मौर्योत्तर साम्राज्य
शुंग, कण्व, सातवाहन और अन्य राजवंशों का विस्तृत अध्ययन (ईसा पूर्व 185 – ईसा पूर्व 30)
शासक कालक्रम
पुष्यमित्र शुंग
ई.पू. 185 – 149
शुंग वंशपुष्यमित्र शुंग
शुंग वंश | शासनकाल: ई.पू. 185 – 149
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पुष्यमित्र शुंग मौर्य साम्राज्य के अंतिम शासक बृहद्रथ के सेनापति थे। पतंजलि के महाभाष्य में वर्णित है कि उन्होंने एक सैन्य परेड के दौरान बृहद्रथ की हत्या करके शुंग वंश की स्थापना की। उनका साम्राज्य पाटलिपुत्र से लेकर विदिशा तक फैला हुआ था।
शुंग वंश की स्थापना मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद हुई जब साम्राज्य कमजोर हो चुका था। पुष्यमित्र ने एक स्थिर शासन व्यवस्था स्थापित की और उत्तर भारत में राजनीतिक एकता बनाए रखने का प्रयास किया।
मेनांडर
ई.पू. 165 – 130
इंडो-ग्रीकमेनांडर
इंडो-ग्रीक | शासनकाल: ई.पू. 165 – 130
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मेनांडर (मिलिंद) भारत में शासन करने वाले सबसे प्रसिद्ध इंडो-ग्रीक शासक थे। उनका राज्य पंजाब और सिंध से लेकर उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था। उनकी राजधानी साकल (आधुनिक सियालकोट) थी।
मेनांडर ने भारत पर आक्रमण करके एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया। उनके साम्राज्य में गांधार, पंजाब और मथुरा के क्षेत्र शामिल थे। बौद्ध ग्रंथ ‘मिलिंदपन्हो’ में उनका विस्तृत वर्णन मिलता है जो उनके और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच हुए धार्मिक संवाद का संग्रह है।
गौतमीपुत्र सातकर्णी
ई.पू. 106 – 130
सातवाहनगौतमीपुत्र सातकर्णी
सातवाहन वंश | शासनकाल: ई.पू. 106 – 130
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गौतमीपुत्र सातकर्णी सातवाहन वंश के सबसे प्रतापी शासक थे। उनकी माता गौतमी बालश्री के नासिक अभिलेख से उनके विजयों का विस्तृत वर्णन मिलता है। उन्होंने शक, यवन और पहलव शासकों को पराजित करके दक्कन क्षेत्र में सातवाहन साम्राज्य का पुनरुत्थान किया।
गौतमीपुत्र ने पश्चिमी क्षत्रपों के विरुद्ध सफल अभियान चलाकर महाराष्ट्र, मालवा और सौराष्ट्र पर अधिकार कर लिया। उन्होंने खुद को ‘त्रि-समुद्र-तोय-पीत-वाहन’ (तीन समुद्रों के जल को पीने वाला) कहा जो उनके विशाल साम्राज्य का प्रतीक है।
खारवेल
ई.पू. 193 – 170
चेदि वंशखारवेल
चेदि वंश | शासनकाल: ई.पू. 193 – 170
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
खारवेल कलिंग के महान शासक थे जो चेदि वंश से संबंधित थे। उनकी उपलब्धियों का विवरण उड़ीसा के हाथीगुम्फा शिलालेख में मिलता है। खारवेल ने कलिंग को एक शक्तिशाली राज्य के रूप में स्थापित किया और विस्तारवादी नीति अपनाई।
वह जैन धर्म के अनुयायी थे और उन्होंने अपने शासनकाल में कई धार्मिक कार्य किए। खारवेल ने अपनी सेना के बल पर पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण करके कलिंग के प्रभाव क्षेत्र का विस्तार किया।
वासुदेव कण्व
ई.पू. 75 – 66
कण्व वंशवासुदेव कण्व
कण्व वंश | शासनकाल: ई.पू. 75 – 66
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वासुदेव कण्व कण्व वंश के संस्थापक थे जिन्होंने शुंग वंश के अंतिम शासक देवभूति की हत्या करके सत्ता हासिल की। उनका शासनकाल लगभग 9 वर्षों तक रहा और उनके बाद उनके वंशजों ने शासन किया।
कण्व वंश ने मगध पर लगभग 45 वर्षों तक शासन किया। वासुदेव ने प्रशासनिक ढांचे को बनाए रखा और धार्मिक गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया। हालांकि, कण्व वंश का साम्राज्य शुंग वंश की तुलना में छोटा था और इसकी राजधानी पाटलिपुत्र में ही रही।
प्रमुख राजवंश
- शुंग वंश (ई.पू. 185-73)
- कण्व वंश (ई.पू. 73-28)
- सातवाहन वंश (ई.पू. 230 – ईसवी 220)
- इंडो-ग्रीक (ई.पू. 180-10)
- कुषाण वंश (ईसवी 30-375)

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