियाँ (Jain Councils)

    • प्रथम जैन संगीति: लगभग 300 ई.पू. में पाटलिपुत्र में हुई। इसके अध्यक्ष स्थूलभद्र थे। इसी संगीति में जैन धर्म श्वेताम्बर और दिगम्बर में विभाजित हुआ।
    • द्वितीय जैन संगीति: छठी शताब्दी (512 ई.) में वल्लभी (गुजरात) में हुई। इसके अध्यक्ष देवर्धि क्षमाश्रमण थे। इसमें जैन धर्मग्रंथों (आगम) को अंतिम रूप से संकलित और लिपिबद्ध किया गया।

    जैन धर्म पर महत्वपूर्ण MCQ (59 प्रश्न)

    1. ‘जैन’ शब्द संस्कृत के किस शब्द से बना है?

    • (A) जिन
    • (B) जन
    • (C) ज्ञान
    • (D) जग
    उत्तर: (A) जिन
    व्याख्या: ‘जैन’ शब्द ‘जिन’ से निकला है, जिसका अर्थ है ‘विजेता’। यह उन लोगों को संदर्भित करता है जिन्होंने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली है।

    2. जैन परंपरा के अनुसार कुल कितने तीर्थंकर हुए हैं?

    • (A) 20
    • (B) 22
    • (C) 24
    • (D) 14
    उत्तर: (C) 24
    व्याख्या: जैन धर्म में 24 तीर्थंकरों की एक लंबी परंपरा है, जो समय-समय पर धर्म का मार्ग दिखाने के लिए अवतरित हुए।

    3. जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर कौन थे?

    • (A) पार्श्वनाथ
    • (B) ऋषभदेव
    • (C) महावीर स्वामी
    • (D) अजितनाथ
    उत्तर: (B) ऋषभदेव
    व्याख्या: ऋषभदेव, जिन्हें आदिनाथ भी कहा जाता है, जैन धर्म के संस्थापक और पहले तीर्थंकर थे।

    4. महावीर स्वामी का जन्म कहाँ हुआ था?

    • (A) कुण्डग्राम
    • (B) पाटलिपुत्र
    • (C) मगध
    • (D) लुम्बिनी
    उत्तर: (A) कुण्डग्राम
    व्याख्या: महावीर स्वामी का जन्म 540 ई.पू. में वैशाली के पास कुण्डग्राम में हुआ था।

    5. महावीर स्वामी के बचपन का नाम क्या था?

    • (A) सिद्धार्थ
    • (B) वर्धमान
    • (C) शुद्धोदन
    • (D) राहुल
    उत्तर: (B) वर्धमान
    व्याख्या: महावीर स्वामी का मूल नाम या बचपन का नाम वर्धमान था।

    6. महावीर स्वामी ने किस नदी के तट पर ‘कैवल्य’ (सर्वोच्च ज्ञान) प्राप्त किया?

    • (A) गंगा
    • (B) निरंजना
    • (C) ऋजुपालिका
    • (D) यमुना
    उत्तर: (C) ऋजुपालिका
    व्याख्या: 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद, वर्धमान ने जृम्भिक ग्राम के पास ऋजुपालिका नदी के किनारे एक साल वृक्ष के नीचे कैवल्य प्राप्त किया।

    7. जैन धर्म में ‘त्रिरत्न’ में क्या शामिल नहीं है?

    • (A) सम्यक् दर्शन
    • (B) सम्यक् ज्ञान
    • (C) सम्यक् चरित्र
    • (D) सम्यक् तप
    उत्तर: (D) सम्यक् तप
    व्याख्या: जैन धर्म के त्रिरत्न हैं – सम्यक् दर्शन (सही विश्वास), सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान), और सम्यक् चरित्र (सही आचरण)।

    8. जैन धर्म के पंच महाव्रतों में से कौन-सा महावीर स्वामी द्वारा जोड़ा गया था?

    • (A) अहिंसा
    • (B) सत्य
    • (C) अस्तेय
    • (D) ब्रह्मचर्य
    उत्तर: (D) ब्रह्मचर्य
    व्याख्या: पहले चार महाव्रत (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह) 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ द्वारा दिए गए थे। महावीर स्वामी ने इसमें पाँचवाँ महाव्रत ‘ब्रह्मचर्य’ जोड़ा।

    9. ‘अनेकान्तवाद’ निम्नलिखित में से किसका मूल सिद्धांत एवं दर्शन है?

    • (A) बौद्ध मत
    • (B) जैन मत
    • (C) सिख मत
    • (D) वैष्णव मत
    उत्तर: (B) जैन मत
    व्याख्या: अनेकान्तवाद जैन दर्शन का एक आधारभूत सिद्धांत है, जिसके अनुसार सत्य बहुआयामी होता है और उसे विभिन्न दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है।

    10. प्रथम जैन संगीति का आयोजन कहाँ हुआ था?

    • (A) पाटलिपुत्र
    • (B) वल्लभी
    • (C) वैशाली
    • (D) राजगृह
    उत्तर: (A) पाटलिपुत्र
    व्याख्या: पहली जैन संगीति लगभग 300 ई.पू. में पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी।

    11. द्वितीय जैन संगीति के अध्यक्ष कौन थे?

    • (A) स्थूलभद्र
    • (B) भद्रबाहु
    • (C) देवर्धि क्षमाश्रमण
    • (D) नागार्जुन
    उत्तर: (C) देवर्धि क्षमाश्रमण
    व्याख्या: छठी शताब्दी में वल्लभी (गुजरात) में आयोजित दूसरी जैन संगीति की अध्यक्षता देवर्धि क्षमाश्रमण ने की थी।

    12. जैन साहित्य को समग्र रूप में क्या कहा जाता है?

    • (A) त्रिपिटक
    • (B) आगम
    • (C) वेद
    • (D) जातक
    उत्तर: (B) आगम
    व्याख्या: जैन धर्म के पवित्र और मूल ग्रंथों को ‘आगम’ कहा जाता है। त्रिपिटक बौद्ध धर्म से संबंधित है।

    13. श्वेताम्बर सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे?

    • (A) भद्रबाहु
    • (B) स्थूलभद्र
    • (C) महावीर स्वामी
    • (D) ऋषभदेव
    उत्तर: (B) स्थूलभद्र
    व्याख्या: मगध में अकाल के दौरान जो जैन भिक्षु स्थूलभद्र के नेतृत्व में मगध में ही रुक गए, वे श्वेताम्बर कहलाए।

    14. महावीर स्वामी को किस स्थान पर निर्वाण प्राप्त हुआ?

    • (A) कुशीनगर
    • (B) पावापुरी
    • (C) कुण्डग्राम
    • (D) वैशाली
    उत्तर: (B) पावापुरी
    व्याख्या: महावीर स्वामी ने 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी (राजगीर के निकट) में अपना शरीर त्यागा और निर्वाण प्राप्त किया।

    15. जैन धर्म में ‘पूर्ण ज्ञान’ के लिए क्या शब्द है?

    • (A) जिन
    • (B) रत्न
    • (C) कैवल्य
    • (D) निर्वाण
    उत्तर: (C) कैवल्य
    व्याख्या: जैन धर्म में सर्वोच्च और पूर्ण ज्ञान की अवस्था को ‘कैवल्य’ कहा जाता है।

    16. 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का प्रतीक चिह्न क्या था?

    • (A) बैल
    • (B) सिंह
    • (C) सर्प
    • (D) हाथी
    उत्तर: (C) सर्प
    व्याख्या: प्रत्येक तीर्थंकर का एक प्रतीक चिह्न होता है। पार्श्वनाथ का प्रतीक चिह्न सर्प (साँप) है।

    17. ‘स्याद्वाद’ का सिद्धांत किससे संबंधित है?

    • (A) लोकायत
    • (B) शैव धर्म
    • (C) जैन धर्म
    • (D) वैष्णव धर्म
    उत्तर: (C) जैन धर्म
    व्याख्या: स्याद्वाद, या ज्ञान की सापेक्षता का सिद्धांत, जैन दर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    18. महावीर की माता कौन थीं?

    • (A) यशोदा
    • (B) अनोज्जा
    • (C) त्रिशला
    • (D) महामाया
    उत्तर: (C) त्रिशला
    व्याख्या: महावीर स्वामी की माता का नाम त्रिशला था, जो लिच्छवि राजा चेटक की बहन थीं।

    19. दिलवाड़ा के जैन मंदिर कहाँ स्थित हैं?

    • (A) श्रवणबेलगोला
    • (B) पारसनाथ पर्वत
    • (C) इंदौर
    • (D) माउंट आबू
    उत्तर: (D) माउंट आबू
    व्याख्या: दिलवाड़ा के प्रसिद्ध जैन मंदिर राजस्थान के माउंट आबू में स्थित हैं, जो अपनी शानदार संगमरमर की नक्काशी के लिए जाने जाते हैं।

    20. दिगम्बर सम्प्रदाय के अनुसार, स्त्रियाँ मोक्ष प्राप्त कर सकती हैं या नहीं?

    • (A) हाँ, कर सकती हैं
    • (B) नहीं, नहीं कर सकतीं
    • (C) पुरुष के रूप में जन्म लेने के बाद ही कर सकती हैं
    • (D) इस पर कोई स्पष्ट मत नहीं है
    उत्तर: (C) पुरुष के रूप में जन्म लेने के बाद ही कर सकती हैं
    व्याख्या: दिगम्बर परंपरा का मानना है कि मोक्ष प्राप्ति के लिए नग्नता और कठोर तपस्या आवश्यक है, जो स्त्रियों के लिए संभव नहीं है। इसलिए उन्हें मोक्ष के लिए पुरुष के रूप में पुनर्जन्म लेना होगा।

    21. महावीर स्वामी ने अपना पहला उपदेश कहाँ दिया था?

    • (A) सारनाथ
    • (B) पावापुरी
    • (C) राजगृह
    • (D) वैशाली
    उत्तर: (C) राजगृह
    व्याख्या: ज्ञान प्राप्ति के बाद महावीर स्वामी ने अपना पहला उपदेश राजगृह (राजगीर) में विपुलाचल पहाड़ी पर दिया था।

    22. ‘कल्पसूत्र’ की रचना किसने की थी?

    • (A) स्थूलभद्र
    • (B) भद्रबाहु
    • (C) हेमचंद्र
    • (D) हरिभद्र
    उत्तर: (B) भद्रबाहु
    व्याख्या: ‘कल्पसूत्र’ एक महत्वपूर्ण जैन ग्रंथ है जिसमें तीर्थंकरों की जीवनियाँ हैं। इसकी रचना भद्रबाहु ने संस्कृत में की थी।

    23. जैन धर्म में ‘संथारा’ या ‘सल्लेखना’ प्रथा क्या है?

    • (A) एक त्योहार
    • (B) उपवास द्वारा प्राण त्यागना
    • (C) एक प्रकार का ध्यान
    • (D) तीर्थ यात्रा
    उत्तर: (B) उपवास द्वारा प्राण त्यागना
    व्याख्या: सल्लेखना एक जैन प्रथा है जिसमें व्यक्ति स्वेच्छा से भोजन और जल त्यागकर मृत्यु का वरण करता है। इसे आत्म-शुद्धि का उच्चतम रूप माना जाता है।

    24. किस मौर्य शासक ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में जैन धर्म अपना लिया था?

    • (A) अशोक
    • (B) बिन्दुसार
    • (C) चंद्रगुप्त मौर्य
    • (D) दशरथ
    उत्तर: (C) चंद्रगुप्त मौर्य
    व्याख्या: चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने जीवन के अंत में जैन मुनि भद्रबाहु से दीक्षा ली और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) जाकर सल्लेखना द्वारा प्राण त्याग दिए।

    25. श्रवणबेलगोला में गोमतेश्वर (बाहुबली) की विशाल प्रतिमा किसने स्थापित करवाई थी?

    • (A) चंद्रगुप्त मौर्य
    • (B) अशोक
    • (C) चामुंडराय
    • (D) खारवेल
    उत्तर: (C) चामुंडराय
    व्याख्या: गंग वंश के मंत्री और सेनापति चामुंडराय ने 10वीं शताब्दी में कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में भगवान बाहुबली की 57 फुट ऊँची एकाश्म प्रतिमा का निर्माण करवाया था।

    26. महावीर स्वामी किस कुल से संबंधित थे?

    • (A) शाक्य
    • (B) ज्ञातृक
    • (C) लिच्छवि
    • (D) मौर्य
    उत्तर: (B) ज्ञातृक
    व्याख्या: महावीर स्वामी के पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक क्षत्रिय कुल के प्रधान थे।

    27. जैन धर्म ईश्वर के संबंध में क्या मानता है?

    • (A) ईश्वर को सृष्टि का रचयिता मानता है
    • (B) ईश्वर के अस्तित्व को अस्वीकार करता है
    • (C) ईश्वर को ‘जिन’ से नीचे मानता है
    • (D) ईश्वर को सर्वोच्च सत्ता मानता है
    उत्तर: (C) ईश्वर को ‘जिन’ से नीचे मानता है
    व्याख्या: जैन धर्म सृष्टि के निर्माता के रूप में ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है। यह मानता है कि ब्रह्मांड शाश्वत है। हालांकि, यह देवताओं के अस्तित्व को मानता है, लेकिन उन्हें तीर्थंकरों (जिन) से नीचे का स्थान देता है।

    28. ‘आजीवक’ संप्रदाय के संस्थापक कौन थे?

    • (A) महावीर स्वामी
    • (B) महात्मा बुद्ध
    • (C) मक्खलि गोसाल
    • (D) चार्वाक
    उत्तर: (C) मक्खलि गोसाल
    व्याख्या: मक्खलि गोसाल प्रारंभ में महावीर के शिष्य थे, लेकिन बाद में मतभेद होने पर उन्होंने ‘आजीवक’ नामक एक नियतिवादी संप्रदाय की स्थापना की।

    29. जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत क्या है?

    • (A) कर्म
    • (B) निष्ठा
    • (C) अहिंसा
    • (D) वैराग्य
    उत्तर: (C) अहिंसा
    व्याख्या: ‘अहिंसा परमो धर्म:’ जैन धर्म का आधारभूत सिद्धांत है। यह मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को कष्ट न पहुँचाने पर अत्यधिक बल देता है।

    30. किस शासक ने उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाओं में जैन साधुओं के लिए गुफाओं का निर्माण करवाया था?

    • (A) अशोक
    • (B) खारवेल
    • (C) कनिष्क
    • (D) समुद्रगुप्त
    उत्तर: (B) खारवेल
    व्याख्या: कलिंग के चेदि वंश के राजा खारवेल जैन धर्म के एक महान संरक्षक थे। उन्होंने भुवनेश्वर के पास उदयगिरि और खंडगिरि की पहाड़ियों में जैन भिक्षुओं के लिए कई गुफाएँ बनवाईं।

    31. महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद जैन संघ का अगला अध्यक्ष कौन हुआ?

    • (A) भद्रबाहु
    • (B) स्थूलभद्र
    • (C) सुधर्मन
    • (D) जम्बूस्वामी
    उत्तर: (C) सुधर्मन
    व्याख्या: महावीर के 11 प्रमुख शिष्य थे जिन्हें ‘गणधर’ कहा जाता था। महावीर के निर्वाण के समय केवल सुधर्मन ही जीवित बचे थे, जो संघ के पहले अध्यक्ष बने।

    32. ‘अणुव्रत’ शब्द किस धर्म से जुड़ा है?

    • (A) बौद्ध धर्म
    • (B) जैन धर्म
    • (C) लोकायत मत
    • (D) हिंदू धर्म
    उत्तर: (B) जैन धर्म
    व्याख्या: जैन धर्म में गृहस्थ अनुयायियों द्वारा पालन किए जाने वाले पाँच व्रतों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य) को ‘अणुव्रत’ कहा जाता है। इनकी कठोरता भिक्षुओं के ‘महाव्रत’ से कम होती है।

    33. महावीर की पत्नी का नाम क्या था?

    • (A) त्रिशला
    • (B) गोपा
    • (C) यशोदा
    • (D) यशोधरा
    उत्तर: (C) यशोदा
    व्याख्या: महावीर स्वामी की पत्नी का नाम यशोदा था। यशोधरा महात्मा बुद्ध की पत्नी का नाम था।

    34. जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ निम्नलिखित स्थानों में से मुख्यतः किससे संबंधित थे?

    • (A) वाराणसी
    • (B) कौशाम्बी
    • (C) गिरिव्रज
    • (D) चम्पा
    उत्तर: (A) वाराणसी
    व्याख्या: 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म वाराणसी (काशी) में राजा अश्वसेन के यहाँ हुआ था।

    35. ‘समाधिमरण’ किस दर्शन से संबंधित है?

    • (A) बौद्ध दर्शन
    • (B) जैन दर्शन
    • (C) योग दर्शन
    • (D) लोकायत दर्शन
    उत्तर: (B) जैन दर्शन
    व्याख्या: ‘समाधिमरण’ या ‘सल्लेखना’ जैन दर्शन से संबंधित प्रथा है, जिसमें उपवास द्वारा प्राण त्यागे जाते हैं।

    36. प्रथम जैन संगीति में जैन धर्म किन दो संप्रदायों में विभाजित हो गया?

    • (A) हीनयान और महायान
    • (B) आजीवक और नियतिवादी
    • (C) श्वेताम्बर और दिगम्बर
    • (D) कापालिक और कालामुख
    उत्तर: (C) श्वेताम्बर और दिगम्बर
    व्याख्या: पाटलिपुत्र में आयोजित पहली जैन परिषद के दौरान, भद्रबाहु और स्थूलभद्र के अनुयायियों के बीच मतभेदों के कारण जैन धर्म श्वेताम्बर और दिगम्बर संप्रदायों में विभाजित हो गया।

    37. महावीर स्वामी के प्रथम शिष्य कौन थे?

    • (A) मक्खलि गोसाल
    • (B) जमालि
    • (C) सुधर्मन
    • (D) इंद्रभूति गौतम
    उत्तर: (B) जमालि
    व्याख्या: महावीर स्वामी के दामाद (उनकी पुत्री प्रियदर्शना के पति) जमालि उनके पहले शिष्य बने। हालांकि, बाद में उन्होंने संघ छोड़ दिया।

    38. जैन धर्म में कर्म परमाणुओं से आत्मा को मुक्त करने को क्या कहा जाता है?

    • (A) संवर
    • (B) निर्जरा
    • (C) आस्रव
    • (D) बंध
    उत्तर: (B) निर्जरा
    व्याख्या: जैन दर्शन के अनुसार, आत्मा में पहले से मौजूद कर्मों को तपस्या द्वारा नष्ट करना ‘निर्जरा’ कहलाता है। ‘संवर’ नए कर्मों के प्रवाह को रोकना है।

    39. प्रसिद्ध जैन शिक्षक हेमचंद्र किस राजा के दरबार में थे?

    • (A) अमोघवर्ष
    • (B) कुमारपाल
    • (C) जयसिंह सिद्धराज
    • (D) (B) और (C) दोनों
    उत्तर: (D) (B) और (C) दोनों
    व्याख्या: आचार्य हेमचंद्र एक महान जैन विद्वान थे, जो गुजरात के चालुक्य (सोलंकी) शासकों जयसिंह सिद्धराज और उनके उत्तराधिकारी कुमारपाल दोनों के सलाहकार थे।

    40. जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर कौन थे?

    • (A) ऋषभदेव
    • (B) पार्श्वनाथ
    • (C) अरिष्टनेमि
    • (D) मल्लिनाथ
    उत्तर: (C) अरिष्टनेमि
    व्याख्या: अरिष्टनेमि जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर थे। ऋग्वेद में ऋषभदेव और अरिष्टनेमि, इन दो तीर्थंकरों का उल्लेख मिलता है।

    41. कौन से तीर्थंकर को श्वेताम्बर परंपरा में स्त्री माना जाता है?

    • (A) शांतिनाथ
    • (B) मल्लिनाथ
    • (C) नेमिनाथ
    • (D) वासुपूज्य
    उत्तर: (B) मल्लिनाथ
    व्याख्या: 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ को लेकर श्वेताम्बर और दिगम्बर संप्रदायों में मतभेद है। श्वेताम्बर उन्हें स्त्री (मल्ली कुमारी) मानते हैं, जबकि दिगम्बर उन्हें पुरुष मानते हैं।

    42. ‘आचारांग सूत्र’ किस धर्म से संबंधित है?

    • (A) बौद्ध धर्म
    • (B) जैन धर्म
    • (C) सिख धर्म
    • (D) इस्लाम
    उत्तर: (B) जैन धर्म
    व्याख्या: ‘आचारांग सूत्र’ जैन आगम साहित्य का हिस्सा है। इसमें जैन भिक्षुओं के लिए आचार-नियमों का वर्णन है।

    43. जैन धर्म के अनुसार, जगत का निर्माण और पालन-पोषण…

    • (A) सार्वभौमिक विधान से हुआ है
    • (B) सार्वभौमिक सत्य से हुआ है
    • (C) सार्वभौमिक आस्था से हुआ है
    • (D) सार्वभौमिक आत्मा से हुआ है
    उत्तर: (A) सार्वभौमिक विधान से हुआ है
    व्याख्या: जैन दर्शन के अनुसार, यह ब्रह्मांड किसी ईश्वर द्वारा नहीं बनाया गया है, बल्कि यह शाश्वत है और सार्वभौमिक प्राकृतिक नियमों (Universal Laws) द्वारा संचालित होता है।

    44. मथुरा कला शैली का संबंध मुख्य रूप से किस धर्म से था?

    • (A) बौद्ध धर्म
    • (B) जैन धर्म
    • (C) वैष्णव धर्म
    • (D) इन सभी से
    उत्तर: (D) इन सभी से
    व्याख्या: कुषाण काल में विकसित मथुरा कला शैली में बौद्ध, जैन और हिंदू (वैष्णव, शैव) तीनों धर्मों से संबंधित मूर्तियों का निर्माण बड़े पैमाने पर हुआ।

    45. महावीर स्वामी ने किस भाषा में उपदेश दिया?

    • (A) संस्कृत
    • (B) पालि
    • (C) प्राकृत (अर्धमागधी)
    • (D) अपभ्रंश
    उत्तर: (C) प्राकृत (अर्धमागधी)
    व्याख्या: महावीर स्वामी ने आम लोगों की भाषा प्राकृत (विशेष रूप से अर्धमागधी) में अपने उपदेश दिए ताकि अधिक से अधिक लोग उन्हें समझ सकें।

    46. ‘यापनीय’ किस धर्म का एक संप्रदाय था?

    • (A) बौद्ध धर्म
    • (B) जैन धर्म
    • (C) शैव धर्म
    • (D) वैष्णव धर्म
    उत्तर: (B) जैन धर्म
    व्याख्या: यापनीय जैन धर्म का एक विलुप्त संप्रदाय था जो श्वेताम्बर और दिगम्बर दोनों की कुछ मान्यताओं को मिलाता था।

    47. ‘पुद्गल’ शब्द का जैन दर्शन में क्या अर्थ है?

    • (A) आत्मा
    • (B) पदार्थ या द्रव्य
    • (C) कर्म
    • (D) मोक्ष
    उत्तर: (B) पदार्थ या द्रव्य
    व्याख्या: जैन तत्वमीमांसा में, ‘पुद्गल’ का अर्थ है पदार्थ या भौतिक द्रव्य। यह उन छह द्रव्यों में से एक है जिनसे ब्रह्मांड बना है।

    48. जैन धर्म में ‘आस्रव’ का क्या तात्पर्य है?

    • (A) कर्म का नाश
    • (B) कर्म का आत्मा की ओर प्रवाह
    • (C) कर्म का रुक जाना
    • (D) आत्मा से कर्म का अलग होना
    उत्तर: (B) कर्म का आत्मा की ओर प्रवाह
    व्याख्या: आस्रव वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा कर्म के कण आत्मा की ओर आकर्षित होते हैं और उससे बंधने की प्रक्रिया शुरू होती है।

    49. महावीर स्वामी के पिता सिद्धार्थ किस गणराज्य के प्रमुख थे?

    • (A) लिच्छवि
    • (B) शाक्य
    • (C) वज्जि संघ
    • (D) मल्ल
    उत्तर: (C) वज्जि संघ
    व्याख्या: कुण्डग्राम जहाँ के सिद्धार्थ प्रधान थे, वह वज्जि महाजनपद के एक सदस्य गणराज्य ज्ञातृक कुल का हिस्सा था।

    50. ‘महामस्तकाभिषेक’ उत्सव किससे संबंधित है?

    • (A) महावीर
    • (B) बुद्ध
    • (C) बाहुबली
    • (D) नटराज
    उत्तर: (C) बाहुबली
    व्याख्या: महामस्तकाभिषेक एक विशाल जैन उत्सव है जो प्रत्येक 12 वर्ष में एक बार श्रवणबेलगोला में भगवान बाहुबली (गोमतेश्वर) की प्रतिमा पर आयोजित होता है।

    51. जैन धर्म के अनुसार, कर्म के बंधन का कारण क्या है?

    • (A) केवल अज्ञान
    • (B) केवल कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ)
    • (C) अज्ञान और कषाय दोनों
    • (D) नियति
    उत्तर: (C) अज्ञान और कषाय दोनों
    व्याख्या: जैन दर्शन मानता है कि अज्ञान (मिथ्यात्व) और कषाय (नकारात्मक भावनाएं) ही कर्मों को आत्मा से बांधने का मुख्य कारण हैं।

    52. ‘भगवती सूत्र’ में किसकी जानकारी मिलती है?

    • (A) महावीर के जीवन की
    • (B) सोलह महाजनपदों की
    • (C) जैन सिद्धांतों की
    • (D) ये सभी
    उत्तर: (D) ये सभी
    व्याख्या: ‘भगवती सूत्र’ एक महत्वपूर्ण जैन आगम ग्रंथ है जिसमें महावीर के जीवन, उनके उपदेशों और उस समय के सोलह महाजनपदों का भी उल्लेख मिलता है।

    53. जैन धर्म में ‘तीर्थंकर’ का क्या अर्थ है?

    • (A) जो मोक्ष प्राप्त कर चुका हो
    • (B) जो संसार सागर से पार जाने का मार्ग बताए
    • (C) जो सभी कर्मों से मुक्त हो
    • (D) जो संघ का प्रमुख हो
    उत्तर: (B) जो संसार सागर से पार जाने का मार्ग बताए
    व्याख्या: ‘तीर्थ’ का अर्थ है वह स्थान या साधन जिससे संसार रूपी सागर को पार किया जा सके, और ‘कर’ का अर्थ है बनाने वाला। इस प्रकार तीर्थंकर मार्गदर्शक होते हैं।

    54. महावीर ने अपने शिष्यों को कितने ‘गणों’ में विभाजित किया था?

    • (A) 9
    • (B) 10
    • (C) 11
    • (D) 12
    उत्तर: (C) 11
    व्याख्या: महावीर ने अपने संघ को 11 गणों में संगठित किया था, और प्रत्येक गण का प्रमुख एक ‘गणधर’ होता था।

    55. जैन धर्म के प्रसार में किस भाषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा?

    • (A) संस्कृत
    • (B) पालि
    • (C) प्राकृत
    • (D) हिंदी
    उत्तर: (C) प्राकृत
    व्याख्या: प्रारंभिक जैन साहित्य और उपदेश प्राकृत भाषा में थे, जिससे यह आम जनता के बीच आसानी से फैल सका। बाद में संस्कृत और अपभ्रंश का भी प्रयोग हुआ।

    56. ‘परिशिष्टपर्वन’ जो कि जैन धर्म से संबंधित रचना है, के रचयिता हैं-

    • (A) भद्रबाहु
    • (B) स्थूलभद्र
    • (C) हेमचंद्र
    • (D) स्वयंभू
    उत्तर: (C) हेमचंद्र
    व्याख्या: ‘परिशिष्टपर्वन’ की रचना 12वीं शताब्दी के महान जैन विद्वान आचार्य हेमचंद्र ने की थी। इसमें प्रारंभिक जैन आचार्यों की जीवनियाँ हैं।

    57. ऋषभदेव का उल्लेख किस वेद में मिलता है?

    • (A) यजुर्वेद
    • (B) अथर्ववेद
    • (C) सामवेद
    • (D) ऋग्वेद
    उत्तर: (D) ऋग्वेद
    व्याख्या: ऋग्वेद में दो जैन तीर्थंकरों, ऋषभदेव (प्रथम) और अरिष्टनेमि (22वें), का उल्लेख मिलता है, जो जैन धर्म की प्राचीनता को दर्शाता है।

    58. जैन धर्म और बौद्ध धर्म दोनों ही विश्वास करते हैं कि –

    • (A) कर्म तथा पुनर्जन्म के सिद्धांत सही हैं
    • (B) मृत्यु के पश्चात् ही मोक्ष संभव है
    • (C) स्त्री तथा पुरुष दोनों ही मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं
    • (D) जीवन में मध्यम मार्ग सर्वश्रेष्ठ है
    उत्तर: (A) कर्म तथा पुनर्जन्म के सिद्धांत सही हैं
    व्याख्या: दोनों धर्म कर्म के सिद्धांत (जैसा करोगे वैसा भरोगे) और पुनर्जन्म के चक्र में विश्वास रखते हैं। मोक्ष की अवधारणा और माध्यम मार्ग पर उनके विचार भिन्न हैं।

    59. महावीर के अनुयायियों को मूलतः क्या कहा जाता था?

    • (A) अर्हत
    • (B) जिन
    • (C) निर्ग्रन्थ
    • (D) केवली
    उत्तर: (C) निर्ग्रन्थ
    व्याख्या: महावीर स्वामी के अनुयायियों को प्रारंभ में ‘निर्ग्रन्थ’ (बंधन रहित) कहा जाता था। बाद में ‘जैन’ शब्द प्रचलित हुआ।
  • सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) – नोट्स, MCQ

    सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) – नोट्स, MCQ | UPSC, SSC, Railway

    सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization)

    यह सामग्री UPSC, SSC, Railway और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बनाई गई है।


    परिचय (Introduction)

    सिंधु घाटी सभ्यता (IVC), जिसे हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है, विश्व की प्राचीनतम नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी। यह एक कांस्य युगीन (Bronze Age) सभ्यता थी। इसका काल-निर्धारण लगभग 2500 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है। इस सभ्यता की खोज का श्रेय ‘रायबहादुर दयाराम साहनी’ को जाता है, जिन्होंने 1921 में हड़प्पा का उत्खनन किया था।


    भौगोलिक विस्तार (Geographical Extent)

    यह सभ्यता एक विशाल क्षेत्र में फैली हुई थी, जो त्रिभुजाकार स्वरूप में थी। इसके प्रमुख स्थल आज के भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पाए जाते हैं।

    • सबसे उत्तरी स्थल: मांडा (जम्मू-कश्मीर)
    • सबसे दक्षिणी स्थल: दैमाबाद (महाराष्ट्र)
    • सबसे पूर्वी स्थल: आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश)
    • सबसे पश्चिमी स्थल: सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान, पाकिस्तान)

    नगर नियोजन और वास्तुकला (Town Planning and Architecture)

    सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे उत्कृष्ट विशेषता इसकी सुनियोजित नगर योजना थी।

    • ग्रिड प्रणाली (Grid System): सड़कें एक-दूसरे को समकोण (90 डिग्री) पर काटती थीं, जिससे शहर शतरंज की बिसात जैसा लगता था।
    • दो स्तरीय शहर: अधिकांश नगर दो भागों में विभाजित थे – एक पश्चिमी टीला (दुर्ग या गढ़) और एक पूर्वी टीला (निचला नगर)। दुर्ग में संभवतः शासक वर्ग रहता था।
    • पक्की ईंटों का प्रयोग: मकान बनाने के लिए पक्की ईंटों का व्यापक उपयोग किया गया, जिनका आकार निश्चित अनुपात (4:2:1) में होता था।
    • उन्नत जल निकासी प्रणाली: हर घर में स्नानागार और आँगन होता था और पानी की निकासी के लिए ढकी हुई नालियाँ थीं, जो मुख्य सड़क की नाली से मिलती थीं। यह तत्कालीन किसी भी अन्य सभ्यता में नहीं देखी गई।
    • विशाल स्नानागार (Great Bath): मोहनजोदड़ो में मिला यह एक प्रमुख सार्वजनिक स्थल था, जिसका उपयोग शायद धार्मिक अनुष्ठानों के लिए होता था।
    • अन्नागार (Granaries): हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में बड़े अन्नागार मिले हैं, जो अधिशेष अनाज के भंडारण को दर्शाते हैं।

    आर्थिक जीवन (Economic Life)

    • कृषि: सिंधु निवासी गेहूँ, जौ, राई, मटर, कपास आदि की खेती करते थे। कपास उगाने का श्रेय सबसे पहले सिंधु निवासियों को ही जाता है।
    • पशुपालन: बैल, भैंस, बकरी, भेड़ और सूअर प्रमुख पालतू जानवर थे। घोड़े के साक्ष्य विवादास्पद हैं।
    • व्यापार और वाणिज्य: व्यापार उन्नत अवस्था में था। लोथल में मिला गोदी बाड़ा (Dockyard) समुद्री व्यापार का सबसे बड़ा प्रमाण है। मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक) के साथ व्यापारिक संबंध थे।
    • माप-तौल: बाट और माप की एक मानकीकृत प्रणाली मौजूद थी, जो 16 के गुणकों में थी।

    सामाजिक और धार्मिक जीवन (Social and Religious Life)

    • समाज: समाज संभवतः मातृसत्तात्मक था, क्योंकि बड़ी संख्या में मातृदेवी की मृण्मूर्तियाँ मिली हैं। समाज विद्वान, योद्धा, व्यापारी और श्रमिक जैसे वर्गों में विभाजित प्रतीत होता है।
    • धर्म: मंदिर के कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले हैं। ये लोग मातृदेवी और पशुपति महादेव (एक मुहर पर चित्रित योगी) की पूजा करते थे। इसके अलावा, वे लिंग, योनि, वृक्ष (पीपल) और पशु (कूबड़ वाला साँड) की भी पूजा करते थे।
    • अंतिम संस्कार: शवों को दफनाने (पूर्ण समाधिकरण) और दाह-कर्म (आंशिक समाधिकरण) दोनों की प्रथाएँ प्रचलित थीं।

    कला और लिपि (Art and Script)

    • मुहरें (Seals): सेलखड़ी (Steatite) से बनी हजारों मुहरें मिली हैं, जिन पर जानवरों की आकृतियाँ और एक अज्ञात लिपि अंकित है।
    • मूर्तियाँ: मोहनजोदड़ो से मिली कांस्य की नर्तकी की मूर्ति और दाढ़ी वाले पुजारी की पत्थर की मूर्ति कला के बेहतरीन उदाहरण हैं।
    • मृदभांड (Pottery): लाल और काले रंग के चित्रित मृदभांड (Black and Red Ware) का उपयोग होता था, जिन पर ज्यामितीय और पशु-पक्षियों के चित्र बने होते थे।
    • लिपि (Script): सिंधु लिपि भावचित्रात्मक (Pictographic) थी, जिसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है। यह दाईं से बाईं ओर लिखी जाती थी (बूस्ट्रोफेडन शैली)।

    पतन के कारण (Causes of Decline)

    सिंधु घाटी सभ्यता के पतन का कोई एक निश्चित कारण नहीं है। विभिन्न विद्वान निम्नलिखित कारणों की संभावना व्यक्त करते हैं:

    • जलवायु परिवर्तन: वर्षा में कमी और नदियों का सूखना।
    • बाढ़ और भूकंप: प्राकृतिक आपदाओं ने शहरों को नष्ट कर दिया।
    • आर्यों का आक्रमण: यह एक विवादास्पद सिद्धांत है जिसे मार्टिमर व्हीलर ने दिया था।
    • महामारी: किसी बड़ी बीमारी का फैलना।
    • संसाधनों का अत्यधिक उपयोग: जनसंख्या वृद्धि के कारण संसाधनों पर दबाव।

    सिंधु घाटी सभ्यता पर महत्वपूर्ण MCQ

    1. हड़प्पा सभ्यता का सर्वाधिक मान्यता प्राप्त काल क्या है?

    • (A) 2800 ई.पू. – 2000 ई.पू.
    • (B) 2500 ई.पू. – 1750 ई.पू.
    • (C) 3500 ई.पू. – 1800 ई.पू.
    • (D) निश्चित नहीं हो सका है
    उत्तर: (B) 2500 ई.पू. – 1750 ई.पू.
    व्याख्या: रेडियो-कार्बन डेटिंग (C-14) जैसी विश्लेषण पद्धतियों के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे स्वीकृत काल 2500 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व माना गया है।

    2. सिंधु घाटी सभ्यता निम्नलिखित में से किस सभ्यता के समकालीन नहीं थी?

    • (A) मिस्र की सभ्यता
    • (B) मेसोपोटामिया की सभ्यता
    • (C) चीन की सभ्यता
    • (D) ग्रीक की सभ्यता
    उत्तर: (D) ग्रीक की सभ्यता
    व्याख्या: सिंधु घाटी सभ्यता मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं के साथ व्यापारिक संबंध रखती थी और उनके समकालीन थी। चीन की सभ्यता भी इसी दौरान विकसित हो रही थी। ग्रीक सभ्यता का विकास बहुत बाद में हुआ।

    3. सिंधु घाटी सभ्यता में घोड़े के अवशेष कहाँ से मिले हैं?

    • (A) सुरकोटदा
    • (B) वणावली
    • (C) लोथल
    • (D) कालीबंगा
    उत्तर: (A) सुरकोटदा
    व्याख्या: गुजरात के कच्छ जिले में स्थित सुरकोटदा एकमात्र हड़प्पा स्थल है जहाँ से घोड़े की अस्थियों के वास्तविक अवशेष मिले हैं। हालांकि, यह अभी भी बहस का विषय है कि घोड़े IVC में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते थे या नहीं।

    4. हड़प्पा सभ्यता के किस स्थल से ‘गोदी बाड़ा’ (Dockyard) का साक्ष्य मिला है?

    • (A) हड़प्पा
    • (B) मोहनजोदड़ो
    • (C) लोथल
    • (D) धौलावीरा
    उत्तर: (C) लोथल
    व्याख्या: गुजरात में भोगवा नदी के किनारे स्थित लोथल एक प्रमुख बंदरगाह शहर था। यहाँ से दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात गोदी बाड़ा (Dockyard) मिला है, जो समुद्री व्यापार का स्पष्ट प्रमाण है।

    5. ‘नर्तकी की कांस्य मूर्ति’ कहाँ से प्राप्त हुई है?

    • (A) हड़प्पा
    • (B) चन्हूदड़ो
    • (C) मोहनजोदड़ो
    • (D) कालीबंगा
    उत्तर: (C) मोहनजोदड़ो
    व्याख्या: प्रसिद्ध ‘डांसिंग गर्ल’ या नर्तकी की कांस्य मूर्ति मोहनजोदड़ो के उत्खनन से प्राप्त हुई है। यह मोम-लोपी विधि (Lost-wax casting) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

    6. निम्नलिखित में से किस पदार्थ का उपयोग हड़प्पा काल की मुहरों (Seals) के निर्माण में मुख्य रूप से किया गया था?

    • (A) टेराकोटा (पकी मिट्टी)
    • (B) कांसा
    • (C) तांबा
    • (D) सेलखड़ी (Steatite)
    उत्तर: (D) सेलखड़ी (Steatite)
    व्याख्या: हड़प्पा सभ्यता की अधिकांश मुहरें नरम पत्थर सेलखड़ी से बनी होती थीं। इन पर विभिन्न जानवरों की आकृतियाँ और सिंधु लिपि के अक्षर उकेरे जाते थे।

    7. ‘जुते हुए खेत’ का साक्ष्य सिंधु सभ्यता के किस स्थल से मिला है?

    • (A) लोथल
    • (B) कालीबंगा
    • (C) रोपड़
    • (D) बनावली
    उत्तर: (B) कालीबंगा
    व्याख्या: राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित कालीबंगा से प्राक्-हड़प्पा काल के जुते हुए खेत का साक्ष्य मिला है। यहाँ से अग्नि-वेदिकाएं भी मिली हैं।

    8. हड़प्पावासी किस वस्तु के उत्पादन में सर्वप्रथम थे?

    • (A) मुद्राएँ
    • (B) कांसे के औजार
    • (C) कपास
    • (D) जौ
    उत्तर: (C) कपास
    व्याख्या: विश्व में कपास उगाने का श्रेय सबसे पहले सिंधु घाटी के लोगों को दिया जाता है। यूनानी लोग इसे ‘सिन्डन’ (Sindon) कहते थे, जो ‘सिंधु’ शब्द से निकला है।

    9. सिंधु सभ्यता का कौन-सा स्थान भारत में स्थित है?

    • (A) हड़प्पा
    • (B) मोहनजोदड़ो
    • (C) लोथल
    • (D) सुत्कागेंडोर
    उत्तर: (C) लोथल
    व्याख्या: लोथल गुजरात राज्य, भारत में स्थित है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो दोनों पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांतों में क्रमशः स्थित हैं। सुत्कागेंडोर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में है।

    10. ‘सत्यमेव जयते’ शब्द किस उपनिषद से लिया गया है? (यह प्रश्न अक्सर सभ्यता और संस्कृति खंड में आता है)

    • (A) मुण्डक उपनिषद
    • (B) कठ उपनिषद
    • (C) छांदोग्य उपनिषद
    • (D) केन उपनिषद
    उत्तर: (A) मुण्डक उपनिषद
    व्याख्या: हालांकि यह प्रश्न सीधे IVC से नहीं है, पर यह भारतीय इतिहास के प्रारंभिक दर्शन का एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। ‘सत्यमेव जयते’ (सत्य की ही विजय होती है) भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है और इसे मुण्डक उपनिषद से लिया गया है।

    11. सिंधु सभ्यता की लिपि कैसी थी?

    • (A) ब्राह्मी
    • (B) खरोष्ठी
    • (C) देवनागरी
    • (D) भावचित्रात्मक (Pictographic)
    उत्तर: (D) भावचित्रात्मक (Pictographic)
    व्याख्या: सिंधु लिपि में चिह्न और प्रतीक होते थे जो किसी वस्तु या विचार को दर्शाते थे। यह वर्णमाला आधारित नहीं थी और इसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है।

    12. हड़प्पा सभ्यता के बारे में कौन सी उक्ति सही है?

    • (A) उन्हें अश्वमेध की जानकारी थी।
    • (B) गाय उनके लिए पवित्र थी।
    • (C) उन्होंने पशुपति का सम्मान करना आरंभ किया।
    • (D) उनकी संस्कृति सामान्यतः स्थिर नहीं थी।
    उत्तर: (C) उन्होंने पशुपति का सम्मान करना आरंभ किया।
    व्याख्या: मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर पर एक योगी की आकृति है जो तीन मुखों वाला है और जानवरों से घिरा है। इसे ‘पशुपति महादेव’ का आदि रूप माना जाता है। अश्वमेध यज्ञ वैदिक काल की प्रथा है। गाय की पवित्रता भी वैदिक काल में अधिक प्रमुख हुई।

    13. सिंधु घाटी के लोग विश्वास करते थे –

    • (A) आत्मा और ब्रह्म में
    • (B) कर्मकांड में
    • (C) यज्ञ प्रणाली में
    • (D) मातृशक्ति में
    उत्तर: (D) मातृशक्ति में
    व्याख्या: बड़ी संख्या में मातृदेवी की टेराकोटा की मूर्तियाँ मिलने से यह अनुमान लगाया जाता है कि सिंधु समाज में मातृशक्ति की पूजा प्रचलित थी और समाज संभवतः मातृसत्तात्मक था।

    14. हड़प्पा के मिट्टी के बर्तनों पर सामान्यतः किस रंग का उपयोग हुआ था?

    • (A) लाल
    • (B) नीला-हरा
    • (C) पांडु (पीला)
    • (D) नीला
    उत्तर: (A) लाल
    व्याख्या: हड़प्पा के मृदभांड (बर्तन) मुख्य रूप से लाल या गुलाबी रंग के होते थे, जिन पर काले रंग से डिज़ाइन बनाए जाते थे। इसलिए इन्हें ‘लाल और काले मृदभांड’ (Red and Black Ware) भी कहा जाता है।

    15. सिंधु सभ्यता का कौन सा स्थल अपनी अनूठी जल प्रबंधन प्रणाली के लिए जाना जाता है?

    • (A) लोथल
    • (B) मोहनजोदड़ो
    • (C) हड़प्पा
    • (D) धौलावीरा
    उत्तर: (D) धौलावीरा
    व्याख्या: गुजरात के कच्छ में स्थित धौलावीरा अपनी उन्नत जल संचयन और प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ बड़े-बड़े जलाशय (reservoirs) और बांध बनाए गए थे। यह एकमात्र स्थल है जो तीन भागों में विभाजित था।

    16. हड़प्पाकालीन स्थल रोपड़/रोपड़ किस नदी के किनारे स्थित था?

    • (A) चेनाब
    • (B) सतलुज
    • (C) सिंधु
    • (D) रावी
    उत्तर: (B) सतलुज
    व्याख्या: रोपड़ (आधुनिक रूपनगर) पंजाब, भारत में सतलुज नदी के तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण हड़प्पा स्थल है।

    17. सिंधु घाटी सभ्यता को खोज निकालने में जिन दो भारतीयों का नाम जुड़ा है, वे हैं-

    • (A) दयाराम साहनी एवं राखालदास बनर्जी
    • (B) जॉन मार्शल एवं ईश्वरी प्रसाद
    • (C) आशीर्वादीलाल श्रीवास्तव एवं रंगनाथ राव
    • (D) माधोस्वरूप वत्स एवं वी. बी. राव
    उत्तर: (A) दयाराम साहनी एवं राखालदास बनर्जी
    व्याख्या: 1921 में दयाराम साहनी ने हड़प्पा का उत्खनन किया और 1922 में राखालदास (आर.डी.) बनर्जी ने मोहनजोदड़ो की खोज की।

    18. हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो की पुरातात्विक खुदाई के प्रभारी कौन थे?

    • (A) लॉर्ड मैकाले
    • (B) सर जॉन मार्शल
    • (C) लॉर्ड क्लाइव
    • (D) कर्नल टॉड
    उत्तर: (B) सर जॉन मार्शल
    व्याख्या: सर जॉन मार्शल 20वीं शताब्दी की शुरुआत में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के महानिदेशक थे। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो में प्रारंभिक खुदाई उनके ही नेतृत्व में हुई थी।

    19. किस पशु की आकृति जो मुहर पर मिली है, जिससे ज्ञात होता है कि सिंधु घाटी एवं मेसोपोटामिया की सभ्यताओं के मध्य व्यापारिक संबंध थे?

    • (A) घोड़ा
    • (B) गधा
    • (C) बैल
    • (D) हाथी
    उत्तर: (C) बैल
    व्याख्या: कूबड़ वाले बैल (Humped Bull) की आकृति वाली मुहरें सिंधु घाटी में बहुत आम थीं। मेसोपोटामिया के स्थलों से भी सिंधु घाटी की मुहरें प्राप्त हुई हैं, जो दोनों के बीच व्यापारिक संबंधों का पुख्ता प्रमाण हैं।

    20. चन्हूदड़ो के उत्खनन का निर्देशन किसने किया था?

    • (A) जे. एच. मैके ने
    • (B) सर जॉन मार्शल ने
    • (C) आर. ई. एम. व्हीलर ने
    • (D) सर ऑरेल स्टीन ने
    उत्तर: (A) जे. एच. मैके ने
    व्याख्या: चन्हूदड़ो (सिंध, पाकिस्तान) में उत्खनन कार्य 1935-36 में अर्नेस्ट जे. एच. मैके के निर्देशन में हुआ था। यह स्थल मनके बनाने के कारखाने के लिए प्रसिद्ध है।

    21. निम्नलिखित में से कौन-सा एक हड़प्पा स्थल नहीं है?

    • (A) चन्हूदड़ो
    • (B) कोट दीजी
    • (C) सोहगौरा
    • (D) देसलपुर
    उत्तर: (C) सोहगौरा
    व्याख्या: सोहगौरा (गोरखपुर, यू.पी.) एक मौर्यकालीन ताम्रपत्र अभिलेख के लिए प्रसिद्ध है, इसका संबंध हड़प्पा सभ्यता से नहीं है। चन्हूदड़ो, कोट दीजी और देसलपुर सभी हड़प्पा स्थल हैं।

    22. सिंधु घाटी के शहरों की गलियाँ कैसी थीं?

    • (A) चौड़ी और सीधी
    • (B) तंग और मैली
    • (C) फिसलन वाली
    • (D) तंग और टेढ़ी
    उत्तर: (A) चौड़ी और सीधी
    व्याख्या: सिंधु घाटी की नगर योजना में सड़कें चौड़ी होती थीं और एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जिसे ‘ग्रिड पैटर्न’ कहा जाता है।

    23. हड़प्पा के लोगों की सामाजिक पद्धति कैसी थी?

    • (A) उचित समतावादी
    • (B) दास-श्रमिक आधारित
    • (C) वर्ण आधारित
    • (D) जाति आधारित
    उत्तर: (A) उचित समतावादी
    व्याख्या: हालांकि समाज में वर्ग (जैसे- शासक, व्यापारी, श्रमिक) मौजूद थे, लेकिन वर्ण या जाति व्यवस्था जैसे कठोर सामाजिक विभाजन का कोई प्रमाण नहीं मिला है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसे काफी हद तक समतावादी माना जाता है।

    24. ‘सिंध का नखलिस्तान/बाग’ हड़प्पा सभ्यता के किस पुरास्थल को कहा गया है?

    • (A) हड़प्पा
    • (B) मोहनजोदड़ो
    • (C) कालीबंगा
    • (D) लोथल
    उत्तर: (B) मोहनजोदड़ो
    व्याख्या: मोहनजोदड़ो का सिंधी भाषा में अर्थ ‘मृतकों का टीला’ है। इसकी समृद्धि और हरे-भरे क्षेत्र के कारण इसे ‘सिंध का नखलिस्तान’ या ‘सिंध का बाग’ भी कहा जाता है।

    25. कौन-से नगर सिंधु सभ्यता के बन्दरगाह नगर थे?

    • (A) लोथल एवं सुत्कागेंडोर
    • (B) अल्लाहदीनो एवं बालाकोट
    • (C) कुनतासी
    • (D) इनमें से सभी
    उत्तर: (D) इनमें से सभी
    व्याख्या: लोथल (गुजरात), सुत्कागेंडोर (पाकिस्तान), अल्लाहदीनो (पाकिस्तान), बालाकोट (पाकिस्तान) और कुनतासी (गुजरात) सभी सिंधु घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण बंदरगाह नगर थे, जो व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

    26. किस हड़प्पाकालीन स्थल से प्राप्त जार पर चोंच में मछली दबाये चिड़िया एवं पेड़ के नीचे खड़ी लोमड़ी का चित्रांकन मिलता है, जो ‘पंचतंत्र’ की लोमड़ी की कहानी के सदृश है?

    • (A) हड़प्पा
    • (B) मोहनजोदड़ो
    • (C) लोथल
    • (D) रंगपुर
    उत्तर: (C) लोथल
    व्याख्या: गुजरात के लोथल से एक मृदभांड मिला है जिस पर चालाक लोमड़ी और कौए की प्रसिद्ध कहानी जैसा चित्रण है। यह सिंधु कला और कथात्मक चित्रण का एक अनूठा उदाहरण है।

    27. स्वातंत्र्योत्तर भारत में सबसे अधिक संख्या में हड़प्पायुगीन स्थलों की खोज किस प्रांत में हुई है?

    • (A) गुजरात
    • (B) राजस्थान
    • (C) पंजाब और हरियाणा
    • (D) उत्तर प्रदेश
    उत्तर: (A) गुजरात
    व्याख्या: स्वतंत्रता के बाद भारत में सबसे ज्यादा हड़प्पाकालीन स्थलों की खोज गुजरात राज्य में हुई है, जिनमें लोथल, धौलावीरा, सुरकोटदा, रंगपुर और रोजदी प्रमुख हैं।

    28. अफगानिस्तान स्थित सिंधु सभ्यता से संबंधित स्थल है?

    • (A) मुंडीगाक
    • (B) शोर्तुगोई
    • (C) (A) और (B) दोनों
    • (D) हड़प्पा
    उत्तर: (C) (A) और (B) दोनों
    व्याख्या: मुंडीगाक और शोर्तुगोई अफगानिस्तान में स्थित हड़प्पा सभ्यता से संबंधित व्यापारिक चौकियां थीं। शोर्तुगोई संभवतः लैपिस लाजुली (एक कीमती पत्थर) के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण था।

    29. हड़प्पाकालीन लोगों ने नगरों में घरों के विन्यास के लिए कौन-सी पद्धति अपनायी थी?

    • (A) कमल पुष्प की आकृति का
    • (B) गोलाकार आकृति में
    • (C) ग्रिड पद्धति में
    • (D) त्रिभुजाकार आकृति में
    उत्तर: (C) ग्रिड पद्धति में
    व्याख्या: हड़प्पा के शहरों में सड़कें और गलियां एक ग्रिड या जाल के पैटर्न में व्यवस्थित थीं, जो एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। यह एक उन्नत शहरी नियोजन को दर्शाता है।

    30. सिंधु घाटी सभ्यता जानी जाती है –

    • (A) अपने नगर नियोजन के लिए
    • (B) मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा के लिए
    • (C) अपने कृषि संबंधी कार्य के लिए
    • (D) उपरोक्त सभी के लिए
    उत्तर: (D) उपरोक्त सभी के लिए
    व्याख्या: सिंधु घाटी सभ्यता अपनी उत्कृष्ट नगर योजना, हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे बड़े शहरों, उन्नत कृषि (विशेषकर कपास) और व्यापार सहित कई विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है।

    31. हड़प्पा में एक उन्नत जल-प्रबंधन प्रणाली का पता चलता है-

    • (A) धौलावीरा में
    • (B) लोथल में
    • (C) कालीबंगन में
    • (D) आलमगीरपुर में
    उत्तर: (A) धौलावीरा में
    व्याख्या: धौलावीरा में चट्टानों को काटकर बनाए गए विशाल जलाशय मिले हैं, जो उस समय की असाधारण जल संचयन और प्रबंधन तकनीक को प्रदर्शित करते हैं।

    32. निम्नलिखित में से किस स्थान से युगल शवाधान (Double Burial) का प्रमाण मिला है?

    • (A) कुनतासी
    • (B) धौलावीरा
    • (C) लोथल
    • (D) कालीबंगन
    उत्तर: (C) लोथल
    व्याख्या: लोथल से तीन युगल समाधियों के साक्ष्य मिले हैं, जहाँ स्त्री और पुरुष को एक साथ दफनाया गया था। यह सती प्रथा की संभावना की ओर संकेत करता है, हालांकि यह सिद्ध नहीं है।

    33. किस पशु के अवशेष सिंधु घाटी सभ्यता में प्राप्त नहीं हुए हैं?

    • (A) शेर
    • (B) घोड़ा
    • (C) गाय
    • (D) हाथी
    उत्तर: (A) शेर
    व्याख्या: सिंधु घाटी की मुहरों या टेराकोटा कलाकृतियों में बाघ, हाथी, गैंडा और बैल का चित्रण तो मिलता है, लेकिन शेर का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है। घोड़े के अवशेष सुरकोटदा से मिले हैं, लेकिन वे दुर्लभ हैं।

    34. सिंधु सभ्यता की ईंटों का अलंकरण किस स्थान से मिला है?

    • (A) कालीबंगा
    • (B) चन्हूदड़ो
    • (C) मोहनजोदड़ो
    • (D) बनावली
    उत्तर: (A) कालीबंगा
    व्याख्या: कालीबंगा में फर्श के निर्माण में अलंकृत (डिजाइनदार) ईंटों का प्रयोग किया गया है। यह सिंधु सभ्यता में कलात्मक प्रवृत्ति का एक उदाहरण है।

    35. सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों का मुख्य व्यवसाय क्या था?

    • (A) व्यापार
    • (B) पशुपालन
    • (C) शिकार
    • (D) कृषि
    उत्तर: (A) व्यापार
    व्याख्या: यद्यपि कृषि अर्थव्यवस्था का आधार थी, लेकिन सिंधु सभ्यता की शहरी प्रकृति, मानकीकृत बाट-माप, बंदरगाह और मेसोपोटामिया के साथ संबंध यह दर्शाते हैं कि व्यापार उनका मुख्य और सबसे संगठित व्यवसाय था।

    36. मोहनजोदड़ो को किस एक अन्य नाम से भी जाना जाता है?

    • (A) जीवतों का टीला (Mound of Living)
    • (B) कंकालों का टीला (Mound of Skeletons)
    • (C) दासों का टीला (Mound of Slaves)
    • (D) मृतकों का टीला (Mound of Dead)
    उत्तर: (D) मृतकों का टीला (Mound of Dead)
    व्याख्या: ‘मोहनजोदड़ो’ सिंधी भाषा का शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘मृतकों का टीला’ होता है।

    37. भारत में खोजा गया सबसे पहला पुराना शहर कौन-सा था?

    • (A) हड़प्पा
    • (B) पंजाब
    • (C) मोहनजोदड़ो
    • (D) सिंध
    उत्तर: (A) हड़प्पा
    व्याख्या: सिंधु घाटी सभ्यता में खोजा गया सबसे पहला स्थल हड़प्पा (1921 में) था। इसी कारण इस पूरी सभ्यता को ‘हड़प्पा सभ्यता’ भी कहा जाता है। यद्यपि वर्तमान में हड़प्पा पाकिस्तान में है।

    38. बनावली, एक प्रमुख हड़प्पा स्थल, भारत के किस राज्य में स्थित है?

    • (A) हरियाणा
    • (B) गुजरात
    • (C) राजस्थान
    • (D) पंजाब
    उत्तर: (A) हरियाणा
    व्याख्या: बनावली हरियाणा के फतेहाबाद जिले में स्थित है। यहाँ से मिट्टी का बना हल (खिलौना) और उन्नत किस्म के जौ के साक्ष्य मिले हैं।

    39. सिंधु घाटी के लोग किस धातु से अपरिचित थे?

    • (A) तांबा
    • (B) कांसा
    • (C) सोना
    • (D) लोहा
    उत्तर: (D) लोहा
    व्याख्या: सिंधु घाटी सभ्यता एक कांस्य-युगीन सभ्यता थी। वे तांबा, कांसा, सोना और चांदी से परिचित थे, लेकिन लोहे का ज्ञान उन्हें नहीं था। भारत में लोहे का प्रयोग उत्तर-वैदिक काल (लगभग 1000 ई.पू.) में शुरू हुआ।

    40. ‘विशाल स्नानागार’ (Great Bath) कहाँ मिला था?

    • (A) हड़प्पा
    • (B) लोथल
    • (C) चन्हूदड़ो
    • (D) मोहनजोदड़ो
    उत्तर: (D) मोहनजोदड़ो
    व्याख्या: विशाल स्नानागार मोहनजोदड़ो के दुर्ग टीले पर स्थित एक प्रमुख संरचना है। इसका उपयोग संभवतः सार्वजनिक रूप से धार्मिक स्नान के लिए किया जाता था।

    41. हड़प्पा सभ्यता के संपूर्ण क्षेत्र का आकार किस प्रकार का था?

    • (A) वर्गाकार
    • (B) आयताकार
    • (C) त्रिभुजाकार
    • (D) गोलाकार
    उत्तर: (C) त्रिभुजाकार
    व्याख्या: यदि इसके चारों छोरों (मांडा, आलमगीरपुर, दैमाबाद, सुत्कागेंडोर) को मिलाया जाए, तो इस सभ्यता का भौगोलिक विस्तार लगभग एक त्रिभुज का आकार लेता है।

    42. सिंधु लिपि को लिखने की शैली क्या कहलाती है?

    • (A) पेट्रोग्लिफ
    • (B) यूनिफॉर्म
    • (C) बूस्ट्रोफेडन
    • (D) हायराटिक
    उत्तर: (C) बूस्ट्रोफेडन
    व्याख्या: बूस्ट्रोफेडन (Boustrophedon) एक लेखन शैली है जिसमें पंक्तियाँ बारी-बारी से दिशा बदलती हैं, जैसे पहली पंक्ति दाएं से बाएं, तो दूसरी बाएं से दाएं। सिंधु लिपि को इसी शैली में लिखा हुआ माना जाता है।

    43. सिंधु सभ्यता के घर किससे बनाए जाते थे?

    • (A) ईंट से
    • (B) बांस से
    • (C) पत्थर से
    • (D) लकड़ी से
    उत्तर: (A) ईंट से
    व्याख्या: सिंधु सभ्यता में घर बनाने के लिए मुख्य रूप से पक्की ईंटों का प्रयोग होता था। पत्थरों का उपयोग नींव या नालियों में होता था, लेकिन दीवारें ईंटों की ही थीं।

    44. राखीगढ़ी, भारत का सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल, कहाँ स्थित है?

    • (A) गुजरात
    • (B) हरियाणा
    • (C) राजस्थान
    • (D) उत्तर प्रदेश
    उत्तर: (B) हरियाणा
    व्याख्या: राखीगढ़ी हरियाणा के हिसार जिले में स्थित है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह भारत में स्थित सबसे बड़ा और समग्र रूप से मोहनजोदड़ो के बाद दूसरा सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल है।

    45. आग में पकी हुई मिट्टी को क्या कहा जाता है?

    • (A) सेलखड़ी
    • (B) बिसाल्ट
    • (C) टेराकोटा
    • (D) बलुआ पत्थर
    उत्तर: (C) टेराकोटा
    व्याख्या: आग में पकाई गई मिट्टी को टेराकोटा कहते हैं। हड़प्पा सभ्यता में टेराकोटा का उपयोग मूर्तियाँ, खिलौने, मुहरें और बर्तन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता था।

    46. हड़प्पावासी किन धातुओं का आयात करते थे? (I) चांदी (II) टिन (III) सोना

    • (A) केवल I
    • (B) I और II
    • (C) केवल III
    • (D) I, II और III
    उत्तर: (D) I, II और III
    व्याख्या: हड़प्पावासी सोना कर्नाटक के कोलार और अफगानिस्तान से, चांदी अफगानिस्तान और ईरान से, तथा टिन अफगानिस्तान और मध्य एशिया से आयात करते थे। तांबे का आयात राजस्थान की खेतड़ी खानों से होता था।

    47. हड़प्पा सभ्यता में पवित्र पशु कौन था?

    • (A) गाय
    • (B) हाथी
    • (C) कूबड़ वाला बैल
    • (D) गैंडा
    उत्तर: (C) कूबड़ वाला बैल
    व्याख्या: कूबड़ वाला बैल या वृषभ हड़प्पा मुहरों पर सबसे अधिक चित्रित पशु है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता था। इसकी पूजा शक्ति के प्रतीक के रूप में की जाती थी।

    48. सिंधु घाटी में तौल की इकाई किस अनुपात में थी?

    • (A) 10 के अनुपात में
    • (B) 12 के अनुपात में
    • (C) 16 के अनुपात में
    • (D) 8 के अनुपात में
    उत्तर: (C) 16 के अनुपात में
    व्याख्या: सिंधु घाटी में बाट और माप की एक मानकीकृत प्रणाली थी, जिसमें 16 या उसके गुणकों (जैसे 16, 32, 64, 160, 320) का उपयोग होता था।

    49. सिंधु सभ्यता के पतन का सबसे प्रबल कारण किसे माना जाता है?

    • (A) आर्यों का आक्रमण
    • (B) प्रशासनिक शिथिलता
    • (C) बाढ़ एवं जलवायु परिवर्तन
    • (D) व्यापार में गिरावट
    उत्तर: (C) बाढ़ एवं जलवायु परिवर्तन
    व्याख्या: यद्यपि पतन के कई कारण माने जाते हैं, लेकिन अधिकांश विद्वान पारिस्थितिक असंतुलन, जैसे कि बार-बार आने वाली बाढ़ और जलवायु परिवर्तन (जिससे सरस्वती जैसी नदियाँ सूख गईं) को सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक कारण मानते हैं।

    50. हड़प्पा स्थल ‘मांडा’ किस नदी के किनारे स्थित था?

    • (A) रावी
    • (B) सिंधु
    • (C) सतलुज
    • (D) चेनाब
    उत्तर: (D) चेनाब
    व्याख्या: मांडा, जो सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे उत्तरी स्थल है, जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी के दाहिने तट पर स्थित है।
  • पाषाण काल (Stone Age) – Notes & MCQs

    पाषाण काल (Stone Age) – Notes & MCQs for UPSC, SSC, Railway

    पाषाण काल (Stone Age)

    UPSC, SSC, Railway और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण नोट्स और प्रश्न

    पाषाण काल: एक अवलोकन

    मानव सभ्यता के उस काल को पाषाण काल कहा जाता है, जब मनुष्य का जीवन पत्थरों पर अत्यधिक आश्रित था। इस काल में मनुष्य पत्थर के औजारों का उपयोग शिकार करने, अपनी रक्षा करने और कंद-मूल खोदने के लिए करता था। अध्ययन की सुविधा के लिए, पाषाण काल को तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है:

    1. पुरापाषाण काल (Paleolithic Age) – (लगभग 25 लाख ई.पू. से 10,000 ई.पू.)

    यह पाषाण काल का सबसे लंबा चरण था। इस काल में मानव ‘शिकारी और खाद्य-संग्राहक’ (Hunter-Gatherer) था।

    • जीवन शैली: मनुष्य खानाबदोश जीवन व्यतीत करता था और भोजन की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमता रहता था। वे गुफाओं और चट्टानी आश्रयों में रहते थे।
    • औजार: बड़े और अपरिष्कृत पत्थर के औजारों का उपयोग होता था, जैसे – हस्तकुठार (Hand-axe), विदारणी (Cleaver), और खंडक (Chopper)। ये औजार क्वार्टजाइट पत्थर से बने होते थे।
    • अग्नि का ज्ञान: इस काल के अंत तक मनुष्य ने आग जलाना सीख लिया था, लेकिन इसका उपयोग सीमित था।
    • प्रमुख स्थल: भीमबेटका (मध्य प्रदेश), सोहन घाटी (पाकिस्तान), बेलन घाटी (उत्तर प्रदेश), कुरनूल गुफाएं (आंध्र प्रदेश)।

    2. मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age) – (लगभग 10,000 ई.पू. से 6,000 ई.पू.)

    यह पुरापाषाण और नवपाषाण काल के बीच का संक्रमण काल था। इस दौरान जलवायु गर्म और शुष्क हो गई।

    • जीवन शैली: शिकार और खाद्य-संग्रह जारी रहा, लेकिन पशुपालन की शुरुआत भी हो गई। आदमगढ़ (म.प्र.) और बागोर (राजस्थान) से पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं।
    • औजार (माइक्रोलिथ): इस काल के औजार बहुत छोटे होते थे, जिन्हें ‘सूक्ष्मपाषाण’ या ‘माइक्रोलिथ’ (Microliths) कहा जाता है। ये औजार हड्डी या लकड़ी के हत्थों में लगे होते थे।
    • कला: चट्टानों पर चित्रकारी (Rock Art) का विकास हुआ। भीमबेटका की गुफाओं में इस काल के कई चित्र मिलते हैं, जिनमें शिकार, नृत्य और युद्ध के दृश्य हैं।
    • प्रमुख स्थल: बागोर (राजस्थान), आदमगढ़ (मध्य प्रदेश), लंघनाज (गुजरात), सराय नाहर राय (उत्तर प्रदेश)।

    3. नवपाषाण काल (Neolithic Age) – (लगभग 6,000 ई.पू. से 1,000 ई.पू.)

    इस काल को ‘नवपाषाण क्रांति’ भी कहा जाता है क्योंकि मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए।

    • कृषि की शुरुआत: मनुष्य ने फसल उगाना सीख लिया, जिससे वह ‘खाद्य-उत्पादक’ (Food Producer) बन गया। जौ और गेहूँ पहली उगाई गई फसलों में से थीं।
    • स्थायी जीवन: कृषि के कारण मनुष्य ने स्थायी रूप से बसना शुरू कर दिया और गाँवों का विकास हुआ।
    • पहिए का आविष्कार: इस काल की एक महत्वपूर्ण खोज पहिया थी, जिसने परिवहन और मिट्टी के बर्तन बनाने में क्रांति ला दी।
    • औजार: औजारों को पॉलिश किया जाने लगा, जिससे वे अधिक चिकने और प्रभावी हो गए।
    • मृदभांड (Pottery): मिट्टी के बर्तन बनाने की कला का विकास हुआ, जिनका उपयोग अनाज के भंडारण और खाना पकाने के लिए किया जाता था।
    • प्रमुख स्थल: मेहरगढ़ (पाकिस्तान, कृषि का प्राचीनतम साक्ष्य), बुर्जहोम (कश्मीर, गर्तावास/गड्ढों के घर), गुफकराल (कश्मीर), चिरांद (बिहार, हड्डी के औजार), कोल्डिहवा (उत्तर प्रदेश, चावल का प्राचीनतम साक्ष्य)।

    अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न (MCQs)

    1. ‘माइक्रोलिथ’ (Microlith) नामक पत्थर के औजार किस काल से संबंधित हैं?

    A) पुरापाषाण काल

    B) मध्यपाषाण काल

    C) नवपाषाण काल

    D) ताम्रपाषाण काल

    उत्तर: B) मध्यपाषाण काल

    व्याख्या: मध्यपाषाण काल में जलवायु परिवर्तन के कारण छोटे जानवरों का शिकार करने के लिए छोटे, नुकीले और कुशल औजारों की आवश्यकता हुई। इन छोटे पत्थर के औजारों को ‘माइक्रोलिथ’ कहा जाता है।

    2. निम्नलिखित में से किस स्थल पर कृषि के प्राचीनतम साक्ष्य मिले हैं?

    A) बुर्जहोम

    B) चिरांद

    C) मेहरगढ़

    D) भीमबेटका

    उत्तर: C) मेहरगढ़

    व्याख्या: मेहरगढ़ (वर्तमान बलूचिस्तान, पाकिस्तान) में लगभग 7000 ई.पू. में गेहूँ और जौ की खेती के साक्ष्य मिले हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि के सबसे पुराने प्रमाण हैं।

    3. भीमबेटका की गुफाएं किस लिए प्रसिद्ध हैं?

    A) बौद्ध मूर्तियों के लिए

    B) खनिज भंडार के लिए

    C) शैलचित्रों (Rock Paintings) के लिए

    D) प्राचीन मंदिरों के लिए

    उत्तर: C) शैलचित्रों (Rock Paintings) के लिए

    व्याख्या: मध्य प्रदेश में स्थित भीमबेटका की गुफाएं पुरापाषाण और मध्यपाषाण काल के शैलचित्रों के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। इन चित्रों में शिकार, नृत्य, और सामूहिक जीवन के दृश्य दिखाए गए हैं।

    4. ‘गर्त-आवास’ (Pit-dwelling) के साक्ष्य कहाँ से प्राप्त हुए हैं?

    A) मेहरगढ़

    B) बुर्जहोम

    C) कोल्डिहवा

    D) ब्रह्मगिरि

    उत्तर: B) बुर्जहोम

    व्याख्या: जम्मू और कश्मीर में स्थित नवपाषाण कालीन स्थल बुर्जहोम में लोग गड्ढे खोदकर घर बनाते थे, जिन्हें ‘गर्त-आवास’ कहा जाता है। इनमें उतरने के लिए सीढ़ियां होती थीं।

    5. मानव द्वारा प्रयोग की जाने वाली पहली धातु कौन सी थी?

    A) लोहा

    B) सोना

    C) तांबा

    D) कांसा

    उत्तर: C) तांबा

    व्याख्या: नवपाषाण काल के अंत में मनुष्य ने सबसे पहले तांबे का उपयोग करना सीखा। जिस काल में पत्थर और तांबे दोनों का प्रयोग हुआ, उसे ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic Age) कहते हैं।

    6. भारतीय उपमहाद्वीप में चावल की खेती का प्राचीनतम साक्ष्य किस पुरातात्विक स्थल से प्राप्त हुआ है?

    A) मेहरगढ़

    B) चिरांद

    C) कोल्डिहवा

    D) बागोर

    उत्तर: C) कोल्डिहवा

    व्याख्या: उत्तर प्रदेश के बेलन घाटी में स्थित कोल्डिहवा से लगभग 6000 ई.पू. के चावल के दाने मिले हैं, जिन्हें दुनिया में चावल की खेती का सबसे पुराना प्रमाण माना जाता है।

    7. ‘राख के टीले’ (Ash Mounds) किस नवपाषाण कालीन स्थल से संबंधित हैं?

    A) बुर्जहोम

    B) संगनकल्लू

    C) कोल्डिहवा

    D) ब्रह्मगिरि

    उत्तर: B) संगनकल्लू

    व्याख्या: दक्षिण भारत के नवपाषाण स्थलों जैसे संगनकल्लू, पिक्लीहल और उतनूर से राख के टीले मिले हैं। ये टीले संभवतः मौसमी शिविरों में मवेशियों के गोबर को जलाने से बने थे।

    8. मनुष्य ने किस काल में स्थायी रूप से बसना प्रारंभ किया?

    A) पुरापाषाण काल

    B) मध्यपाषाण काल

    C) नवपाषाण काल

    D) लौह युग

    उत्तर: C) नवपाषाण काल

    व्याख्या: कृषि की शुरुआत के कारण नवपाषाण काल में मनुष्य को अपनी फसलों की देखभाल के लिए एक ही स्थान पर रुकना पड़ा। इसी कारण स्थायी बस्तियों और गाँवों का विकास हुआ।

    9. भारत में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य कहाँ से मिले हैं?

    A) आदमगढ़ और बागोर

    B) बुर्जहोम और गुफकराल

    C) मेहरगढ़ और कोल्डिहवा

    D) चिरांद और सराय नाहर राय

    उत्तर: A) आदमगढ़ और बागोर

    व्याख्या: मध्यपाषाण काल के दो प्रमुख स्थल, आदमगढ़ (मध्य प्रदेश) और बागोर (राजस्थान) से पशुपालन के शुरुआती साक्ष्य मिले हैं, जो लगभग 5000 ई.पू. के हैं।

    10. किस स्थल पर मानव कंकाल के साथ कुत्ते को दफनाने के साक्ष्य मिले हैं?

    A) चिरांद

    B) मेहरगढ़

    C) गुफकराल

    D) बुर्जहोम

    उत्तर: D) बुर्जहोम

    व्याख्या: कश्मीर के नवपाषाण स्थल बुर्जहोम में कब्रों में मालिकों के साथ उनके पालतू कुत्तों को भी दफनाया जाता था। यह प्रथा उस समय के मानव-पशु संबंध को दर्शाती है।

    11. पहिए का आविष्कार किस काल में हुआ?

    A) पुरापाषाण काल

    B) मध्यपाषाण काल

    C) नवपाषाण काल

    D) लौह युग

    उत्तर: C) नवपाषाण काल

    व्याख्या: पहिए का आविष्कार नवपाषाण काल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। इसने परिवहन (गाड़ियों) और कुम्हारी (चाक) में क्रांति ला दी, जिससे मानव जीवन और अधिक सुगम हो गया।

    12. बिहार में स्थित कौन सा पुरास्थल हड्डी के औजारों के लिए जाना जाता है?

    A) सारण

    B) चिरांद

    C) वैशाली

    D) पटना

    उत्तर: B) चिरांद

    व्याख्या: चिरांद (सारण जिला, बिहार) एक प्रमुख नवपाषाण कालीन स्थल है, जहाँ से बड़ी मात्रा में हिरण के सींगों से बने हड्डी के औजार और उपकरण प्राप्त हुए हैं।

    13. रॉबर्ट ब्रूस फूट, जिन्होंने भारत में पहले पुरापाषाण कालीन उपकरण की खोज की, वे मूल रूप से क्या थे?

    A) एक पुरातत्ववेत्ता

    B) एक भूविज्ञानी

    C) एक इतिहासकार

    D) एक वनस्पतिशास्त्री

    उत्तर: B) एक भूविज्ञानी

    व्याख्या: रॉबर्ट ब्रूस फूट एक ब्रिटिश भूविज्ञानी और पुरातत्ववेत्ता थे। 1863 में, उन्होंने पल्लवरम (चेन्नई के पास) से पहले पुरापाषाण कालीन उपकरण (हस्तकुठार) की खोज की, जिससे भारत में प्रागैतिहासिक अध्ययन की शुरुआत हुई।

    14. पुरापाषाण काल के मनुष्य मुख्य रूप से किस पर निर्भर थे?

    A) कृषि

    B) पशुपालन

    C) शिकार और खाद्य संग्रह

    D) व्यापार

    उत्तर: C) शिकार और खाद्य संग्रह

    व्याख्या: पुरापाषाण काल के मानव की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से शिकार (जानवरों का) और खाद्य संग्रह (जंगली पौधों, फलों, कंद-मूल) पर आधारित थी। वे खाद्य-उत्पादक नहीं थे।

    15. भारत में मानव का सर्वप्रथम साक्ष्य कहाँ मिलता है?

    A) नीलगिरि पहाड़ियाँ

    B) शिवालिक पहाड़ियाँ

    C) नर्मदा घाटी

    D) नल्लामाला पहाड़ियाँ

    उत्तर: C) नर्मदा घाटी

    व्याख्या: भारत में मानव का सबसे पहला प्रमाण मध्य प्रदेश के पश्चिमी नर्मदा क्षेत्र में स्थित हथनोरा नामक स्थल से मिला है। यहाँ से एक मानव खोपड़ी (होमो इरेक्टस) का जीवाश्म प्राप्त हुआ है।

    16. ‘तीन युग प्रणाली’ (पाषाण, कांस्य और लौह) का विभाजन किसने किया था?

    A) थॉमसन

    B) जॉन मार्शल

    C) रॉबर्ट ब्रूस फूट

    D) अलेक्जेंडर कनिंघम

    उत्तर: A) थॉमसन

    व्याख्या: डेनमार्क के पुरातत्ववेत्ता क्रिश्चियन जर्गेनसेन थॉमसन ने 1820 में कोपेनहेगन संग्रहालय की वस्तुओं के आधार पर प्रागैतिहासिक काल को पाषाण युग, कांस्य युग और लौह युग में विभाजित किया था।

    17. किस काल के औजारों को बनाने के लिए क्वार्टजाइट पत्थर का उपयोग किया जाता था?

    A) पुरापाषाण काल

    B) मध्यपाषाण काल

    C) नवपाषाण काल

    D) ताम्रपाषाण काल

    उत्तर: A) पुरापाषाण काल

    व्याख्या: पुरापाषाण काल में औजार बनाने के लिए मुख्य रूप से कठोर पत्थर ‘क्वार्टजाइट’ का उपयोग किया जाता था। इसी कारण पुरापाषाण काल के मानव को ‘क्वार्टजाइट मैन’ भी कहा जाता है।

    18. निम्नलिखित में से कौन सा नवपाषाण कालीन स्थल नहीं है?

    A) संगनकल्लू

    B) बुर्जहोम

    C) बागोर

    D) पिक्लीहल

    उत्तर: C) बागोर

    व्याख्या: बागोर (राजस्थान) एक प्रमुख मध्यपाषाण कालीन स्थल है, जहाँ से माइक्रोलिथ और पशुपालन के साक्ष्य मिले हैं। संगनकल्लू, बुर्जहोम और पिक्लीहल प्रसिद्ध नवपाषाण कालीन स्थल हैं।

    19. मानव ने आग का उपयोग करना किस काल में सीखा?

    A) निम्न पुरापाषाण काल

    B) मध्य पुरापाषाण काल

    C) उच्च पुरापाषाण काल

    D) नवपाषाण काल

    उत्तर: A) निम्न पुरापाषाण काल

    व्याख्या: मानव ने आग की खोज निम्न पुरापाषाण काल में ही कर ली थी, लेकिन इसका व्यवस्थित और व्यापक उपयोग करना नवपाषाण काल में सीखा। आग का उपयोग ठंड से बचने, जंगली जानवरों को डराने और भोजन पकाने के लिए किया जाने लगा।

    20. मृदभांड (Pottery) का निर्माण सबसे पहले किस काल में शुरू हुआ?

    A) पुरापाषाण काल

    B) मध्यपाषाण काल

    C) नवपाषाण काल

    D) लौह युग

    उत्तर: C) नवपाषाण काल

    व्याख्या: नवपाषाण काल में जब मनुष्य ने अनाज का उत्पादन शुरू किया, तो उसे संग्रहीत करने और पकाने के लिए बर्तनों की आवश्यकता हुई। इसी आवश्यकता ने मिट्टी के बर्तन (मृदभांड) के निर्माण को जन्म दिया।

    21. ‘होमो सेपियंस’ (आधुनिक मानव) का उदय किस काल में हुआ?

    A) निम्न पुरापाषाण काल

    B) मध्य पुरापाषाण काल

    C) उच्च पुरापाषाण काल

    D) मध्यपाषाण काल

    उत्तर: C) उच्च पुरापाषाण काल

    व्याख्या: उच्च पुरापाषाण काल (Upper Palaeolithic Age) के अंत तक होमो सेपियंस यानी आधुनिक प्रारूप के मानव का उदय हुआ। इस काल में नए चकमक उद्योग और हड्डी के उपकरणों का विकास भी हुआ।

    22. दक्षिण भारत में नवपाषाण संस्कृति का मुख्य स्थल कौन सा है?

    A) ब्रह्मगिरि

    B) आदमगढ़

    C) चिरांद

    D) मेहरगढ़

    उत्तर: A) ब्रह्मगिरि

    व्याख्या: ब्रह्मगिरि (कर्नाटक) दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण नवपाषाण कालीन स्थल है। इसके अलावा पिक्लीहल, संगनकल्लू, मस्की और हल्लूर भी प्रमुख दक्षिण भारतीय नवपाषाण स्थल हैं।

    23. पाषाण युग के लोगों का मुख्य व्यवसाय क्या था?

    A) कृषि

    B) शिकार

    C) मछली पकड़ना

    D) व्यापार

    उत्तर: B) शिकार

    व्याख्या: यद्यपि पाषाण युग में समय के साथ विकास हुआ, लेकिन शिकार हमेशा एक केंद्रीय गतिविधि बनी रही। पुरापाषाण और मध्यपाषाण काल में यह मुख्य व्यवसाय था, और नवपाषाण काल में कृषि के साथ-साथ जारी रहा।

    24. सराय नाहर राय और महदहा संबंधित हैं:

    A) विंध्य क्षेत्र के नवपाषाण संस्कृति से

    B) गंगा घाटी की मध्यपाषाण संस्कृति से

    C) दक्षिण भारत की पुरापाषाण संस्कृति से

    D) कश्मीर की नवपाषाण संस्कृति से

    उत्तर: B) गंगा घाटी की मध्यपाषाण संस्कृति से

    व्याख्या: सराय नाहर राय और महदहा (दोनों उत्तर प्रदेश में) गंगा घाटी के महत्वपूर्ण मध्यपाषाण कालीन स्थल हैं। यहाँ से स्तंभ गर्त, चूल्हे और बड़ी संख्या में मानव कंकाल मिले हैं।

    25. ‘नवपाषाण क्रांति’ (Neolithic Revolution) शब्द का प्रयोग सबसे पहले किसने किया?

    A) रॉबर्ट ब्रूस फूट

    B) सर जॉन लुबॉक

    C) गॉर्डन चाइल्ड

    D) मॉर्टिमर व्हीलर

    उत्तर: C) गॉर्डन चाइल्ड

    व्याख्या: प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता वी. गॉर्डन चाइल्ड ने अपनी पुस्तक “Man Makes Himself” (1936) में नवपाषाण काल में कृषि की शुरुआत और स्थायी जीवन के कारण हुए क्रांतिकारी परिवर्तनों को ‘नवपाषाण क्रांति’ का नाम दिया।

    26. बेलन घाटी किस राज्य में स्थित है, जहाँ पाषाण काल के तीनों चरणों के साक्ष्य मिले हैं?

    A) मध्य प्रदेश

    B) राजस्थान

    C) बिहार

    D) उत्तर प्रदेश

    उत्तर: D) उत्तर प्रदेश

    व्याख्या: बेलन घाटी (इलाहाबाद के पास, उत्तर प्रदेश) एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है क्योंकि यहाँ से पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण काल के अनुक्रमिक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

    27. पॉलिशदार पत्थर के औजार किस काल की विशेषता थे?

    A) पुरापाषाण काल

    B) मध्यपाषाण काल

    C) नवपाषाण काल

    D) ताम्रपाषाण काल

    उत्तर: C) नवपाषाण काल

    व्याख्या: नवपाषाण काल में औजारों को घिसकर और पॉलिश करके अधिक चिकना और धारदार बनाया जाता था। यह तकनीक पुरापाषाण काल के खुरदुरे औजारों से एक महत्वपूर्ण सुधार थी।

    28. गुफकराल का क्या अर्थ है?

    A) कुम्हार की गुफा

    B) राजा की गुफा

    C) सफेद गुफा

    D) पवित्र गुफा

    उत्तर: A) कुम्हार की गुफा

    व्याख्या: गुफकराल, कश्मीर में स्थित एक नवपाषाण कालीन स्थल है। स्थानीय भाषा में ‘गुफकराल’ का अर्थ ‘कुम्हार की गुफा’ होता है। यहाँ से कृषि, पशुपालन और हड्डी के औजारों के साक्ष्य मिले हैं।

    29. मध्यपाषाण काल के संदर्भ में, निम्नलिखित में से क्या सही है?

    A) बड़े पत्थर के औजारों का उपयोग

    B) कृषि का व्यापक प्रचलन

    C) पशुपालन की शुरुआत

    D) स्थायी ग्रामीण जीवन

    उत्तर: C) पशुपालन की शुरुआत

    व्याख्या: मध्यपाषाण काल एक संक्रमण काल था जिसमें शिकार और संग्रह के साथ-साथ पशुपालन की भी शुरुआत हुई। आदमगढ़ और बागोर से इसके प्रारंभिक साक्ष्य मिलते हैं। कृषि और स्थायी जीवन नवपाषाण काल की विशेषताएं हैं।

    30. निम्नलिखित में से कौन सा स्थल अपनी सोहन संस्कृति (Soanian culture) के लिए जाना जाता है?

    A) बेलन घाटी

    B) नर्मदा घाटी

    C) सोहन घाटी

    D) कृष्णा घाटी

    उत्तर: C) सोहन घाटी

    व्याख्या: सोहन घाटी (अब पाकिस्तान में) निम्न पुरापाषाण काल की ‘सोहन संस्कृति’ के लिए प्रसिद्ध है। इस संस्कृति की विशेषता चौपर-चॉपिंग (Chopper-Chopping) उपकरण परंपरा है।

    31. प्रागैतिहासिक काल के अध्ययन को क्या कहा जाता है?

    A) इतिहास

    B) पुरातत्व

    C) मुद्राशास्त्र

    D) पुरालेखशास्त्र

    उत्तर: B) पुरातत्व

    व्याख्या: पुरातत्व (Archaeology) वह विज्ञान है जो भौतिक अवशेषों (जैसे औजार, बर्तन, जीवाश्म) के आधार पर मानव के अतीत का अध्ययन करता है। प्रागैतिहासिक काल का कोई लिखित रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए इसका अध्ययन पूरी तरह से पुरातत्व पर निर्भर है।

    32. किस युग को ‘चाल्कोलिथिक युग’ (Chalcolithic Age) भी कहा जाता है?

    A) पुरापाषाण युग

    B) मध्यपाषाण युग

    C) नवपाषाण युग

    D) ताम्रपाषाण युग

    उत्तर: D) ताम्रपाषाण युग

    व्याख्या: ‘चाल्को’ (Chalco) का अर्थ तांबा और ‘लिथिक’ (lithic) का अर्थ पत्थर होता है। इसलिए, ताम्रपाषाण युग को चाल्कोलिथिक युग भी कहा जाता है, क्योंकि इस अवधि में पत्थर और तांबे दोनों का एक साथ उपयोग किया गया था।

    33. शुतुरमुर्ग के अंडे के छिलकों पर चित्रकारी के साक्ष्य कहाँ से मिले हैं?

    A) पाटणे

    B) भीमबेटका

    C) आदमगढ़

    D) बागोर

    उत्तर: A) पाटणे

    व्याख्या: महाराष्ट्र के पाटणे नामक पुरापाषाण कालीन स्थल से शुतुरमुर्ग के अंडे के छिलके मिले हैं, जिनमें से कुछ पर चित्रकारी की गई थी और कुछ से मनके बनाए गए थे। यह उच्च पुरापाषाण काल से संबंधित है।

    34. निम्नलिखित में से कौन सा उपकरण पुरापाषाण काल से संबंधित नहीं है?

    A) हस्तकुठार (Hand-axe)

    B) विदारणी (Cleaver)

    C) सेल्ट (Celt)

    D) खंडक (Chopper)

    उत्तर: C) सेल्ट (Celt)

    व्याख्या: सेल्ट (एक प्रकार की पॉलिश की हुई कुल्हाड़ी) नवपाषाण काल का एक विशिष्ट उपकरण है। हस्तकुठार, विदारणी और खंडक पुरापाषाण काल के विशिष्ट उपकरण हैं।

    35. मानव द्वारा पाला गया पहला जानवर कौन सा था?

    A) भेड़

    B) बकरी

    C) कुत्ता

    D) घोड़ा

    उत्तर: C) कुत्ता

    व्याख्या: माना जाता है कि कुत्ते (भेड़िये का एक जंगली पूर्वज) मानव द्वारा पालतू बनाया गया पहला जानवर था। यह प्रक्रिया मध्यपाषाण काल में शुरू हुई और शिकार में सहायता के लिए इसका उपयोग किया गया।

    36. लंघनाज किस राज्य में स्थित एक प्रमुख मध्यपाषाण स्थल है?

    A) राजस्थान

    B) गुजरात

    C) मध्य प्रदेश

    D) उत्तर प्रदेश

    उत्तर: B) गुजरात

    व्याख्या: लंघनाज गुजरात का एक महत्वपूर्ण मध्यपाषाण कालीन स्थल है। यहां से माइक्रोलिथ, पशुओं की हड्डियां और 14 मानव कंकाल मिले हैं।

    37. किस क्षेत्र को ‘भारतीय प्रागैतिहासिक का टेक्स्ट-बुक’ कहा जाता है?

    A) सोहन घाटी

    B) बेलन घाटी

    C) नर्मदा घाटी

    D) भीमबेटका

    उत्तर: B) बेलन घाटी

    व्याख्या: बेलन घाटी को यह उपाधि इसलिए दी जाती है क्योंकि यहां पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण काल का एक स्पष्ट और निरंतर अनुक्रम मिलता है, जो प्रागैतिहासिक अध्ययन के लिए एक आदर्श स्थल है।

    38. होमो इरेक्टस की खोपड़ी निम्नलिखित में से किस स्थान पर पाई गई थी?

    A) हथनोरा

    B) पल्लवरम

    C) बागोर

    D) बुर्जहोम

    उत्तर: A) हथनोरा

    व्याख्या: मध्य प्रदेश की नर्मदा घाटी में स्थित हथनोरा में, पुरातत्वविद् अरुण सोनकिया ने 1982 में एक होमो इरेक्टस (या आर्कैक होमो सेपियंस) की खोपड़ी का जीवाश्म खोजा था, जो भारत में पाया गया सबसे पुराना मानव जीवाश्म है।

    39. मध्यपाषाण काल में प्रयुक्त होने वाले औजार बहुत छोटे थे, इसलिए उन्हें ___ कहा जाता था।

    A) मेगालिथ

    B) सेल्ट

    C) माइक्रोलिथ

    D) बोल्डेर्स

    उत्तर: C) माइक्रोलिथ

    व्याख्या: ‘माइक्रो’ का अर्थ है छोटा और ‘लिथ’ का अर्थ है पत्थर। मध्यपाषाण काल के छोटे पत्थर के औजारों को उनकी आकार के कारण माइक्रोलिथ (सूक्ष्मपाषाण) कहा जाता था।

    40. जोरवे संस्कृति (Jorwe Culture) किस काल से संबंधित एक प्रसिद्ध संस्कृति थी?

    A) पुरापाषाण काल

    B) नवपाषाण काल

    C) ताम्रपाषाण काल

    D) लौह युग

    उत्तर: C) ताम्रपाषाण काल

    व्याख्या: जोरवे संस्कृति महाराष्ट्र की एक प्रमुख ताम्रपाषाणिक संस्कृति थी, जो लगभग 1400-700 ई.पू. तक विकसित हुई। इसके प्रमुख स्थल दैमाबाद, इनामगांव और जोरवे हैं।

    41. निम्नलिखित में से किस स्थल से बड़ी संख्या में मध्यपाषाण कालीन शैलचित्र प्राप्त हुए हैं?

    A) मेहरगढ़

    B) चिरांद

    C) भीमबेटका

    D) कोल्डिहवा

    उत्तर: C) भीमबेटका

    व्याख्या: भीमबेटका (मध्य प्रदेश) भारत में प्रागैतिहासिक शैल कला का सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध स्थल है। यहाँ पुरापाषाण काल से लेकर मध्यपाषाण काल तक के चित्र मिलते हैं, जो उस समय के जीवन को दर्शाते हैं।

    42. ‘नवदाटोली’ का उत्खनन किसने किया था?

    A) के. डी. बाजपेयी

    B) वी. एस. वाकणकर

    C) एच. डी. सांकलिया

    D) मॉर्टिमर व्हीलर

    उत्तर: C) एच. डी. सांकलिया

    व्याख्या: नवदाटोली (मध्य प्रदेश) एक प्रमुख ताम्रपाषाणिक स्थल है। इसका उत्खनन डेक्कन कॉलेज, पुणे के प्रोफेसर एच. डी. सांकलिया ने करवाया था।

    43. प्रारंभिक पूर्ण मानव को किस नाम से जाना जाता था?

    A) निएंडरथल

    B) क्रो-मैग्नन

    C) ऑस्ट्रेलोपिथेकस

    D) होमो हैबिलिस

    उत्तर: B) क्रो-मैग्नन

    व्याख्या: क्रो-मैग्नन को शारीरिक रूप से आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) का प्रारंभिक रूप माना जाता है। वे उच्च पुरापाषाण काल के दौरान यूरोप में रहते थे और उन्नत औजारों और कला के लिए जाने जाते हैं।

    44. इनामगांव भारत के किस राज्य में स्थित है?

    A) मध्य प्रदेश

    B) आंध्र प्रदेश

    C) महाराष्ट्र

    D) गुजरात

    उत्तर: C) महाराष्ट्र

    व्याख्या: इनामगांव महाराष्ट्र में स्थित एक विशाल ताम्रपाषाणिक बस्ती है। यह जोरवे संस्कृति से संबंधित है और यहाँ से किलेबंदी, घरों और कई कब्रों के साक्ष्य मिले हैं।

    45. पाषाण काल के किस चरण में लोगों ने मृतकों का अंतिम संस्कार करना शुरू किया?

    A) पुरापाषाण काल

    B) मध्यपाषाण काल

    C) नवपाषाण काल

    D) ताम्रपाषाण काल

    उत्तर: B) मध्यपाषाण काल

    व्याख्या: मध्यपाषाण काल में पहली बार मृतकों को व्यवस्थित रूप से दफनाने की प्रथा के साक्ष्य मिलते हैं। कब्रों में शवों के साथ-साथ माइक्रोलिथ और अन्य वस्तुएं भी रखी जाती थीं, जो किसी प्रकार के पारलौकिक जीवन में विश्वास का संकेत देती हैं।

    46. भारत में प्रागैतिहासिक पुरातत्व का जनक किसे कहा जाता है?

    A) अलेक्जेंडर कनिंघम

    B) रॉबर्ट ब्रूस फूट

    C) सर जॉन मार्शल

    D) एच. डी. सांकलिया

    उत्तर: B) रॉबर्ट ब्रूस फूट

    व्याख्या: रॉबर्ट ब्रूस फूट ने 1863 में पल्लवरम से पहले पाषाण उपकरण की खोज करके भारत में प्रागैतिहासिक अध्ययन की नींव रखी। इसलिए उन्हें ‘भारतीय प्रागैतिहासिक पुरातत्व का जनक’ माना जाता है। (नोट: अलेक्जेंडर कनिंघम को ‘भारतीय पुरातत्व का जनक’ कहा जाता है, जो मुख्य रूप से ऐतिहासिक काल से संबंधित है)।

    47. ब्लेड और ब्यूरिन उपकरण किस काल की विशेषता हैं?

    A) निम्न पुरापाषाण काल

    B) मध्य पुरापाषाण काल

    C) उच्च पुरापाषाण काल

    D) मध्यपाषाण काल

    उत्तर: C) उच्च पुरापाषाण काल

    व्याख्या: उच्च पुरापाषाण काल में पत्थर के लंबे, समानांतर किनारों वाले फलक (Blade) और हड्डी या सींग पर नक्काशी के लिए इस्तेमाल होने वाले नुकीले उपकरण (Burin) का विकास हुआ। यह एक उन्नत उपकरण तकनीक थी।

    48. किस नवपाषाण स्थल पर बड़ी संख्या में भैंसों और बारहसिंगों के सींग से बने उपकरण मिले हैं?

    A) बुर्जहोम

    B) गुफकराल

    C) चिरांद

    D) मेहरगढ़

    उत्तर: C) चिरांद

    व्याख्या: बिहार के सारण जिले में स्थित चिरांद, हड्डी के उपकरणों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां से बड़ी मात्रा में हिरण (बारहसिंगा) के सींगों से बने औजार मिले हैं, जो इस क्षेत्र में इन जानवरों की प्रचुरता को दर्शाते हैं।

    49. ‘मेगालिथ’ (Megalith) का संबंध किससे है?

    A) गुफा चित्रकला

    B) ताम्रपाषाणिक उपकरण

    C) बड़े पत्थरों से निर्मित कब्रें

    D) छोटे पत्थर के औजार

    उत्तर: C) बड़े पत्थरों से निर्मित कब्रें

    व्याख्या: ‘मेगालिथ’ (महापाषाण) बड़े-बड़े पत्थरों से बनाई गई उन संरचनाओं को कहते हैं, जिनका उपयोग कब्रों या स्मारकों के रूप में किया जाता था। यह प्रथा मुख्य रूप से दक्षिण भारत में लौह युग की शुरुआत में प्रचलित थी।

    50. मानव इतिहास में सबसे लंबा काल कौन सा है?

    A) पुरापाषाण काल

    B) मध्यपाषाण काल

    C) नवपाषाण काल

    D) लौह युग

    उत्तर: A) पुरापाषाण काल

    व्याख्या: पुरापाषाण काल लगभग 25 लाख ई.पू. से 10,000 ई.पू. तक चला। यह मानव इतिहास का 99% से अधिक हिस्सा कवर करता है, जिससे यह अब तक का सबसे लंबा काल बन जाता है।